फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   manish tewari says india no longer a democracy raises concerns over parliament and judiciary

'भारत अब लोकतंत्र नहीं रहा': मनीष तिवारी का दावा, बोले- संसद सत्ता का अखाड़ा बनी; और क्या-क्या कहा?

Sun, 02 Aug 2026 12:55 PM IST
राकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Sun, 02 Aug 2026 12:55 PM IST
सार

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के अनुसार भारत की लोकतांत्रिक संस्थाएं बेअसर हो चुकी हैं। संसद चर्चा का मंच बनने के बजाय सत्ता संघर्ष का मैदान बन गई है। घटते कामकाज को देखते हुए उन्होंने देश के संवैधानिक ढांचे में बड़े सुधार की मांग की है।
 

विज्ञापन
manish tewari says india no longer a democracy raises concerns over parliament and judiciary
मनीष तिवारी, कांग्रेस सांसद - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर संसद और दूसरी विधायी संस्थाओं को संविधान के मुताबिक अपना काम ठीक से करना है, तो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में बुनियादी बदलाव करने होंगे। उनका दावा है कि आज भारत वास्तविक अर्थों में लोकतंत्र नहीं रह गया है, क्योंकि जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्थाएं धीरे-धीरे कमजोर होती गई हैं।
विज्ञापन


'संसद सत्ता हासिल करने का अखाड़ा बन गई'
मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि संसद और दूसरी विधायी संस्थाओं का काम कानून बनाना और सरकार को जवाबदेह बनाना है। लेकिन अगर ये संस्थाएं केवल कार्यपालिका की सत्ता हासिल करने का माध्यम बनकर रह जाएंगी, तो नैतिक, राजनीतिक और सांविधानिक स्तर पर गिरावट लगातार बढ़ती जाएगी। उन्होंने लिखा कि यह गिरावट 1990 के दशक की शुरुआत में शुरू हुई थी और तब से लगातार जारी है।
विज्ञापन


लोकसभा के कामकाज के आंकड़े भी गिनाए
कांग्रेस सांसद ने संसद के कामकाज के आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि पहली लोकसभा (1952-57) हर साल औसतन 135 दिन बैठती थी। इसके मुकाबले 17वीं लोकसभा में बैठकें घटकर 55 दिन रह गईं। उनका कहना है कि इन 55 दिनों में भी करीब 30 से 35 दिन हंगामे और व्यवधान की वजह से प्रभावित रहे। उन्होंने यह भी कहा कि 13वीं, 14वीं, 15वीं और 16वीं लोकसभा का प्रदर्शन भी इससे बहुत बेहतर नहीं था।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: 'पिता की 60 हजार तनख्वाह, बेटे की पढ़ाई US में कैसे': दीपके पर RTI एक्टिविस्ट का ट्रिपल अटैक! EC से की ये मांग

'18वीं लोकसभा नया रिकॉर्ड बना सकती है'
मनीष तिवारी ने आशंका जताई कि 18वीं लोकसभा विधायी कामकाज ठप रहने के मामले में पिछली लोकसभा का रिकॉर्ड भी तोड़ सकती है। उनके मुताबिक, अगर यही स्थिति बनी रही तो संसद अपनी सांविधानिक जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से नहीं निभा पाएगी।


कार्यपालिका और न्यायपालिका पर भी सवाल
कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि आज देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं का संतुलन कमजोर हो गया है। उन्होंने कहा कि अब व्यवस्था ऐसी बन गई है, जिसमें एक ओर शक्तिशाली कार्यपालिका है और दूसरी ओर न्यायपालिका, जो 'मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर' के बावजूद अपने न्यायाधीशों की नियुक्ति खुद करती है।

'सांविधानिक ढांचे की समीक्षा जरूरी'
मनीष तिवारी ने आगे कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए भारतीय लोकतांत्रिक और सांविधानिक ढांचे की बुनियादी समीक्षा की जानी चाहिए। उनके मुताबिक, संसद और दूसरी विधायी संस्थाओं को उनकी मूल भूमिका में मजबूत किए बिना लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावी नहीं बनाया जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed