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'अपने देश वापस भी नहीं लौट पाओगे': होर्मुज पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल को ट्रंप की सीधी चेतावनी, रखी ये मांग

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: अमन तिवारी Updated Mon, 22 Jun 2026 08:01 AM IST
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सार

स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने तेहरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किया, तो उनका अस्तित्व मिटा देंगे। वहीं दुसरी तरफ स्विट्जरलैंड में चल रही वार्ता में ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में रविवार को एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसका मकसद पश्चिम एशिया में तनाव को कम करना था। इस बैठक में अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ शामिल हुए, वहीं ईरान का नेतृत्व विदेश मंत्री अब्बास अराघची और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने किया।


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?
बैठक के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देते हुए ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की कोशिश की, तो अमेरिका उसे पूरी तरह तबाह कर देगा। फॉक्स न्यूज के मुताबिक, उन्होंने यहां तक कह दिया कि ऐसी स्थिति में ईरानी प्रतिनिधिमंडल अपने देश वापस भी नहीं लौट पाएगा।
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फॉक्स न्यूज के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि अगर बातचीत नाकाम रहती है, तो अमेरिका इस समुद्री रास्ते पर अपना कब्जा कर सकता है। उन्होंने एक नया प्रस्ताव रखते हुए कहा कि वहां से गुजरने वाले तेल के जहाजों से उनकी कीमत का 20 प्रतिशत हिस्सा टैक्स (टोल) के रूप में वसूला जा सकता है। ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका ने इस इलाके की सुरक्षा और समुद्री रास्तों को बचाने पर अरबों डॉलर खर्च किए हैं, इसलिए उसे यह पैसा वापस मिलना चाहिए। उन्होंने अमेरिकी सेना को इस क्षेत्र का 'गार्जियन एंजल' के तौर पर पेश किया और कहा कि सुरक्षा के बदले भुगतान मिलना जरूरी है।
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बैठक में कौन हुआ शामिल?
यह तनावपूर्ण माहौल तब बना जब स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में दोनों देशों के बीच 'इस्लामाबाद समझौते' के तहत पहले दौर की बातचीत शुरू हुई। इस बैठक में अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ शामिल हुए। ईरान का नेतृत्व विदेश मंत्री अब्बास अराघची और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने किया। इस चार पक्षीय चर्चा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी भी मौजूद रहे।

एक तरफ ट्रंप कड़े तेवर दिखा रहे थे, तो दूसरी तरफ जेडी वेंस ने बातचीत को लेकर थोड़ी उम्मीद जताई। वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के लोगों के साथ रिश्तों का एक नया अध्याय शुरू करना चाहते हैं। उन्होंने लेबनान में युद्धविराम को लेकर कुछ प्रगति होने की बात भी कही, हालांकि उन्होंने माना कि यह प्रक्रिया काफी उलझी हुई है।

ये भी पढ़ें: Hormuz: ईरान कब तक बंद रखेगा होर्मुज? लेबनान-तेल बिक्री को लेकर छूट पर फंसा पेच; इस्राइल रुकने को नहीं तैयार

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर भी ईरान को घेरा। उन्होंने मांग की कि ईरान लेबनान में अपने समर्थित गुट हिजबुल्लाह को तुरंत रोके। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर हिजबुल्लाह ने इस्राइल पर हमले बंद नहीं किए, तो अमेरिका ईरान पर पिछले हफ्ते से भी ज्यादा भीषण हमला करेगा।

ईरान ने भी अपनाया कड़ा रुख
दूसरी ओर, ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरानी सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB से, ईरानी वार्ताकार मेहदी घोरबनजादेह ने कहा कि जब तक लेबनान के हालात नहीं सुधरते और ईरान को आर्थिक लाभ नहीं मिलता, तब तक परमाणु कार्यक्रम जैसे दूसरे मुद्दों पर कोई बात नहीं होगी। ईरान चाहता है कि अमेरिका प्रतिबंधों में ढील दे और उसकी रुकी हुई संपत्ति को वापस करे। ट्रंप की धमकियों से नाराज होकर ईरानी अधिकारियों ने फोटो खिंचवाने से मना कर दिया और बैठक बीच में ही छोड़कर बाहर निकल गए।
 
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