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Iran-US Talks: होर्मुज, लेबनान और परमाणु मुद्दा; पहले दौर की वार्ता में क्या-क्या तय हुआ? 10 पॉइंट में समझिए

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 22 Jun 2026 10:28 AM IST
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सार

स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता में 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते का रोडमैप तैयार किया गया। दोनों देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा, लेबनान में संघर्षविराम और तकनीकी स्तर की वार्ता जारी रखने पर सहमति जताई। कतर और पाकिस्तान द्वारा कराई जा रही मध्यस्थता में हुई इस बैठक में और क्या-क्या हुआ? आइए, विस्तार से 10 पॉइंट में समझते हैं...

us iran talks first round 10 key takeaways final deal in 60 days roadmap hormuz lebanon security truce
पहले दौर की बैठक में क्या-क्या हुआ? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में अमेरिका और ईरान के बीच दो दिनों तक चली उच्चस्तरीय वार्ता का पहला दौर समाप्त हो गया है। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुई इस बैठक में दोनों देशों ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप पर सहमति जताई है। यह वार्ता ऐसे समय हुई, जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।



इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत आयोजित इस बैठक में अमेरिका और ईरान के शीर्ष प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया, जबकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने किया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने भी वार्ता को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। लेक लूसर्न शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि वार्ता सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में संपन्न हुई।

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पहले दौर की वार्ता में क्या रहा हासिल?

  • दिन में अंतिम समझौते का रोडमैप तैयार

अमेरिका और ईरान ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप को मंजूरी दी। इससे आगे की बातचीत के लिए स्पष्ट समयसीमा तय हो गई है।

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  • उच्चस्तरीय समिति का गठन

वार्ता के दौरान एक हाई लेवल कमेटी बनाने का फैसला लिया गया। यह समिति एमओयू के प्रभावी क्रियान्वयन और पूरी वार्ता प्रक्रिया की निगरानी करेगी।

  • तकनीकी स्तर की बातचीत तुरंत शुरू होगी

दोनों पक्षों ने तय किया कि तकनीकी स्तर की बातचीत तुरंत शुरू की जाएगी। यह चर्चा पूरे सप्ताह बर्गेनस्टॉक में जारी रहेगी।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए सीधा संचार तंत्र

वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की गलतफहमी और टकराव को रोकने के लिए एक विशेष संचार चैनल बनाने पर सहमति बनी। इसका उद्देश्य व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।

  • तेल आपूर्ति को लेकर वैश्विक चिंता पर चर्चा

वार्ता के दौरान होर्मुज से तेल आपूर्ति प्रभावित होने और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर भी चर्चा हुई। हालिया अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ा है।

  • लेबनान में संघर्षविराम लागू रखने पर जोर

बैठक में लेबनान में सैन्य गतिविधियों को समाप्त करने से जुड़े एमओयू प्रावधानों के पालन पर भी चर्चा हुई। इसके लिए एक 'डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल' बनाने का फैसला किया गया।

  • कतर और पाकिस्तान की अहम भूमिका

कतर और पाकिस्तान ने मध्यस्थ के रूप में बातचीत को आगे बढ़ाया। दोनों देशों ने कहा कि वे वार्ता को रचनात्मक माहौल में जारी रखने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।

  • ट्रंप और पेजेशकियन ने किया था एमओयू पर हस्ताक्षर

पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस्लामाबाद एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस समझौते में गारंटर की भूमिका निभाई थी।

  • इस्राइल और हिजबुल्ला समझौते का हिस्सा नहीं

हालांकि लेबनान में संघर्षविराम लागू है, लेकिन इस्राइल और हिजबुल्ला अमेरिका-ईरान समझौते का हिस्सा नहीं हैं। इस्राइल ने कहा है कि उसकी सेना दक्षिणी लेबनान में तब तक रहेगी, जब तक सुरक्षा खतरे खत्म नहीं हो जाते।

  • शांतिपूर्ण समाधान पर बनी सहमति

सभी पक्षों ने कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। मध्यस्थ देशों ने उम्मीद जताई कि वार्ता के अगले दौर में और प्रगति होगी।

60 दिन में अंतिम समझौते का रोडमैप क्या?

वार्ता के दौरान एक उच्चस्तरीय समिति के गठन पर सहमति बनी, जो पूरी बातचीत की राजनीतिक निगरानी करेगी। इस समिति को 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। मुख्य वार्ताकार नियमित रूप से इस समिति को रिपोर्ट देंगे। परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध, निगरानी तंत्र और विवाद समाधान जैसे मुद्दों के लिए अलग-अलग कार्य समूह भी बनाए जाएंगे। इससे यह संकेत मिला है कि दोनों पक्ष अब तकनीकी स्तर पर ठोस बातचीत की दिशा में बढ़ रहे हैं।

क्या होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव कम करने की कोशिश हुई है?

वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। दोनों पक्षों ने एक सीधी संचार व्यवस्था स्थापित करने पर सहमति जताई है, ताकि बातचीत के दौरान किसी भी तरह की गलतफहमी या सैन्य टकराव से बचा जा सके। यह तंत्र दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा। अमेरिकी चेतावनियों और ईरान के कड़े रुख के बीच इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है।

क्या लेबनान में युद्ध रोकने की दिशा में भी प्रगति हुई है?

वार्ता में लेबनान को लेकर भी अहम प्रगति दर्ज की गई। सभी पक्षों ने लेबनान में सैन्य अभियानों को समाप्त कराने के लिए एक 'डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल' बनाने पर सहमति जताई। इस तंत्र में लेबनान गणराज्य भी शामिल होगा, जबकि कतर और पाकिस्तान सुविधा प्रदाता की भूमिका निभाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि लेबनान में युद्धविराम से जुड़े सभी प्रावधानों का पालन हो। इसके अलावा स्विट्जरलैंड में तकनीकी स्तर की वार्ता पूरे सप्ताह जारी रहेगी।
 

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