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NTA Reforms News Update: Why did the PM choose Nandan Nilekani? Who is Nandan Nilekani? NTA
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NTA Reforms News Update: नंदन नीलेकणि को PM ने क्यों चुना? Who is Nandan Nilekani? NTA
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Mon, 27 Jul 2026 04:20 PM IST
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने देश की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए एक हाई पावर्ड टास्क फोर्स के गठन का ऐलान किया है। इस टास्क फोर्स की कमान इंफोसिस के सह-संस्थापक और देश के जाने-माने टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि को सौंपी गई है।
दिलचस्प बात यह है कि नंदन नीलेकणि कभी कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षा सुधार जैसे अहम मिशन के लिए उन्हीं पर भरोसा क्यों जताया? इसकी वजह उनके राजनीतिक अतीत से ज्यादा उनकी तकनीकी विशेषज्ञता और बड़े राष्ट्रीय डिजिटल प्रोजेक्ट्स का अनुभव माना जा रहा है।
कांग्रेस के टिकट पर लड़ चुके हैं चुनाव
नंदन नीलेकणि सिर्फ टेक्नोलॉजी की दुनिया का बड़ा नाम ही नहीं, बल्कि राजनीति में भी अपनी किस्मत आजमा चुके हैं।
मुख्य बातें:
* 2014 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु दक्षिण सीट से चुनाव लड़ चुके हैं।
* उनका मुकाबला भाजपा के वरिष्ठ दिवंगत नेता अनंत कुमार से हुआ।
* चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
* इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली।
'आधार मैन' के रूप में मिली राष्ट्रीय पहचान
भारत के डिजिटल बदलाव की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक आधार के पीछे नंदन नीलेकणि की अहम भूमिका रही है।
आधार परियोजना में योगदान:
* 2009 में उन्हें यूआईडीएआई (UIDAI) का पहला चेयरमैन बनाया गया।
* उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया गया।
* आधार की रूपरेखा तैयार करने और उसे लागू करने में नेतृत्व किया।
* करोड़ों भारतीयों को डिजिटल पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसी काम के कारण उन्हें देश और दुनिया में 'आधार मैन' के नाम से पहचान मिली।
यूपीआई क्रांति के प्रमुख चेहरों में शामिल
डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को मजबूत बनाने में भी नंदन नीलेकणि का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
यूपीआई से जुड़े अहम योगदान:
* डिजिटल पेमेंट फ्रेमवर्क तैयार करने में प्रमुख भूमिका।
* 2019 में RBI की डिजिटल पेमेंट्स समिति की अध्यक्षता।
* पूरे देश में डिजिटल भुगतान को आसान और सुलभ बनाने के सुझाव।
* भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल को वैश्विक पहचान दिलाने में योगदान।
* 2023 में G20 की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर टास्क फोर्स के को-चेयर बनाए गए।
सुप्रीम कोर्ट और एआई परियोजनाओं से भी जुड़े
नंदन नीलेकणि केवल डिजिटल पहचान और भुगतान तक सीमित नहीं रहे, बल्कि न्यायपालिका और ऊर्जा क्षेत्र में भी तकनीकी सुधारों से जुड़े रहे हैं।
अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां:
* 2025 में सुप्रीम कोर्ट की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कमेटी में विशेषज्ञ के रूप में नियुक्ति।
* न्यायपालिका में एआई के उपयोग को बढ़ावा देने पर काम।
* एनर्जी स्टैक टास्क फोर्स के चीफ मेंटर के रूप में ऊर्जा क्षेत्र के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर कार्य।
परीक्षा सुधार के लिए क्यों चुने गए?
सरकार का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए तकनीक का व्यापक उपयोग जरूरी है। नंदन नीलेकणि का अनुभव इसी क्षेत्र में सबसे मजबूत माना जाता है।
चयन की प्रमुख वजहें:
* बड़े राष्ट्रीय डिजिटल प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक लागू करने का अनुभव।
* सुरक्षित और स्केलेबल टेक्नोलॉजी सिस्टम विकसित करने में विशेषज्ञता।
* डिजिटल पहचान, डेटा सुरक्षा और टेक्नोलॉजी गवर्नेंस की गहरी समझ।
* परीक्षा सुधार से जुड़े पैनलों में पहले भी काम कर चुके हैं।
गौरतलब है कि 2018-19 में स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (SSC) परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सात सदस्यीय समिति में भी नंदन नीलेकणि सदस्य रहे थे। इस अनुभव को भी उनके चयन का एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है।
सरकार की क्या है उम्मीद?
सरकार को उम्मीद है कि नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में बनी हाई पावर्ड टास्क फोर्स ऐसी सिफारिशें देगी, जिनसे प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, फर्जीवाड़े और तकनीकी खामियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। साथ ही, आधुनिक तकनीक के जरिए परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जा सकेगा।
अब सभी की नजर इस टास्क फोर्स की सिफारिशों पर होगी, क्योंकि इन्हीं के आधार पर भविष्य की परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। छात्रों और अभिभावकों की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि आने वाले समय में प्रतियोगी परीक्षाएं पूरी तरह निष्पक्ष हों और युवाओं का व्यवस्था पर भरोसा फिर से मजबूत हो सके।
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