{"_id":"6a14e1f3d673229f4a0aff97","slug":"cement-companies-can-increase-construction-building-material-thermal-coal-cost-2026-05-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"घर बनवाना होगा और भी महंगा?: पेट्रोल-डीजल के बाद अब सीमेंट के बढ़ सकते हैं दाम, लगातार तीसरी बार बढ़ी कीमत","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
घर बनवाना होगा और भी महंगा?: पेट्रोल-डीजल के बाद अब सीमेंट के बढ़ सकते हैं दाम, लगातार तीसरी बार बढ़ी कीमत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Tue, 26 May 2026 05:27 AM IST
विज्ञापन
सार
देश में सीमेंट की कीमतें फिर बढ़ सकती हैं। कंपनियां जल्द ही पांच से सात रुपये प्रति बोरी तक दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं। कच्चे तेल, कोयले, पेट कोक, पेट्रोल-डीजल और पैकेजिंग लागत बढ़ने से कंपनियों की लागत प्रति टन 80 रुपये तक बढ़ गई है। अप्रैल और मई में भी सीमेंट महंगा हो चुका है। मानसून के कारण मांग घटने की आशंका से कंपनियों पर मुनाफा बचाने का दबाव बढ़ गया है।
सीमेंट कंपनियां बढ़ा सकती हैं दाम
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
देश में घर बनाने का सपना देख रहे लोगों को अब बड़ा झटका लग सकता है। पेट्रोल-डीजल, कच्चे तेल और कोयले की बढ़ती कीमतों के बीच अब सीमेंट भी महंगा होने की तैयारी में है। सीमेंट कंपनियां जल्द ही सीमेंट की कीमतों में पांच से सात रुपये प्रति बोरी तक बढ़ोतरी कर सकती हैं। इससे मकान, दुकान, फ्लैट और सड़क जैसे निर्माण कार्यों की लागत और बढ़ जाएगी। पहले ही अप्रैल और मई में सीमेंट के दाम बढ़ चुके हैं। अब कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण कीमतें बढ़ाना मजबूरी बन गया है। ऐसे में आम आदमी से लेकर बिल्डर्स तक पर इसका सीधा असर पड़ने वाला है।
आखिर सीमेंट कंपनियां दाम क्यों बढ़ाना चाहती हैं?
सीमेंट कंपनियों पर इस समय ईंधन और पैकेजिंग खर्च का भारी दबाव है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान-अमेरिका विवाद के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट कोक और थर्मल कोयले की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। यही चीजें सीमेंट बनाने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती हैं। युद्ध और तनाव के बाद आयातित पेट कोक की कीमत करीब 15 फीसदी बढ़कर 146 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है। वहीं थर्मल कोयले के दाम 16 फीसदी बढ़कर 115 डॉलर प्रति टन हो गए हैं।
भारत में भी बीते 10 दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सात रुपये प्रति लीटर से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। इससे ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ गया है। इसके अलावा सीमेंट की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले बैग और अन्य सामग्री की लागत भी बढ़ी है। कंपनियों का कहना है कि इन सभी कारणों से सीमेंट बनाने की लागत प्रति टन करीब 80 रुपये तक बढ़ गई है। यही वजह है कि कंपनियां अब प्रति बोरी पांच से सात रुपये तक कीमत बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं।
विज्ञापन
पिछले कुछ महीनों में कितनी बढ़ चुकी हैं कीमतें?
सीमेंट के दामों में यह पहली बढ़ोतरी नहीं होगी। अप्रैल 2026 में देशभर में सीमेंट की कीमतों में करीब 10 रुपये प्रति बोरी की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद मई की शुरुआत में भी कंपनियों ने पांच रुपये प्रति बोरी तक कीमत बढ़ाने का फैसला लिया था। अब नई बढ़ोतरी लागू होती है तो कुछ ही महीनों में सीमेंट करीब 20 रुपये प्रति बोरी तक महंगा हो जाएगा।
इस लगातार बढ़ोतरी का असर सीधे निर्माण क्षेत्र पर दिखाई देगा। छोटे मकान बनाने वाले परिवारों का बजट बिगड़ सकता है। बिल्डर्स की परियोजनाओं की लागत बढ़ेगी। सरकारी निर्माण योजनाओं पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईंधन की कीमतों में राहत नहीं मिली तो आगे भी निर्माण सामग्री महंगी बनी रह सकती है।
क्या मानसून कंपनियों के लिए नई परेशानी बनेगा?
सीमेंट कंपनियों के सामने सिर्फ लागत बढ़ने की चुनौती नहीं है, बल्कि आने वाले मानसून को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। जून से देश में बारिश का मौसम शुरू हो जाएगा। आमतौर पर मानसून के दौरान निर्माण कार्य धीमे पड़ जाते हैं। बारिश के कारण मकान, सड़क और बड़ी परियोजनाओं का काम कम हो जाता है। इसका सीधा असर सीमेंट की मांग पर पड़ता है।
अगर मांग कमजोर हुई तो कंपनियों के लिए लगातार ऊंची कीमतें बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। कंपनियां ज्यादा समय तक उपभोक्ताओं पर बोझ नहीं डाल पाएंगी। इससे उनके मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। यानी एक तरफ लागत बढ़ रही है और दूसरी तरफ मांग कमजोर पड़ने का खतरा है। यही वजह है कि कंपनियां फिलहाल संतुलन बनाने की कोशिश में जुटी हैं।
क्या अभी भी कंपनियों को मुनाफा हो रहा है?
