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उपलब्धि: हबल ने खोजी 99% डार्क मैटर से बनी घोस्ट गैलेक्सी, रहस्यमयी आकाशगंगाओं में से एक सीडीजी-2 का लगाया पता

अमर उजाला नेटवर्क Published by: लव गौर Updated Mon, 23 Feb 2026 04:36 AM IST
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सार

Ghost galaxy CDG-2: नासा के अनुसार आमतौर पर अधिकतर आकाशगंगाएं अरबों तारों की चमक से दूर-दूर तक दिखाई देती हैं, लेकिन कुछ विशेष आकाशगंगाएं इतनी फीकी होती हैं कि उन्हें पहचानना बेहद कठिन हो जाता है। इन्हें लो-सरफेस-ब्राइटनेस गैलेक्सी कहा जाता है। इनमें तारों की संख्या बहुत कम होती है।

Ghost galaxy CDG-2 made of dark matter detected using NASA's Hubble Space Telescope
हबल ने खोजी 99% डार्क मैटर से बनी घोस्ट गैलेक्सी - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार

नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप की मदद से खगोलविदों ने अब तक की सबसे रहस्यमयी आकाशगंगाओं में से एक  लगभग पूरी तरह डार्क मैटर से बनी घोस्ट गैलेक्सी सीडीजी-2 का पता लगाया है। पृथ्वी से करीब 300 मिलियन प्रकाश-वर्ष दूर पर्सियस गैलेक्सी क्लस्टर में स्थित यह बेहद धुंधली आकाशगंगा सामान्य तारों से नहीं, बल्कि चार सघन ग्लोब्युलर क्लस्टर्स के जरिए पहचानी गई। शुरुआती आकलन बताते हैं कि सीडीजी-2 की कुल द्रव्यमान का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा डार्क मैटर है। इस खोज का विवरण द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित हुआ है।
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नासा के अनुसार आमतौर पर अधिकतर आकाशगंगाएं अरबों तारों की चमक से दूर-दूर तक दिखाई देती हैं, लेकिन कुछ विशेष आकाशगंगाएं इतनी फीकी होती हैं कि उन्हें पहचानना बेहद कठिन हो जाता है। इन्हें लो-सरफेस-ब्राइटनेस गैलेक्सी कहा जाता है। इनमें तारों की संख्या बहुत कम होती है और इनका अधिकांश द्रव्यमान डार्क मैटर से बना होता है, ऐसा पदार्थ जो न प्रकाश उत्सर्जित करता है, न परावर्तित करता है और न ही अवशोषित करता है।
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सीडीजी-2 इसी दुर्लभ श्रेणी की एक आकाशगंगा है और इसे अब तक पहचानी गई सबसे अधिक डार्क-मैटर-प्रधान आकाशगंगाओं में गिना जा रहा है। कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के डेविड ली और उनकी टीम ने पारंपरिक तरीके छोड़कर उन्नत सांख्यिकीय विश्लेषण का सहारा लिया। उन्होंने कमजोर तारों की रोशनी खोजने के बजाय ग्लोब्युलर क्लस्टर्स के सघन समूह तलाशे।

ग्लोब्युलर क्लस्टर्स गोलाकार, अत्यंत घने तारामंडल होते हैं, जो आमतौर पर आकाशगंगाओं की परिक्रमा करते हैं। ये क्लस्टर्स संकेतक की तरह काम कर सकते हैं, जिससे यह अनुमान लगाया जा सके कि उनके आसपास कोई बेहद फीकी आकाशगंगा छिपी हो सकती है।इस पद्धति से टीम ने पहले से पुष्टि की जा चुकी 10 लो-सरफेस-ब्राइटनेस आकाशगंगाओं के साथ-साथ दो नए संभावित डार्क गैलेक्सी उम्मीदवारों की पहचान की।

60 लाख सूर्य जितनी चमक
प्रारंभिक माप बताते हैं कि सीडीजी-2 की कुल चमक लगभग 60 लाख सूर्य जैसे तारों के बराबर है जो किसी सामान्य आकाशगंगा की तुलना में बेहद कम है। हैरानी की बात यह है कि इन चार ग्लोब्युलर क्लस्टर्स से ही आकाशगंगा की कुल दृश्य रोशनी का करीब 16 प्रतिशत हिस्सा आता है। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि सीडीजी-2 के कुल द्रव्यमान  जिसमें दृश्य पदार्थ और डार्क मैटर दोनों शामिल हैं का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा डार्क मैटर से बना प्रतीत होता है।

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वैज्ञानिकों का मानना है कि पर्सियस जैसे घने गैलेक्सी क्लस्टर में अन्य आकाशगंगाओं के साथ हुए गुरुत्वाकर्षणीय संपर्कों के कारण सीडीजी-2 से वह हाइड्रोजन गैस छिन गई होगी, जो सामान्यतः तारों के निर्माण के लिए आवश्यक होती है। ग्लोब्युलर क्लस्टर्स अत्यंत सघन और गुरुत्वाकर्षण से मजबूती से बंधे होते हैं, इसलिए वे ऐसे ज्वारीय खिंचावों को बेहतर झेल पाते हैं यही वजह है कि वे सीडीजी-2 जैसी घोस्ट गैलेक्सी के भरोसेमंद संकेतक साबित हुए।

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