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'हम प्रतिद्वंदी नहीं साझेदार': भारत से संबंधों पर बदले चीन के सुर, वांग यी बोले- टकराव से एशिया का नुकसान

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Shivam Garg Updated Sun, 08 Mar 2026 12:52 PM IST
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सार

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने दोनों देशों से सीमा शांति, सहयोग और BRICS में संयुक्त भूमिका बढ़ाने की अपील की।

Chinese Foreign Minister Wang Yi Says India and China Should See Each Other as Partners, Not Rivals
भारत-चीन के रिश्तों में सुधार की कवायद! - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने रविवार को कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे को खतरे की बजाय अवसर के रूप में समझने की जरूरत है।
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चीनी संसद नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) के सत्र के दौरान आयोजित वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वांग यी ने कहा कि दोनों देशों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा तय किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार संबंधों को आगे बढ़ाना चाहिए। चीनी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि दोनों देशों को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आयोजन में एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए। इस वर्ष भारत BRICS की मेजबानी करेगा, जबकि 2027 में चीन इस सम्मेलन की मेजबानी करेगा।
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दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत
वांग यी ने बताया कि पिछले साल तियानजिन में मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात सकारात्मक रही थी। उन्होंने कहा कि 2024 में रूस के कजान में हुई बैठक से दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत हुई, जिसके बाद तियानजिन में हुई बातचीत ने संबंधों को और बेहतर बनाने में मदद की। उन्होंने कहा कि हाल के समय में दोनों देशों के बीच राजनयिक संवाद, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क में तेजी आई है। द्विपक्षीय व्यापार ने नया रिकॉर्ड बनाया है और इससे दोनों देशों के लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है।



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भारत और चीन ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण देश
भविष्य की दिशा पर बोलते हुए वांग यी ने कहा कि भारत और चीन को पड़ोसी देशों के रूप में मित्रता बनाए रखनी चाहिए और सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही दोनों देशों को विकास और सहयोग पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत और चीन ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण देश हैं और दोनों के बीच गहरे ऐतिहासिक व सांस्कृतिक संबंध हैं। वांग के अनुसार, आपसी विश्वास और सहयोग से दोनों देशों के विकास को गति मिल सकती है, जबकि टकराव और विभाजन एशिया के विकास के लिए नुकसानदायक होगा।

गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में सैन्य तनाव के कारण भारत-चीन संबंध लगभग पांच वर्षों तक ठंडे पड़े रहे। हालांकि 2024 में कजान में प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद संबंधों को सामान्य करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद दोनों देशों ने वीजा और उड़ान सेवाओं को फिर से शुरू करने सहित कई कदम उठाए, जिससे संबंधों में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला।

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