सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Did Bangladesh buckle under pressure Lord Ram statue project halted questions raised religious freedom.

दबाव में झुका बांग्लादेश?: भगवान राम की विशाल प्रतिमा परियोजना पर लगाई रोक, धार्मिक स्वतंत्रता पर उठे सवाल

आईएएनएस, ढाका Published by: Asmita Tripathi Updated Fri, 12 Jun 2026 12:48 PM IST
विज्ञापन
सार

बांग्लादेशमें भगवान राम की दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा के निर्माण पर रोक लगा दिया गया है। इस फैसले पर विवाद बढ़ गया है। लेखिका तस्लीमा नसरीन और अन्य लोगों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा बताते हुए आलोचना की है।

Did Bangladesh buckle under pressure Lord Ram statue project halted questions raised religious freedom.
भगवान राम की प्रतिमा निर्माण पर रोक - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार

बांग्लादेश के अधिकारियों ने भगवान राम की दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा के निर्माण को निलंबित करने का आदेश दिया है। यह प्रतिमा गाइबांधा जिले के पलाशबारी उपजिला में स्थित श्री श्री राधा गोविंदा और काली मंदिर में लगाई जा रही थी। यह जानकारी स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार है। 

बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, मंदिर के सलाहकार श्याममल कुमार महंत ने गुरुवार शाम मंदिर सभागार में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह घोषणा की। इस फैसले से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। आलोचकों का आरोप है कि परियोजना का विरोध करने वाले इस्लामी समूहों के दबाव में इसे निलंबित किया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन


'मूर्ति के निर्माण का इतना विरोध क्यों'
निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन ने राम मंदिर के निर्माण के इर्द-गिर्द हो रही धमकियों, उकसावे और शत्रुतापूर्ण बयानबाजी की कड़ी निंदा की। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस देश में कई लाख मस्जिदें मौजूद हैं और जिनका निर्माण जारी है। वहां एक अकेले हिंदू पूजा स्थल को क्यों निशाना बनाया जा रहा है।
विज्ञापन


नसरीन ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'बांग्लादेश में कई लाख मस्जिदें हैं और पूरे देश में नई मस्जिदें बनती जा रही हैं। तो फिर एक राम मंदिर या भगवान राम की मूर्ति के निर्माण का इतना विरोध क्यों हो रहा है? अगर धार्मिक स्वतंत्रता सचमुच सबके लिए है, तो यह अल्पसंख्यकों पर भी समान रूप से लागू होनी चाहिए, न कि केवल बहुसंख्यकों पर।'

लेखिका तस्लीमा नसरीन ने क्या कहा?
उन्होंने आगे कहा 'पालाशबारी, गाइबांधा में निर्माणाधीन राम मंदिर के खिलाफ मिल रही धमकियां, उकसावे और नफरत भरी बयानबाजी बेहद चिंताजनक है। किसी भी व्यक्ति या समूह को सिर्फ इसलिए किसी दूसरे समुदाय के पूजा स्थल को गिराने का अधिकार नहीं मिल जाता क्योंकि उन्हें वह पसंद नहीं है। कानून के शासन वाले राज्य में धार्मिक मतभेदों का समाधान हिंसा या बर्बरता से नहीं किया जा सकता।'

'अस्तित्व का संकट क्यों बताया जा रहा'
नसरीन ने इस बात पर जोर दिया कि पलाशबारी में हिंदू मंदिरों पर हमलों और मूर्तियों को तोड़ने के इतिहास को देखते हुए स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, जिससे हिंदी भाषी अल्पसंख्यक समुदाय असुरक्षित महसूस करता है। नसरीन ने सवाल उठाया 'दुनिया भर के कई मुस्लिम बहुल देशों में - जिनमें इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, मलेशिया और ओमान शामिल हैं। बड़े-बड़े हिंदू मंदिर हैं। इन देशों में मंदिरों का अस्तित्व राज्य के लिए खतरा नहीं माना जाता। तो फिर बांग्लादेश में एक मंदिर के निर्माण को कुछ मुसलमानों के अस्तित्व का संकट क्यों बताया जा रहा है?'

इसी बीच, बांग्लादेशी समाचार पत्र 'ब्लिट्ज' के संपादक सलाहुद्दीन शोएब चौधरी ने भी इस्लामी चरमपंथी समूहों के दबाव के बीच मंदिर निर्माण के रुकने पर गंभीर चिंता व्यक्त की। चौधरी ने एक्स पोस्ट में लिखा,' बांग्लादेश के गाइबांधा जिले में चल रहे सनातन परिसर के अधिकारियों ने स्थानीय जिहादी और इस्लामी समूहों के व्यापक विरोध के बीच सभी गतिविधियों को निलंबित करने और भगवान राम की मूर्ति का निर्माण रोकने की घोषणा की है।'


 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed