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Nobel Peace Prize: नोबेल शांति पुरस्कारों की दौड़ में तीन भारतीय, जानें क्यों बताया जा रहा दावेदार

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ओस्लो Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 05 Oct 2022 10:08 PM IST
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सार

सबसे प्रतिष्ठित वैश्विक सम्मानों में से एक नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा से पहले इस बारे में अटकलबाजियां लगाई जा रही हैं कि कौन व्यक्ति और कौन सा संगठन पसंदीदा नाम है और दौड़ में सबसे आगे है।

AltNews co-founders Pratik Sinha, Mohammed Zubair, Indian author Harsh Mander among favourites to win
आल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर, प्रतीक सिन्हा और लेखक हर्ष मंदर। (बाएं से दाएं) - फोटो : Social Media
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विस्तार

नोबेल शांति पुरस्कार का एलान सात अक्तूबर को होना है। इससे पहले कुछ रिपोर्ट्स सामने आई हैं, जिनमें बताया गया है कि इस पुरस्कार के दावेदारों में तीन भारतीय शामिल हैं। जिन लोगों को शांति के लिए नामित किया गया है, उनमें आल्ट न्यूज के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा, मोहम्मद जुबैर और भारतीय लेखक हर्ष मंदर शामिल हैं। 
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गौरतलब है कि जहां बाकी नोबेल पुरस्कारों  का एलान स्वीडन के स्टॉकहोम से होता है, वहीं शांति के नोबेल की घोषणा नॉर्वे के ओस्लो से की जाती है। सबसे प्रतिष्ठित वैश्विक सम्मानों में से एक नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा से पहले इस बारे में अटकलबाजियां लगाई जा रही हैं कि कौन व्यक्ति और कौन सा संगठन पसंदीदा नाम है और दौड़ में सबसे आगे है।
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‘द टाइम’ पत्रिका ने नॉर्वे के सांसदों के माध्यम से सार्वजनिक किए गए नामांकन, सट्टेबाजों की भविष्यवाणियों और पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट, ओस्लो’’ से चुने गए नामांकन के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें संभावित विजेताओं के नाम शामिल किए गए हैं।

पत्रिका की ओर से तैयार सूची में पत्रकार प्रतीक सिन्हा और जुबैर के नाम शामिल हैं, जो भारत में गलत सूचना के प्रचार प्रसार से लगातार जूझ रहे हैं। द टाइम की रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों ने सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों और फर्जी खबरों को पद्धतिगत रूप से खारिज कर दिया है और नफरती भाषण के प्रसार पर रोक की दिशा में एक बेहतरीन प्रयास किया है।

दिल्ली पुलिस ने जुबैर को ट्वीट के जरिये धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में 27 जून को गिरफ्तार किया था। ‘द टाइम’ के लेख में कहा गया है कि जुबैर की गिरफ्तारी की दुनिया भर के पत्रकारों ने निंदा की है, जिन्होंने कहा है कि जुबैर के खिलाफ कार्रवाई तथ्यान्वेषण के उनके कार्य की दृष्टि से प्रतिशोधात्मक कदम है।

इस सूची में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी, बेलारूस की विपक्षी राजनेता स्वेतलाना सिखानौस्काया, विश्व स्वास्थ्य संगठन, रूसी जेल में बंद विपक्षी नेता और भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता एलेक्सी नवलनी और स्वीडिश जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थुनबर्ग भी शामिल हैं।

द पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट, ओस्लो के निदेशक हेनरिक उरदल ने संभावित शांति पुरस्कार विजेताओं की अपनी वार्षिक संक्षिप्त सूची भी जारी की। उनकी सूची में हर्ष मंदर और 2017 में उनके द्वारा शुरू किया गया अभियान 'कारवां-ए-मोहब्बत' शामिल है। उरदल ने भी सिन्हा और जुबैर को भारत में ‘धार्मिक उन्माद और असहिष्णुता का मुकाबले को लेकर इस पुरस्कार के लिए अन्य योग्य उम्मीदवारों’ के तौर पर नामित किया है। उरदल की सूची के अनुसार, हर्ष मंदर इस तरह का पुरस्कार पाने के योग्य हैं, क्योंकि उन्होंने 2017 में कारवां-ए-मोहब्बत शुरू किया था।

केरल में हो सकती है वैश्विक शांति वार्ता
इस बीच नोबेल के शांति केंद्र ने कहा है कि वह केरल सरकार के उस प्रस्ताव पर विचार करेगा, जिसमें वैश्विक शांति वार्ता को तिरुवनंतपुरम में कराने का आग्रह किया गया है। केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन से बातचीत के बाद नोबेल शांति केंद्र के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने यह बात कही। गौरतलब है कि विजयन इस वक्त यूरोप दौरे पर हैं और कई नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। 
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