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US-France: निजी मैसेज लीक, फिर टैरिफ की धमकी भी; क्या बोर्ड ऑफ पीस के नाम पर मैक्रों को ब्लैकमेल कर रहे ट्रंप?

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 20 Jan 2026 02:41 PM IST
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सार

निजी कूटनीतिक संदेश को सार्वजनिक करना, साथ ही फ्रेंच वाइन पर 200 फीसदी टैरिफ की धमकी। इन कदमों ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या ट्रंप फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं? ग्रीनलैंड विवाद, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से दूरी और बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव। इस पूरे घटनाक्रम में कूटनीति से ज्यादा ताकत की राजनीति क्यों दिख रही है? और क्या है पूरा मामला, आइए जानते है?

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इमैनुएल मैक्रों और डोनाल्ड ट्रंप (फाइल) - फोटो : ANI
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फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों और उनके अमेरिकी समकक्ष डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई निजी बातचीत सार्वजनिक होने की खबर सामने आई है। खबरों के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के साथ ग्रीनलैंड से जुड़े विवाद पर संवाद किया। हालांकि, लिखित संदेशों के जरिए हुई दोनों की ये बातचीत अब मीडिया में चर्चा का विषय बन गई है। खबरों के मुताबिक ट्रंप और मैक्रों के बीच हुई बातचीत का एक टेक्स्ट मैसेज सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है।

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ट्रंप के ग्रीनलैंड वाले फैसले पर खुलकर सवाल किए
खबरों के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुद मैक्रों के साथ हुई बातचीत को शेयर किया है। ऐसे में माना जा रहा है कि ट्रंप ने निजी तौर पर हुए कूटनीतिक संवाद (प्राइवेट डिप्लोमैटिक चैट) को सार्वजनिक किया है। इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक मैक्रों ने सीरिया और ईरान के मसलों पर ट्रंप से सहमति जताई, लेकिन उन्होंने ट्रंप के ग्रीनलैंड वाले फैसले पर खुलकर सवाल उठाए। खास बात ये है कि दोनों की बातचीत ऐसे समय में लीक हुई है, जब ग्रीनलैंड को लेकर भूराजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रेंच वाइन पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकियां भी दी हैं।

पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ? समझिए
बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के कुछ देशों को एक संगठन में शामिल होने का न्योता दिया, जिसे उन्होंने 'बोर्ड ऑफ पीस' नाम दिया है। इस बोर्ड का शुरुआती मकसद गाजा युद्ध के बाद के पुनर्निर्माण पर निगरानी रखना बताया गया था। लेकिन फ्रांस को लगा कि इस बोर्ड का काम सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं है। इसके अधिकार बहुत ज्यादा और अस्पष्ट हैं। इसी वजह से फ्रांस ने संकेत दिए कि वह इस बोर्ड में शामिल नहीं होगा।

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ट्रंप का गुस्सा और 200% टैरिफ की धमकी
फ्रांस के इनकार से नाराज होकर ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि मैं फ्रांस की वाइन और शैम्पेन पर 200 प्रतिशत टैक्स (टैरिफ) लगा दूंगा। फिर मैक्रों शामिल हो जाएगा। हालांकि उसे शामिल होना जरूरी नहीं है। यानी अगर फ्रांस बोर्ड में शामिल नहीं हुआ तो अमेरिका फ्रांस की शराब को इतना महंगा कर देगा कि वह अमेरिका में बिक ही न सके। ट्रंप ने निजी मैसेज भी सार्वजनिक किया

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का एक निजी संदेश भी शेयर कर दिया। उस मैसेज में मैक्रों ने कहा था कि ईरान और सीरिया के मुद्दों पर दोनों सहमत हैं, लेकिन उन्हें समझ नहीं आ रहा कि ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर क्या करना चाहते हैं। इस संदेश में मैक्रों ने यह भी कहा कि वे ट्रंप से दावोस (विश्व आर्थिक मंच) में मिल सकते हैं। इतना ही नहीं खबर यह भी है कि यूक्रेन, डेनमार्क, रूस और सीरिया के नेताओं को भी बातचीत में शामिल किया जा सकता है। उन्होंने ट्रंप को डिनर पर चलने का न्योता भी दिया।

ग्रीनलैंड क्यों बना विवाद की जड़?
अब बात अगर पूरे मामले में ग्रीनलैंड और विवाद की कड़ियों की बात की जाए तो, ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है, जो कि आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है। यह क्षेत्र रणनीतिक (सैन्य और सुरक्षा) रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसको लेकर ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि अमेरिका को ग्रीनलैंड पर ज्यादा नियंत्रण चाहिए। इतना ही नहीं अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि भविष्य में रूस आर्कटिक में खतरा बन सकता है। अगर ग्रीनलैंड पर हमला हुआ, तो अमेरिका को नाटो के तहत हस्तक्षेप करना पड़ेगा। इसलिए ट्रंप पहले से सतर्क रहना चाहते हैं

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क्या फ्रांस ने अमेरिका का बनाया मजाक?

गौरतलब है कि अमेरिका और फ्रांस के बीच 'बोर्ड ऑफ पीस' और ग्रीनलैंड को लेकर शुरू हुए विवाद में यह बात साफ है कि फ्रांस को ट्रंप की यह दलील बिल्कुल पसंद नहीं आई। इसी बात को लेकर फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट डालकर अमेरिका का मजाक बनाया।

उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि अगर कभी आग लग सकती है, तो बेहतर है अभी घर जला दो। अगर कभी शार्क हमला कर सकती है, तो अभी लाइफगार्ड को खा लो। अगर कभी एक्सीडेंट हो सकता है, तो अभी गाड़ी ठोक दो। फ्रांस के विदेश मंत्रालय के कहने का अर्थ था कि भविष्य के डर से अभी नुकसान करना बेवकूफी है। 

मामले में फ्रांस का स्पष्ट रुख 
वहीं ट्रंप के धमकी के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के करीबी सूत्रों ने साफ कहा कि टैरिफ की धमकी देकर किसी देश की विदेश नीति बदलवाना गलत है। यह तरीका अस्वीकार्य और बेअसर है। उन्होंने कहा कि फ्रांस ऐसे दबाव में नहीं आएगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि फ्रांस 'बोर्ड ऑफ पीस' के मौजूदा स्वरूप से सहमत नहीं है।

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