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Kim Jong Un: उत्तर कोरिया की राजनीति में अटकलों पर लगा विराम; बेटी नहीं, किम को ही मिली ये बड़ी जिम्मेदारी

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, प्योंगयांग Published by: हिमांशु चंदेल Updated Mon, 23 Feb 2026 09:12 AM IST
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सार

उत्तर कोरिया की वर्कर्स पार्टी कांग्रेस में किम जोंग उन को फिर से जनरल सेक्रेटरी चुना गया। पार्टी ने उनके परमाणु कार्यक्रम और सैन्य विस्तार की सराहना की। अमेरिका और दक्षिण कोरिया से संबंध पहले से तनावपूर्ण हैं। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में किम परमाणु और सैन्य क्षमता को और तेज करेंगे।

Speculation in north Korean politics ends Kim reelected to top post of workers ruling party
उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग - फोटो : PTI
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विस्तार

उत्तर कोरिया की सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की कांग्रेस में किम जोंग उन को दोबारा पार्टी का जनरल सेक्रेटरी चुन लिया गया है। इस फैसले के साथ ही हाल के महीनों में चल रही उन अटकलों पर विराम लग गया, जिनमें उनके बाद उत्तराधिकार को लेकर चर्चा हो रही थी। माना जा रहा था कि इस बार उनकी बेटी को जनरल सेक्रेटरी चुना जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। राज्य मीडिया के अनुसार हजारों प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से किम के नेतृत्व पर भरोसा जताया।

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पार्टी कांग्रेस पिछले गुरुवार से चल रही थी और रविवार को चौथे दिन यह निर्णय लिया गया। पार्टी ने कहा कि किम के नेतृत्व में देश ने अपनी परमाणु क्षमता को मजबूत किया है और किसी भी बाहरी खतरे का सामना करने की ताकत हासिल की है। रिपोर्ट के अनुसार आने वाले पांच वर्षों में सैन्य और राजनीतिक लक्ष्यों को और आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
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परमाणु कार्यक्रम पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि किम अपनी परमाणु और मिसाइल नीति को और तेज करेंगे। उत्तर कोरिया पहले ही ऐसे मिसाइल विकसित कर चुका है जो एशिया में अमेरिका के सहयोगी देशों और अमेरिकी मुख्यभूमि तक पहुंच सकते हैं। पार्टी ने दावा किया कि परमाणु ताकत ने देश की सुरक्षा सुनिश्चित की है और जनता का आत्मविश्वास बढ़ाया है।

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रूस से बढ़ती नजदीकी
हाल के वर्षों में रूस के साथ उत्तर कोरिया के रिश्ते मजबूत हुए हैं। यूक्रेन युद्ध के दौरान सैन्य सहयोग ने प्योंगयांग की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को और आक्रामक बनाया है। विश्लेषकों का कहना है कि किम पारंपरिक सेना को भी मजबूत करने और उसे परमाणु क्षमता के साथ जोड़ने की नई योजना पेश कर सकते हैं।

अमेरिका और दक्षिण कोरिया से दूरी
2019 में किम और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच शिखर वार्ता विफल होने के बाद से दोनों देशों के बीच कोई सार्थक वार्ता नहीं हुई है। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भी उत्तर कोरिया ने परमाणु निरस्त्रीकरण की शर्त पर बातचीत से इनकार किया है। 2024 में किम ने दक्षिण कोरिया को स्थायी दुश्मन घोषित कर दिया था, जिससे कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव और बढ़ गया।

राज्य समाचार एजेंसी ने बताया कि कांग्रेस में पार्टी नियमों में संशोधन भी किया गया है, हालांकि विवरण साझा नहीं किया गया। माना जा रहा है कि इन बदलावों के जरिए किम अपने सख्त रुख को और संस्थागत रूप दे सकते हैं। 2016 से हर पांच साल में कांग्रेस आयोजित की जा रही है और किम लगातार शीर्ष पद पर बने हुए हैं।

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