Britain: बड़े बे-आबरू होकर सियासत से बोरिस जॉनसन निकले, पार्टी ने सांसद पद छोड़ने के लिए किया मजबूर
ब्रिटिश संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमंस की विशेषाधिकार समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि पार्टीगेट मामले में तत्कालीन प्रधानमंत्री जॉनसन ने झूठ बोला था। आरोप लगा था कि जिस समय जॉनसन की सरकार ने सारे देश पर सख्त लॉकडाउन लागू कर रखा था, तभी प्रधानमंत्री के निवास में पार्टियों का आयोजन कर जश्न मनाया गया...
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चार साल पहले ब्रिटेन की सियासत में उल्का की चमके बोरिस जॉनसन के राजनीतिक करियर पर अब विराम लग गया है। जॉनसन का जिस तेजी से उदय हुआ था, उनका पतन भी उसी रफ्तार से हुआ है। अब उनकी कंजरवेटिव पार्टी ने ही उन्हें सांसद पद छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया है।
ब्रिटिश संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमंस की विशेषाधिकार समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि पार्टीगेट मामले में तत्कालीन प्रधानमंत्री जॉनसन ने झूठ बोला था। पार्टीगेट कोरोना लॉकडाउन के दौरान हुआ कांड था। आरोप लगा था कि जिस समय जॉनसन की सरकार ने सारे देश पर सख्त लॉकडाउन लागू कर रखा था, तभी प्रधानमंत्री के निवास में पार्टियों का आयोजन कर जश्न मनाया गया।
जॉनसन ने शुक्रवार रात कहा- ‘संसद से फिलहाल जाना बहुत दुखद है।’ जॉनसन ने अपने बयान में फिलहाल शब्द का इस्तेमाल किया, जिसको लेकर विश्लेषकों ने कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री ने अपनी सियासी वापसी की उम्मीद अभी नहीं छोड़ी है। लेकिन कंजरवेटिव पार्टी के सूत्रों ने कहा कि जॉनसन ने अपने आचरण से ना सिर्फ अपनी प्रतिष्ठा, बल्कि कंजरवेटिव पार्टी की पहचान को भी नुकसान पहुंचाया। इसलिए पार्टी में उनके लिए कोई जगह नहीं रह गई है।
जॉनसन को अपनी सरकार में बगावत के कारण जुलाई 2022 में प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था। तब से वे कहते रहे हैं कि उन्होंने कोई गलती नहीं की। बल्कि उनका दावा है कि उनके साथ गलत व्यवहार हुआ है। उन्होंने कहा है- जिस तरह मुझे बाहर निकाला गया है, उससे मैं दुखी और आश्चर्यचकित हूं।
विश्लेषकों ने कहा है कि पार्टीगेट मामले में घिरने के बावजूद यह किसी को अंदाजा नहीं था कि जॉनसन के राजनीतिक करियर पर इतनी जल्दी परदा गिर जाएगा। जॉनसन के करीबी व्यक्तियों ने मीडियाकर्मियों को बताया है कि पूर्व प्रधानमंत्री को इस बात का भरोसा रहा है कि भले पार्टी साथ छोड़ दे, लेकिन उनके लिए जन समर्थन बना रहेगा। उनकी उम्मीदें अपनी लोकप्रियता पर ही टिकी रही हैं। पिछले महीने जारी हुए एक जनमत सर्वेक्षण में बताया गया था कि कंजरवेटिव पार्टी के समर्थकों में 64 फीसदी लोग अभी भी जॉनसन के बारे में सकारात्मक राय रखते हैं।
ब्रेग्जिट मुद्दे पर उग्र रुख अपना कर जॉनसन ने देश में तीखा ध्रुवीकरण किया था। उससे ही उनका सितारा चमका और 2019 के मध्य में वे प्रधानमंत्री बन गए। तब उन्होंने उसी वर्ष दिसंबर में मध्यावधि चुनाव करवाया, जिसमें उन्होंने कंजरवेटिव पार्टी को हाल के समय की सबसे बड़ी जीत दिलवाई। लेकिन पार्टीगेट के खुलासे के बाद कंजरवेटिव पार्टी के भीतर उनके लिए चुनौतियां बढ़ने लगीं।
जॉनसन पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल को अपना आदर्श बताते हैं। प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद से वे बार-बार इस बात की चर्चा करते रहे हैं कि 1945 में चुनाव हारने के बाद चर्चिल ने 1951 में जोरदार वापसी की थी। लेकिन कंजरवेटिव पार्टी के सांसदों और अन्य कार्यकर्ताओं ने आम चर्चाओं में इस तुलना को निराधार बताया है। उनमें से ज्यादातर को नहीं लगता कि चर्चिल का करिश्मा जॉनसन दोहरा पाएंगे।