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Bangladesh: मंगल शोभायात्रा पर रोक की मांग, बोले- धार्मिक भावनाओं को पहुंचेगी ठेस; सांप्रदायिक तनाव बढ़ा

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: Shivam Garg Updated Mon, 06 Apr 2026 02:30 PM IST
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सार

बांग्लादेश में पहेला बैशाख उत्सव की प्रमुख शोभायात्रा ‘मंगल शोभायात्रा’ को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए खतरा बताया है।

Bangladesh: Petition Seeks Ban on UNESCO-Recognized Baishakh Mangal Shobhajatra Procession
बैशाख मंगल शोभायात्रा - फोटो : एएनआई/रॉयटर्स
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विस्तार

बांग्लादेश के पहेला बैशाख (बंगाली नववर्ष) उत्सव की प्रसिद्ध और यूनेस्को मान्यता प्राप्त परंपरा 'मंगल शोभायात्रा' इस साल विवादों में घिर गई है। बांग्लादेश मीडिया (बीडी न्यूज 24) के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के वकील महमूदुल हसन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस शोभायात्रा पर स्थायी प्रतिबंध की मांग की है। उन्होंने इसे धार्मिक विश्वासों के खिलाफ और आर्टिफिशियल परंपरा करार देते हुए कहा कि यह आम धार्मिक भावनाओं को आहत करती है और सांप्रदायिक सौहार्द, सार्वजनिक सुरक्षा तथा राष्ट्रीय स्थिरता के लिए खतरा है।

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याचिका में संस्कृति, धर्म और गृह मंत्रालय के सचिव, ढाका विश्वविद्यालय के उपकुलपति, ढाका के डिप्टी कमिश्नर और फाइन आर्ट्स फैकल्टी के डीन को प्रतिवादी बनाया गया है।
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महामुदुल हसन का कहना है कि यह शोभायात्रा प्राचीन बंगाली परंपरा नहीं बल्कि 1989 में ‘आनंद शोभायात्रा के नाम से शुरू की गई आधुनिक रचना है। उन्होंने बताया कि पक्षियों, मछलियों और जानवरों के विशाल पुतले लेकर खुशहाली की कामना करना इस्लामी विश्वासों के अनुसार सही नहीं है, क्योंकि मुसलमान केवल अल्लाह से ही आशीर्वाद मांगते हैं। बांग्लादेश में पहले जब शेख हसीना की सरकार नहीं थी, तब अस्थायी प्रशासन ने ‘मंगल’ शब्द को शोभायात्रा के नाम से हटा दिया था। इसी कड़ी में इस साल के 1433वें बंगाली नववर्ष के लिए ढाका विश्वविद्यालय ने मार्च 30 को घोषणा की कि कार्यक्रम ‘आनंद शोभायात्रा’ के नाम से आयोजित होगा।

हालांकि यह शोभायात्रा 2016 में यूनेस्को की मान्यता प्राप्त कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हो चुकी है। नाम बदलने की खबर से सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हो गया, और संस्कृति मंत्री निताई रॉय चौधरी ने स्पष्ट किया कि अस्थायी प्रशासन के दौरान नाम बदलने की आवश्यकता नहीं थी और इस वर्ष का आधिकारिक नाम ‘बैशाखी शोभायात्रा’ रखा गया। याचिकाकर्ता अब अदालत से आदेश मांग रहे हैं कि प्रशासन किसी भी रूप में इस शोभायात्रा को आयोजित, अनुमोदित या प्रचारित न करे।

बांग्लादेश के पीएम तारिक और भारतीय उच्चायुक्त के बीच चर्चा
वहीं, भारत के बांग्लादेश उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने सोमवार को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों नेताओं ने नई दिल्ली और ढाका के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर विचार-विमर्श किया। बैठक में विशेष रूप से लोगों पर केंद्रित सहयोग और दोनों देशों की राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई।
 

भारतीय उच्चायुक्त ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में साझा किया, 'उच्चायुक्त ने बांग्लादेश सरकार और उसके नागरिकों के साथ सकारात्मक, रचनात्मक और भविष्य उन्मुख दृष्टिकोण अपनाते हुए सहयोग बढ़ाने की भारत की इच्छा व्यक्त की, जो आपसी हित और लाभ पर आधारित हो।'

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