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Pakistan: पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच युद्धविराम वार्ता बेनतीजा, चीन की कोशिश हुई बेकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Nitin Gautam Updated Thu, 09 Apr 2026 05:53 AM IST
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सार

पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच संघर्ष विराम के लिए चीन में जारी शांतिवार्ता बेनतीजा रही है। तालिबान के सवालों से पाकिस्तानी विदेश मंत्री डार परेशान हो गए। अफगानिस्तान के प्रतिनिधियों ने पाकिस्तानी प्रतिनिधियों से पूछा कि आतंक की परिभाषा बताएं।

Ceasefire Talks Between Pakistan and Afghanistan End Without Result in  China
अफगानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर जारी जंगी हालात पर चीन में हुई वार्ता के दौरान पाकिस्तानी हुक्मरान स्थायी युद्धविराम तक नहीं पहुंच पाए हैं। डॉन अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, यह वार्ता बिना ठोस नतीजे के खत्म हो गई। डॉन ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस बैठक में अफगानिस्तान ने लगातार पाकिस्तान पर तालिबान के मुद्दे को लेकर आंखें दिखाईं और तालिबान के कुछ सवालों ने पाकिस्तानी अफसरों की परेशानी बढ़ा दी। दोनों पक्षों में समझौता नहीं हो पाया।
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बीबीसी पश्तो ने भी कहा है कि चीन में हुई बैठक में तालिबान ने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए आतंकवाद की परिभाषा स्पष्ट करने के लिए कहा। इसके अलावा तालिबान ने डूरंड लाइन (सीमा रेखा) को मान्यता नहीं देने की बात भी कही। तालिबान ने यह भी कहा कि अस्थाई युद्धविराम के बावजूद पाकिस्तानी सेना उसके क्षेत्र में हमले कर रही है। यद्यपि अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने कहा कि वार्ता उपयोगी रही लेकिन इसमें कोई सफलता किसी के हाथ नहीं लगी है। एजेंसी
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मुत्ताकी का सख्त रवैया
चीन के अफसरों के सामने ही अफगानिस्तान के प्रतिनिधि अमीर खान मुत्ताकी ने सख्त रवैया अपनाया और पाकिस्तान को इस छह दिनी बैठक में दोटूक कह दिया कि हमारी कोशिश जंग को खत्म करने की रहेगी, लेकिन यह सब पाकिस्तान पर निर्भर करेगा।

समझौते में छह देश शामिल 
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच समझौता कराने में पाकिस्तान समेत छह देश शामिल हैं। इनमें चीन, तुर्किये, पाकिस्तान, यूएई, सऊदी अरब और कतर शामिल हैं। चीन इस शांति वार्ता का नेतृत्वकर्ता है। पाकिस्तान का कहना है कि जब तक टीटीपी को अफगानिस्तान से खत्म नहीं किया जाएगा, तब तक बात नहीं बन सकती है। दूसरी तरफ अफगानिस्तान ने टीटीपी को पाकिस्तान की समस्या बताया है।

टीटीपी को लेकर दोनों पक्षों में हुई भिड़ंत
रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में पाकिस्तान ने टीटीपी को लेकर अफगानिस्तान पर हमला किया। पाकिस्तान का कहना था कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) नामक आतंकी गुट को काबुल में पनाह दी जाती रही है। इसे तालिबान ने सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि आतंकवाद पाकिस्तान की घरेलू समस्या है। उसने पूछा, पहले यह बताए कि आतंक की परिभाषा क्या है? इसके बाद डूरंड लाइन पर पाकिस्तान को अफगानिस्तान ने खरी-खोटी सुनाई।

बीच-बचाव के प्रयास
छह दिन तक चली इस समझौता वार्ता में दोनो ही पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप किए। हालांकि तुर्किये ने कई बार बीच-बचाव कर दोनों को समझाने का प्रयास किया लेकिन दोनों ही देश   के प्रतिनिधि अपनी बात पर अड़े रहे। यूएई और कतर ने सलाह दी कि संघर्ष के बजाय दोनों देश तनाव कम करने वाले मुद्दों पर ध्यान दें। सऊदी अरब  ने भी मौजूदा हालात में शांति से काम लेने का सुझाव दिया।


 
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