{"_id":"6a4d9978dcb95e1fc808ba9a","slug":"ancient-ocean-oxygen-loss-preceded-wildfires-370-million-year-old-extinction-study-2026-07-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"महासागरों में घुटा ऑक्सीजन का दम: फिर भड़की जंगल की आग, 37 करोड़ वर्ष पुराने रहस्य ने बदली विलुप्ति की कहानी","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
महासागरों में घुटा ऑक्सीजन का दम: फिर भड़की जंगल की आग, 37 करोड़ वर्ष पुराने रहस्य ने बदली विलुप्ति की कहानी
Wed, 08 Jul 2026 05:57 AM IST
Devesh Tripathi
अमर उजाला नेटवर्क, वॉशिंगटन।
अमर उजाला नेटवर्क, वॉशिंगटन।
Published by: Devesh Tripathi
Updated Wed, 08 Jul 2026 05:57 AM IST
सार
नए वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, लगभग 37 करोड़ वर्ष पहले हुई बड़ी जैविक विलुप्ति के दौरान समुद्रों में ऑक्सीजन की कमी जंगलों में व्यापक आग लगने से पहले शुरू हो गई थी। यह निष्कर्ष उस पुराने वैज्ञानिक दृष्टिकोण को चुनौती देता है, जिसमें वनाग्नि को इस संकट की शुरुआती वजह माना जाता था। शोधकर्ताओं ने प्राचीन चट्टानों के रासायनिक और जैविक विश्लेषण के आधार पर घटनाओं का क्रम स्पष्ट किया।
विज्ञापन
जंगलों में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
करीब 37 करोड़ वर्ष पहले पृथ्वी पर हुई सबसे बड़ी जैविक त्रासदियों में से एक की कहानी अब नए सिरे से लिखी जा रही है। अमेरिका के अलाबामा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के ताजा अध्ययन से पता चला है कि उस दौर में समुद्रों में ऑक्सीजन की कमी पहले शुरू हुई थी, जबकि जंगलों में भीषण आग बाद में बढ़ी।
यह निष्कर्ष उस लंबे समय से चली आ रही वैज्ञानिक धारणा को चुनौती देता है, जिसमें माना जाता था कि बड़े पैमाने पर लगी वनाग्नियों ने समुद्री जीवन के विनाश की शुरुआत की थी। अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका साइंस एडवांसेज में प्रकाशित हुआ है। यह शोध पृथ्वी के लेट डेवोनियन काल से जुड़ा है, जो लगभग 37 करोड़ वर्ष पहले का समय माना जाता है।
शोध का सबसे अहम संदेश यह है कि पृथ्वी की अलग-अलग प्रणालियां स्वतंत्र नहीं हैं। महासागर, वातावरण व भूमि लगातार एक-दूसरे को प्रभावित करते रहते हैं। किसी एक हिस्से में शुरू हुआ बदलाव दूसरे हिस्सों में भी गहरे प्रभाव छोड़ सकता है।
विज्ञापन
आज के जलवायु संकट के लिए भी अहम संकेत
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह अध्ययन केवल प्राचीन पृथ्वी के इतिहास तक सीमित नहीं है। वर्तमान समय में भी जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्रों में ऑक्सीजन की कमी और दुनिया के अनेक हिस्सों में भीषण वनाग्नियों की घटनाएं बढ़ रही हैं। यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि पृथ्वी की प्रणालियों में होने वाले बदलाव अक्सर एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य की पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने व उनसे निपटने के लिए पृथ्वी को अलग-अलग हिस्सों में नहीं, बल्कि एक परस्पर जुड़े हुए तंत्र के रूप में देखने की जरूरत होगी।
टेनेसी की चट्टानों ने खोले राज
शोधकर्ताओं ने अमेरिका के टेनेसी राज्य की प्राचीन शेल चट्टानों का सूक्ष्म रासायनिक और जैविक विश्लेषण किया। इन चट्टानों में करोड़ों वर्ष पुराने पर्यावरणीय बदलावों के संकेत सुरक्षित हैं। वैज्ञानिकों ने इनमें मौजूद आणविक निशानों का उच्च-रिजॉल्यूशन अध्ययन किया, जिससे घटनाओं का क्रम पहले की तुलना में ज्यादा स्पष्टता से सामने आया। विश्लेषण में पहले समुद्रों में ऑक्सीजन की कमी के संकेत मिले, जबकि जंगलों में आग से जुड़े प्रमाण बाद की परतों में दिखाई दिए।
विज्ञापन
यह निष्कर्ष उस लंबे समय से चली आ रही वैज्ञानिक धारणा को चुनौती देता है, जिसमें माना जाता था कि बड़े पैमाने पर लगी वनाग्नियों ने समुद्री जीवन के विनाश की शुरुआत की थी। अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका साइंस एडवांसेज में प्रकाशित हुआ है। यह शोध पृथ्वी के लेट डेवोनियन काल से जुड़ा है, जो लगभग 37 करोड़ वर्ष पहले का समय माना जाता है।
विज्ञापन
शोध का सबसे अहम संदेश यह है कि पृथ्वी की अलग-अलग प्रणालियां स्वतंत्र नहीं हैं। महासागर, वातावरण व भूमि लगातार एक-दूसरे को प्रभावित करते रहते हैं। किसी एक हिस्से में शुरू हुआ बदलाव दूसरे हिस्सों में भी गहरे प्रभाव छोड़ सकता है।
विज्ञापन
आज के जलवायु संकट के लिए भी अहम संकेत
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह अध्ययन केवल प्राचीन पृथ्वी के इतिहास तक सीमित नहीं है। वर्तमान समय में भी जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्रों में ऑक्सीजन की कमी और दुनिया के अनेक हिस्सों में भीषण वनाग्नियों की घटनाएं बढ़ रही हैं। यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि पृथ्वी की प्रणालियों में होने वाले बदलाव अक्सर एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य की पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने व उनसे निपटने के लिए पृथ्वी को अलग-अलग हिस्सों में नहीं, बल्कि एक परस्पर जुड़े हुए तंत्र के रूप में देखने की जरूरत होगी।
टेनेसी की चट्टानों ने खोले राज
शोधकर्ताओं ने अमेरिका के टेनेसी राज्य की प्राचीन शेल चट्टानों का सूक्ष्म रासायनिक और जैविक विश्लेषण किया। इन चट्टानों में करोड़ों वर्ष पुराने पर्यावरणीय बदलावों के संकेत सुरक्षित हैं। वैज्ञानिकों ने इनमें मौजूद आणविक निशानों का उच्च-रिजॉल्यूशन अध्ययन किया, जिससे घटनाओं का क्रम पहले की तुलना में ज्यादा स्पष्टता से सामने आया। विश्लेषण में पहले समुद्रों में ऑक्सीजन की कमी के संकेत मिले, जबकि जंगलों में आग से जुड़े प्रमाण बाद की परतों में दिखाई दिए।