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WEF: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की वैश्विक रिपोर्ट, टैरिफ युद्ध-एआई जोखिम वैश्विक कारोबार के लिए सबसे बड़ा खतरा
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: लव गौर
Updated Tue, 20 Jan 2026 05:16 AM IST
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सार
डब्ल्यूईएफ की यह रिपोर्ट सरकार, व्यापार और विभिन्न संगठनों से जुड़े लगभग 1300 नेताओं के सर्वेक्षण पर आधारित है। रिपोर्ट के अनुसार अगले दो वर्षों में जियो इकोनॉमिक कन्फ्रन्टेशन यानी भू-आर्थिक टकराव कारोबार से जुड़ी चिंताओं की सूची में पहले स्थान पर पहुंच गया है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ)
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
वैश्विक अर्थव्यवस्था वर्ष 2026 की दहलीज पर ऐसे दौर में खड़ी है, जहां भू-आर्थिक टकराव, तकनीकी अनिश्चितता और जलवायु संकट एक साथ दबाव बना रहे हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की ग्लोबल रिस्क्स रिपोर्ट 2026 के मुताबिक आने वाले दो वर्षों में कारोबार के लिए सबसे बड़ा खतरा देशों के बीच बढ़ता आर्थिक और रणनीतिक टकराव (टैरिफ वॉर) है, जबकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से जुड़ी नकारात्मक संभावनाएं सबसे तेजी से उभरता जोखिम बनकर सामने आई हैं। रिपोर्ट दुनिया को ऐसे मोड़ पर बताती है जहां अस्थिरता सामान्य स्थिति बनती जा रही है।
डब्ल्यूईएफ की यह रिपोर्ट सरकार, व्यापार और विभिन्न संगठनों से जुड़े लगभग 1300 नेताओं के सर्वेक्षण पर आधारित है। रिपोर्ट के अनुसार अगले दो वर्षों में जियो इकोनॉमिक कन्फ्रन्टेशन यानी भू-आर्थिक टकराव कारोबार से जुड़ी चिंताओं की सूची में पहले स्थान पर पहुंच गया है। इसमें टैरिफ, नियमों, सप्लाई चेन और पूंजी प्रवाह को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति शामिल है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि इस तरह की प्रतिस्पर्धा वैश्विक व्यापार में बड़े संकुचन का कारण बन सकती है।
एआई से व्यापक तौर पर है रोजगार विस्थापन का खतरा
इस सर्वेक्षण में सबसे चौंकाने वाला बदलाव कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े जोखिमों को लेकर देखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक एआई से बड़े पैमाने पर रोजगार विस्थापन हो सकता है जिससे आय असमानता, सामाजिक विभाजन, उपभोक्ता खर्च में गिरावट और आर्थिक-सामाजिक असंतोष का दुष्चक्र पैदा हो सकता है, भले ही उत्पादकता में भारी वृद्धि ही क्यों न हो।
ये भी पढ़ें: Indians At Davos WEF 2026: स्विट्जरलैंड में आर्थिक नीतियों पर मंथन, भारत से छह CM समेत कई हस्तियां पहुंचीं
मशीन लर्निंग और क्वांटम कंप्यूटिंग का संगम
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि मशीन लर्निंग और क्वांटम कंप्यूटिंग का तेजी से हो रहा विकास एक सुपरचार्ज्ड तकनीकी परिदृश्य बना सकता है। इस स्थिति में ऐसे हालात पैदा हो सकते हैं, जहां मानव नियंत्रण कमजोर पड़ जाए और जोखिम कई गुना बढ़ जाएं। अल्पकालिक जोखिमों में गलत सूचना और दुष्प्रचार दूसरे स्थान पर हैं, जबकि सामाजिक ध्रुवीकरण तीसरे स्थान पर है। रिपोर्ट के अनुसार आय असमानता अगले दस वर्षों में सबसे अधिक आपस में जुड़ा हुआ जोखिम बनी रहेगी।
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डब्ल्यूईएफ की यह रिपोर्ट सरकार, व्यापार और विभिन्न संगठनों से जुड़े लगभग 1300 नेताओं के सर्वेक्षण पर आधारित है। रिपोर्ट के अनुसार अगले दो वर्षों में जियो इकोनॉमिक कन्फ्रन्टेशन यानी भू-आर्थिक टकराव कारोबार से जुड़ी चिंताओं की सूची में पहले स्थान पर पहुंच गया है। इसमें टैरिफ, नियमों, सप्लाई चेन और पूंजी प्रवाह को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति शामिल है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि इस तरह की प्रतिस्पर्धा वैश्विक व्यापार में बड़े संकुचन का कारण बन सकती है।
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एआई से व्यापक तौर पर है रोजगार विस्थापन का खतरा
इस सर्वेक्षण में सबसे चौंकाने वाला बदलाव कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े जोखिमों को लेकर देखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक एआई से बड़े पैमाने पर रोजगार विस्थापन हो सकता है जिससे आय असमानता, सामाजिक विभाजन, उपभोक्ता खर्च में गिरावट और आर्थिक-सामाजिक असंतोष का दुष्चक्र पैदा हो सकता है, भले ही उत्पादकता में भारी वृद्धि ही क्यों न हो।
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मशीन लर्निंग और क्वांटम कंप्यूटिंग का संगम
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि मशीन लर्निंग और क्वांटम कंप्यूटिंग का तेजी से हो रहा विकास एक सुपरचार्ज्ड तकनीकी परिदृश्य बना सकता है। इस स्थिति में ऐसे हालात पैदा हो सकते हैं, जहां मानव नियंत्रण कमजोर पड़ जाए और जोखिम कई गुना बढ़ जाएं। अल्पकालिक जोखिमों में गलत सूचना और दुष्प्रचार दूसरे स्थान पर हैं, जबकि सामाजिक ध्रुवीकरण तीसरे स्थान पर है। रिपोर्ट के अनुसार आय असमानता अगले दस वर्षों में सबसे अधिक आपस में जुड़ा हुआ जोखिम बनी रहेगी।
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