बढ़ती लागत और मांग की चिंता के बावजूद सीमेंट कंपनियों के लिए एक राहत की बात भी है। मौजूदा समय में कंपनियों का प्रति टन ग्रॉस मार्जिन 2,649 रुपये के आसपास बना हुआ है। इसका मतलब है कि लागत निकालने के बाद कंपनियों को अभी भी अच्छा मुनाफा मिल रहा है। यह बीते दो साल के औसत मुनाफे से थोड़ा बेहतर माना जा रहा है।
हालांकि कंपनियां मान रही हैं कि अगर ईंधन और पैकेजिंग लागत इसी तरह बढ़ती रही तो आने वाले महीनों में स्थिति मुश्किल हो सकती है। ऐसे में कीमतें बढ़ाने का फैसला कंपनियों के लिए जरूरी बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में सीमेंट बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के हालात और मानसून के असर पर निर्भर करेगी।
आखिर सीमेंट कंपनियां दाम क्यों बढ़ाना चाहती हैं?
सीमेंट कंपनियों पर इस समय ईंधन और पैकेजिंग खर्च का भारी दबाव है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान-अमेरिका विवाद के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट कोक और थर्मल कोयले की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। यही चीजें सीमेंट बनाने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती हैं। युद्ध और तनाव के बाद आयातित पेट कोक की कीमत करीब 15 फीसदी बढ़कर 146 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है। वहीं थर्मल कोयले के दाम 16 फीसदी बढ़कर 115 डॉलर प्रति टन हो गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
भारत में भी बीते 10 दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सात रुपये प्रति लीटर से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। इससे ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ गया है। इसके अलावा सीमेंट की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले बैग और अन्य सामग्री की लागत भी बढ़ी है। कंपनियों का कहना है कि इन सभी कारणों से सीमेंट बनाने की लागत प्रति टन करीब 80 रुपये तक बढ़ गई है। यही वजह है कि कंपनियां अब प्रति बोरी पांच से सात रुपये तक कीमत बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं।
Trending Videos
पिछले कुछ महीनों में कितनी बढ़ चुकी हैं कीमतें?
सीमेंट के दामों में यह पहली बढ़ोतरी नहीं होगी। अप्रैल 2026 में देशभर में सीमेंट की कीमतों में करीब 10 रुपये प्रति बोरी की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद मई की शुरुआत में भी कंपनियों ने पांच रुपये प्रति बोरी तक कीमत बढ़ाने का फैसला लिया था। अब नई बढ़ोतरी लागू होती है तो कुछ ही महीनों में सीमेंट करीब 20 रुपये प्रति बोरी तक महंगा हो जाएगा।
इस लगातार बढ़ोतरी का असर सीधे निर्माण क्षेत्र पर दिखाई देगा। छोटे मकान बनाने वाले परिवारों का बजट बिगड़ सकता है। बिल्डर्स की परियोजनाओं की लागत बढ़ेगी। सरकारी निर्माण योजनाओं पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईंधन की कीमतों में राहत नहीं मिली तो आगे भी निर्माण सामग्री महंगी बनी रह सकती है।
क्या मानसून कंपनियों के लिए नई परेशानी बनेगा?
सीमेंट कंपनियों के सामने सिर्फ लागत बढ़ने की चुनौती नहीं है, बल्कि आने वाले मानसून को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। जून से देश में बारिश का मौसम शुरू हो जाएगा। आमतौर पर मानसून के दौरान निर्माण कार्य धीमे पड़ जाते हैं। बारिश के कारण मकान, सड़क और बड़ी परियोजनाओं का काम कम हो जाता है। इसका सीधा असर सीमेंट की मांग पर पड़ता है।
अगर मांग कमजोर हुई तो कंपनियों के लिए लगातार ऊंची कीमतें बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। कंपनियां ज्यादा समय तक उपभोक्ताओं पर बोझ नहीं डाल पाएंगी। इससे उनके मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। यानी एक तरफ लागत बढ़ रही है और दूसरी तरफ मांग कमजोर पड़ने का खतरा है। यही वजह है कि कंपनियां फिलहाल संतुलन बनाने की कोशिश में जुटी हैं।
क्या अभी भी कंपनियों को मुनाफा हो रहा है?
बढ़ती लागत और मांग की चिंता के बावजूद सीमेंट कंपनियों के लिए एक राहत की बात भी है। मौजूदा समय में कंपनियों का प्रति टन ग्रॉस मार्जिन 2,649 रुपये के आसपास बना हुआ है। इसका मतलब है कि लागत निकालने के बाद कंपनियों को अभी भी अच्छा मुनाफा मिल रहा है। यह बीते दो साल के औसत मुनाफे से थोड़ा बेहतर माना जा रहा है।
हालांकि कंपनियां मान रही हैं कि अगर ईंधन और पैकेजिंग लागत इसी तरह बढ़ती रही तो आने वाले महीनों में स्थिति मुश्किल हो सकती है। ऐसे में कीमतें बढ़ाने का फैसला कंपनियों के लिए जरूरी बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में सीमेंट बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के हालात और मानसून के असर पर निर्भर करेगी।