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एक महीने के उच्च स्तर पर कच्चा तेल: US ने ईरान पर नाकेबंदी को आगे बढ़ाने के दिए निर्देश, आपूर्ति की बढ़ी चिंता
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 30 Apr 2026 06:05 AM IST
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सार
होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधा की आशंका से कच्चे तेल की कीमतें 5 प्रतिशत से अधिक बढ़ गईं। इसका असर भारतीय रुपये पर पड़ा, जो डॉलर के मुकाबले गिरकर 94.88 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ।
कच्चा तेल आयात के बिल में आई कमी
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग के जरिये आपूर्ति में लंबे समय तक बाधा की चिंताओं से बुधवार को वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पांच फीसदी से अधिक बढ़कर एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गईं। कच्चे तेल में उछाल का असर भारतीय रुपये पर भी देखने को मिला और यह डॉलर के मुकाबले 20 पैसे टूटकर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 94.88 पर बंद हुआ।
दरअसल, वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगियों को ईरान पर नाकेबंदी को और आगे बढ़ाने की तैयारी करने का निर्देश दिया है। इससे पश्चिम एशिया के इस अहम तेल उत्पादक क्षेत्र से आपूर्ति में रुकावटें और लंबे समय तक बनी रहने की आशंका है।
इस रिपोर्ट के बाद वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमतें 6.08 डॉलर या 5.5 फीसदी बढ़कर 117.34 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गईं। यह 31 मार्च के बाद ब्रेंट क्रूड का एक महीने का उच्च स्तर है। यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 5.26 डॉलर या 5.3 फीसदी उछलकर 105.19 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। इसके साथ ही, तेल में आठ दिनों से तेजी का सिलसिला जारी है।
रुपये में बना रहेगा उतार-चढ़ाव
क्रूड की कीमतों में उछाल के साथ विदेशी निवेशकों की लगातार पूंजी निकासी से भी बुधवार को रुपये में गिरावट आई। फॉरेक्स कारोबारियों ने कहा, क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, जिससे भारत के आयात खर्च पर असर पड़ने की आशंका है। पश्चिम एशिया संकट और इसके व्यापक संघर्ष में बदलने की आशंकाओं ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। आने वाले समय में रुपये में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 94.79 पर खुला और कारोबार के दौरान 94.88 के निचले स्तर तक गया। इससे पहले रुपया 27 मार्च को 94.85 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था।
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दरअसल, वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगियों को ईरान पर नाकेबंदी को और आगे बढ़ाने की तैयारी करने का निर्देश दिया है। इससे पश्चिम एशिया के इस अहम तेल उत्पादक क्षेत्र से आपूर्ति में रुकावटें और लंबे समय तक बनी रहने की आशंका है।
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इस रिपोर्ट के बाद वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमतें 6.08 डॉलर या 5.5 फीसदी बढ़कर 117.34 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गईं। यह 31 मार्च के बाद ब्रेंट क्रूड का एक महीने का उच्च स्तर है। यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 5.26 डॉलर या 5.3 फीसदी उछलकर 105.19 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। इसके साथ ही, तेल में आठ दिनों से तेजी का सिलसिला जारी है।
रुपये में बना रहेगा उतार-चढ़ाव
क्रूड की कीमतों में उछाल के साथ विदेशी निवेशकों की लगातार पूंजी निकासी से भी बुधवार को रुपये में गिरावट आई। फॉरेक्स कारोबारियों ने कहा, क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, जिससे भारत के आयात खर्च पर असर पड़ने की आशंका है। पश्चिम एशिया संकट और इसके व्यापक संघर्ष में बदलने की आशंकाओं ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। आने वाले समय में रुपये में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 94.79 पर खुला और कारोबार के दौरान 94.88 के निचले स्तर तक गया। इससे पहले रुपया 27 मार्च को 94.85 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था।
