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Donald Trump: ट्रंप के गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने से किन देशों ने किया इनकार? भारत को भी मिला न्योता

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Tue, 20 Jan 2026 10:45 AM IST
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सार

गाजा शांति बोर्ड में स्थायी सदस्यता के लिए और वहां पुनर्निर्माण के लिए कथित तौर पर एक अरब डॉलर का शुल्क रखा गया है। हालांकि व्हाइट हाउस का कहना है कि कोई अनिवार्य न्यूनतम शुल्क नहीं है और अल्पकालिक भागीदारी के लिए भुगतान आवश्यक नहीं होगा।

Donald Trump Gaza Board Of Peace members list India Pakistan which countries accepted and declined invitation
गाजा शांति बोर्ड - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी में गाजा पट्टी में स्थायी शांति, पुनर्निर्माण और अस्थायी शासन की निगरानी के लिए 'बोर्ड ऑफ पीस' बनाने का एलान किया। इसके साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर के कई देशों के नेताओं को अपने प्रस्तावित 'गाजा शांति बोर्ड' में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। 
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ट्रंप के अनुसार यह अंतरराष्ट्रीय निकाय शुरुआत में युद्ध के बाद गाजा के भविष्य को दिशा देने पर ध्यान देगा और बाद में अपने दायरे का विस्तार कर वैश्विक शांति प्रयासों पर काम करेगा। ट्रंप ने इस बोर्ड को 'अब तक का सबसे प्रभावशाली और निर्णायक समूह' बताया है। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति खुद इसके अध्यक्ष हैं। 
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'गाजा शांति बोर्ड' में कौन-कौन शामिल?
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, अध्यक्ष
  • अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो
  • स्टीव विटकॉफ, ट्रंप के विशेष वार्ताकार
  • जेरेड कुशनर, ट्रंप के दामाद
  • टोनी ब्लेयर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री
  • मार्क रोवन, अरबपति अमेरिकी फाइनेंसर
  • अजय बंगा, विश्व बैंक के अध्यक्ष
  • रॉबर्ट गैब्रियल, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में ट्रंप के वफादार सहयोगी

इस पहल को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ देशों ने इसमें शामिल होने की सहमति दी है, जबकि कुछ ने इनकार किया है या अभी निर्णय को टाल दिया है। कई देशों ने इसके अधिकार क्षेत्र, संरचना और संयुक्त राष्ट्र से इसके संबंधों को लेकर सवाल भी उठाए हैं।

इन देशों को मिला निमंत्रण
जिन देशों ने सार्वजनिक रूप से निमंत्रण मिलने की पुष्टि की है, उनमें जॉर्डन, अर्जेंटीना, मिस्र, पराग्वे, पाकिस्तान, ग्रीस, तुर्किये, अल्बानिया, हंगरी, साइप्रस, कनाडा, इजरायल, भारत, फ्रांस, रूस, बेलारूस, स्लोवेनिया, थाईलैंड, वियतनाम, कजाकिस्तान, मोरक्को और यूरोपीय संघ का कार्यकारी अंग शामिल हैं। तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन से लेकर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी तक कई नेताओं से संपर्क किया गया है।

बोर्ड में शामिल होंगे ये देश
मोरक्को के राजा मोहम्मद षष्ठम ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है और वह ऐसा करने वाले पहले अरब नेता बने हैं। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई ने खुद को संस्थापक सदस्य बताया है। हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन ने भी इसे सम्मान बताते हुए स्वीकार किया है। वियतनाम और कजाकिस्तान ने भी बोर्ड में शामिल होने पर सहमति जता दी है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सिद्धांत रूप में सहमति जताई है, लेकिन कहा है कि अभी विवरण स्पष्ट होना बाकी हैं और कनाडा किसी सदस्यता शुल्क का भुगतान नहीं करेगा।

इन देशों ने किया इनकार, कई ने टाला फैसला
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों और ढांचे के सम्मान को लेकर चिंताओं का हवाला देते हुए फिलहाल शामिल होने से इनकार किया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा कि उनका देश सहयोगियों के साथ इस प्रस्ताव पर चर्चा कर रहा है, लेकिन अभी समर्थन नहीं दिया है। यूरोपीय संघ ने भी कहा है कि सदस्य देशों के बीच बातचीत जारी है और अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

रूस ने मांगा प्रस्ताव पर स्पष्टीकरण
रूस ने निमंत्रण मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि वह प्रस्ताव के विवरणों का अध्ययन कर रहा है और स्पष्टीकरण चाहता है। बेलारूस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको भाग लेने के लिए तैयार हैं। थाईलैंड ने भी निमंत्रण मिलने की पुष्टि की है और प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है।

इस्राइल ने जताई आपत्ति
इस्राइल ने कहा है कि बोर्ड के गठन पर उससे परामर्श नहीं किया गया और उसने इसके तहत प्रस्तावित अलग गाजा कार्यकारी समिति की सदस्यता पर आपत्ति जताई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका के साथ मतभेदों से द्विपक्षीय संबंध प्रभावित नहीं होंगे। हालांकि, वित्त मंत्री बेजालेएल स्मोट्रिच ने इस योजना को इस्राइल के लिए नुकसानदेह बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि गाजा पट्टी में तुर्की या कतर के सैनिकों की तैनाती नहीं होगी।

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