Hindi News
›
Video
›
India News
›
TMC Split: How will the NDA benefit in the Lok Sabha from the split in the TMC? Mamata | Saayoni Ghosh | Yusuf
{"_id":"6a2c31c98931421809032937","slug":"tmc-split-how-will-the-nda-benefit-in-the-lok-sabha-from-the-split-in-the-tmc-mamata-saayoni-ghosh-yusuf-2026-06-12","type":"video","status":"publish","title_hn":"TMC Split: TMC की टूट का NDA को लोकसभा में कैसे होगा फायदा? Mamata | Saayoni Ghosh | Yusuf Pathan","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
TMC Split: TMC की टूट का NDA को लोकसभा में कैसे होगा फायदा? Mamata | Saayoni Ghosh | Yusuf Pathan
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Fri, 12 Jun 2026 09:50 PM IST
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर शुरू हुआ असंतोष अब राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करने की स्थिति में पहुंच गया है। पार्टी में बढ़ती बगावत और सांसदों के संभावित टूट की चर्चा सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर संसद के आगामी मानसून सत्र और केंद्र सरकार के विधायी एजेंडे पर पड़ सकता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि टीएमसी में टूट की अटकलें सच साबित होती हैं, तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को संसद में बड़ी मजबूती मिल सकती है।
जुलाई के तीसरे सप्ताह से संसद का मानसून सत्र शुरू होने की संभावना है। इसी सत्र में केंद्र सरकार एक बार फिर परिसीमन विधेयक और उससे जुड़े संवैधानिक संशोधन प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की तैयारी में बताई जा रही है। यह वही विधेयक है जो अप्रैल में संसद में आवश्यक समर्थन नहीं मिलने के कारण पारित नहीं हो पाया था। उस समय सरकार के पास संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं था।
परिसीमन से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के साथ महिला आरक्षण से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों को भी जोड़ा गया था। चूंकि संविधान संशोधन के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है, इसलिए सरकार को विपक्षी दलों के समर्थन की जरूरत थी। लेकिन पर्याप्त संख्या नहीं जुट पाने के कारण विधेयक अटक गया।
अब राजनीतिक परिस्थितियां बदलती दिखाई दे रही हैं। टीएमसी में लगातार बढ़ते असंतोष ने पार्टी नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं। कई सांसदों और नेताओं के बगावती रुख अपनाने की खबरें सामने आ रही हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पार्टी के भीतर एक बड़ा गुट अलग राह चुन सकता है। दावा किया जा रहा है कि लोकसभा में टीएमसी के कुछ सांसद भविष्य में अलग समूह बनाकर एनडीए को समर्थन दे सकते हैं।
लोकसभा में वर्तमान संख्या बल को देखें तो तस्वीर काफी दिलचस्प नजर आती है। 543 सदस्यीय सदन में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा सामान्य परिस्थितियों में 362 के आसपास बैठता है। हालांकि कुछ सीटें रिक्त होने के कारण प्रभावी संख्या में कमी आई है। ऐसे में बहुमत का गणित भी बदल गया है। एनडीए के पास पहले से ही करीब 293 सांसदों का समर्थन माना जा रहा है। यदि टीएमसी के संभावित बागी सांसद सरकार के पक्ष में आते हैं, तो सत्ता पक्ष की ताकत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।
राजनीतिक समीकरण यहीं नहीं रुकते। दक्षिण भारत की राजनीति भी इस गणित को प्रभावित कर सकती है। तमिलनाडु में बदलते राजनीतिक संबंधों और क्षेत्रीय दलों की रणनीतियों पर भी सभी की नजर है। यदि कुछ मुद्दों पर क्षेत्रीय दल सरकार का समर्थन करते हैं, तो संसद में सरकार की स्थिति और मजबूत हो सकती है। इसके अलावा महाराष्ट्र की राजनीति में भी संभावित फेरबदल को लेकर अटकलें जारी हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी खेमे के कुछ सांसद भविष्य में सरकार समर्थक रुख अपना सकते हैं।
संविधान संशोधन विधेयकों के मामले में केवल संख्या ही नहीं, बल्कि सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों की संख्या भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। नियमों के अनुसार, संविधान संशोधन पारित कराने के लिए सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों में से दो-तिहाई का समर्थन आवश्यक होता है। यही वजह है कि कई बार वास्तविक मतदान के दौरान बहुमत का आंकड़ा कुल सदस्य संख्या से अलग हो जाता है।
अप्रैल में हुई वोटिंग इसका उदाहरण रही थी। उस समय सभी सांसद सदन में मौजूद नहीं थे, जिसके कारण प्रभावी बहुमत का आंकड़ा बदल गया था। यदि आगामी मानसून सत्र में भी इसी तरह की स्थिति बनती है और विपक्ष पूरी ताकत के साथ मौजूद नहीं रहता, तो सरकार के लिए आवश्यक समर्थन जुटाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
राज्यसभा में भी एनडीए की स्थिति पहले की तुलना में काफी मजबूत मानी जा रही है। ऊपरी सदन में सरकार समर्थक दलों की संख्या लगातार बढ़ी है और गठबंधन विशेष बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंच चुका है। ऐसे में यदि लोकसभा में सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में सफल रहती है, तो राज्यसभा में भी विधेयक पारित कराने का रास्ता अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या टीएमसी के भीतर चल रही खींचतान वास्तव में बड़े राजनीतिक विभाजन में बदलती है या नहीं। लेकिन इतना तय है कि बंगाल की सियासत में उठी हलचल अब दिल्ली की सत्ता और संसद के गणित को भी प्रभावित करने लगी है। आगामी मानसून सत्र में यही समीकरण देश की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।