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Tariff: 'चीन को अमेरिकी टैरिफ से बचने में मदद कर रहे भारत समेत 40 देश', अमेरिका ने लगाया गंभीर आरोप

Fri, 14 Aug 2026 10:45 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Fri, 14 Aug 2026 10:45 AM IST
सार

ट्रंप प्रशासन की रिपोर्ट में भारत समेत 40 से अधिक देशों को चीन की टैरिफ चोरी में संभावित भूमिका का आरोप लगाया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि  चीन तीसरे देशों के जरिए माल की पहचान बदलकर अमेरिकी शुल्क से बचता है। आईए जानतें हैं अमेरिका इससे बचने के लिए क्या करने वाला है? पढ़ें पूरी खबर 
 

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40 countries, including India, are helping China evade  tariffs US makes serious allegation.
चीन की टैरिफ चोरी पर ट्रंप का नया खुलासा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारत, कनाडा और यूरोपीय संघ समेत अमेरिका के 40 से ज्यादा व्यापारिक साझेदारों की पहचान की है। इन पर आरोप है कि वे एक 'शैडो ट्रांस-शिपमेंट नेटवर्क' यानी कि अवैध माल ढुलाई नेटवर्क चलाकर चीन को टैरिफ से बचने में मदद कर सकते हैं, जिससे जोखिम पैदा हो सकता है। अमेरिका ने ऐसी गैर-कानूनी गतिविधियों का पता लगाने और उन पर जुर्माना लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करने का संकल्प लिया है।

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क्या है द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम? 
'द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम' नाम की व्हाइट हाउस की रिपोर्ट में 'गैर-कानूनी ट्रांसशिपमेंट' से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही चिंता की आलोचना की गई है। इसमें बताया गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए ऊंचे शुल्क से बचने के लिए सामान को किसी ऐसे तीसरे देश के रास्ते भेजा जा सकता है, जहां अमेरिका का टैरिफ कम हो। रिपोर्ट में बताए गए अन्य देशों में ताइवान, मैक्सिको, जापान, दक्षिण कोरिया और वियतनाम शामिल हैं।
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रिपोर्ट में क्या बताया गया है? 
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुख्य व्यापार सलाहकार पीटर नवारो की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018 के बाद ट्रांसशिपमेंट (एक देश से दूसरे देश के रास्ते सामान भेजना) ज्यादा होने लगा। यह तब हुआ जब ट्रंप प्रशासन ने अनुचित व्यापार तौर-तरीकों का मुकाबला करने के लिए चीन पर सेक्शन 301 के तहत टैरिफ लगाए। नवारो ने पत्रकारों से कहा, 'वर्षों से, इस बड़े ट्रांसशिपमेंट घोटाले की वजह से कम्युनिस्ट चीन 40 से ज्यादा देशों के जरिए अपने निर्यात को दूसरे देशों में भेजकर उन्हें अपना माल बताकर बेचता रहा है।'
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यह 40 देश ही क्यों? 
रिपोर्ट में 40 से ज्यादा ऐसे देशों का जिक्र किया गया है, जहां गैर-कानूनी ट्रांसशिपमेंट का जोखिम ज्यादा है। इसमें कहा गया है कि कुछ अर्थव्यवस्थाओं के लिए, ट्रांसशिपमेंट का जोखिम बड़े पैमाने पर होने वाले वैध व्यापार का ही एक हिस्सा बन गया है। कुछ अन्य देश चीन से जुड़ी सप्लाई चेन से  ज्यादा जुड़े हुए पाए गए। वहीं, एक तीसरे समूह को अमेरिका तक खास पहुंच जैसे फायदे हासिल थे, जो उन्हें सामान का रूट बदलने के लिए आकर्षक और सुविधाजनक लक्ष्य बनाते हैं।

चीन इन देशों का इस्तेमाल क्यों करता था? 
नवारो ने रिपोर्ट में कहा, 'चीन ने इन तीसरे देशों का इस्तेमाल मामूली प्रोसेसिंग, री-लेबलिंग, री-पैकेजिंग, री-इनवॉइसिंग या रूटिंग में बदलाव के लिए करना शुरू कर दिया, जिससे ऐसा लगता था कि सामान किसी नए देश का है, जबकि असल में उसमें चीनी सामग्री वैसी ही बनी रहती थी।'

उन्होंने कहा कि टैरिफ से बचने के लिए, चीन और उसकी सरकारी मदद वाली मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेडिंग कंपनियां ऐसे इलाकों में सामान भेज सकते हैं जहां सस्ता लेबर हो, कस्टम्स की निगरानी कम हो, फ्री जोन में ढील हो, या जिन्हें अमेरिका के साथ व्यापार में खास सुविधाएं मिलती हों।

इससे बचने के लिए क्या कर रहा है अमेरिका? 
नवारो की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस यूएस कस्टम्स और बॉर्डर प्रोटेक्शन के साथ मिलकर एआई-आधारित डिटेक्टिव बॉर्डर पर काम कर रहा है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि क्या किसी शिपमेंट में ट्रांसशिप्ड सामान (एक जगह से दूसरी जगह ले जाया गया सामान) शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह सिस्टम शिपमेंट डेटा, रूटिंग हिस्ट्री और दूसरे टूल्स जैसी जानकारी का इस्तेमाल करेगा।


जानकारों का कहना है कि ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरानजब 2018 के आसपास वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच टैरिफ वॉर चल रहा था। तभी से चीन से सप्लाई चेन को दूसरी जगहों पर शिफ्ट करने का सिलसिला शुरू हो गया था। अर्थशास्त्रियों ने बताया कि जब कंपनियों ने अपनी सप्लाई चेन को अलग-अलग जगहों पर फैलाया, तो वियतनाम जैसे देशों को इसका फायदा हुआ। पिछले साल व्हाइट हाउस में वापसी के बाद से, ट्रंप ने अमेरिका के साथ व्यापार करने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाए हैं, जिससे चीनी सामान पर पहले से लग रहे टैरिफ का बोझ और बढ़ गया है।


 

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