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Hong Kong: चीन ने नए और सख्त सुरक्षा कानूनों का समर्थन किया; ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन बोले- नियम बेहद कठोर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग / हॉन्गकॉन्ग
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 20 Mar 2024 04:54 PM IST
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सार
हॉन्गकॉन्ग के नए सुरक्षा कानून का चीन ने समर्थन किया है। चीन ने ब्रिटेन और यूरोपीय संघ की आलोचना की है। आलोचकों का कहना है कि इन कानूनों की मदद से असहमति को कुचला जाएगा।
हॉन्गकॉन्ग में प्रदर्शन (फाइल फोटो)
- फोटो : Social Media
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विस्तार
हॉन्गकॉन्ग में सुरक्षा को लेकर बनाए गए नए कानूनों का चीन ने समर्थन किया है। चीन ने इन कानूनों को बेहद कठोर बताने वाले देश ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन को आड़े हाथ लिया। चीन ने नए कानूनों के बचाव में कहा है कि अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ को हॉन्गकॉन्ग के कानूनी मसलों मे हस्तक्षेप बंद करना चाहिए। चीन ने दो टूक कहा है कि हॉन्गकॉन्ग आंतरिक मामला है। सभी देशों को दक्षिणी चीनी शहर में अपने 'औपनिवेशिक प्रभाव' को जारी रखने का भ्रम छोड़ देना चाहिए। आलोचकों का कहना है कि इन कानूनों की मदद से असहमति को कुचला जाएगा।
हॉन्गकॉन्ग पर बीजिंग की पकड़ बढ़ी
बता दें कि हॉन्गकॉन्ग एक ब्रिटिश उपनिवेश है। इसे 'एक देश-दो प्रणाली' के सिद्धांत के तहत 1997 में चीन को वापस सौंप दिया गया था। इस प्रमुख एशियाई शहर की स्वायत्तता बरकरार रखने को लेकर चीन ने गारंटी दी थी। चीन और हॉन्गकॉन्ग दोनों इस बात पर जोर देते हैं कि फिलहाल वही स्थिति बरकरार है। हालांकि, आलोचकों और अंतरराष्ट्रीय अधिकार समूहों का दावा है कि पिछले तुछ समय में इस शहर पर बीजिंग की पकड़ बढ़ी है।
दंड में आजीवन कारावास जैसे कठोर प्रावधान
खबरों के मुताबिक हान्गकान्ग की बीजिंग समर्थक विधायिका ने मंगलवार को एक विशेष सत्र के दौरान सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा विधेयक पारित किया। नए कानून के अनुच्छेद 23 में बाहरी हस्तक्षेप और विद्रोह जैसे नए अपराधों से सख्ती से निपटने पर जोर दिया गया है। दंड में आजीवन कारावास जैसे कठोर प्रावधान शामिल किए गए हैं।
27 साल से हॉन्गकॉन्ग पर चीनी संप्रभुता; ब्रिटेन को टिप्पणी का अधिकार नहीं
हॉन्गकॉन्ग में चीन के विदेश मंत्रालय के आयुक्त कार्यालय ने विदेशी दखल की निंदा की। ब्रिटिश विदेश सचिव डेविड कैमरुन और यूरोपीय संघ काउंसिल की निंदा करते हुए चीनी प्रवक्ता ने कहा, 1997 से हॉन्गकॉन्ग पर चीनी संप्रभुता है। इसके बाद हॉन्गकॉन्ग पर ब्रिटेन की 'कोई संप्रभुता, शासन या पर्यवेक्षण' नहीं। चीन के मुताबिक हॉन्गकॉन्ग के मामलों पर ब्रिटेन को गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं।
औपनिवेशिक मानसिकता पर बरसा ड्रैगन
ब्रिटेन ने मंगलवार को हॉन्गकॉन्ग की 'केवल देशभक्त' विधायिका (patriots-only legislature) में सर्वसम्मति से विधेयक पारित होने के बाद नए कानूनों को अधिक कठोर करार दिया। हॉन्गकॉन्ग स्थित संगठन ने कहा, ब्रिटेन लगातार परेशानी पैदा कर रहा है। ब्रिटेन हॉन्गकॉन्ग की मौजूदा स्थिति पर मनमानी टिप्पणियां कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय कानून और संबंधों को नियंत्रित करने वाले बुनियादी मानदंडों को खुलेआम रौंदा जा रहा है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी प्रवक्ता ने ब्रिटेन के इस बर्ताव को गहरी जड़ें जमा चुकी औपनिवेशिक मानसिकता और शिक्षक जैसे व्यवहार (teacher-like behaviour) का नतीजा करार दिया।
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हॉन्गकॉन्ग पर बीजिंग की पकड़ बढ़ी
बता दें कि हॉन्गकॉन्ग एक ब्रिटिश उपनिवेश है। इसे 'एक देश-दो प्रणाली' के सिद्धांत के तहत 1997 में चीन को वापस सौंप दिया गया था। इस प्रमुख एशियाई शहर की स्वायत्तता बरकरार रखने को लेकर चीन ने गारंटी दी थी। चीन और हॉन्गकॉन्ग दोनों इस बात पर जोर देते हैं कि फिलहाल वही स्थिति बरकरार है। हालांकि, आलोचकों और अंतरराष्ट्रीय अधिकार समूहों का दावा है कि पिछले तुछ समय में इस शहर पर बीजिंग की पकड़ बढ़ी है।
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दंड में आजीवन कारावास जैसे कठोर प्रावधान
खबरों के मुताबिक हान्गकान्ग की बीजिंग समर्थक विधायिका ने मंगलवार को एक विशेष सत्र के दौरान सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा विधेयक पारित किया। नए कानून के अनुच्छेद 23 में बाहरी हस्तक्षेप और विद्रोह जैसे नए अपराधों से सख्ती से निपटने पर जोर दिया गया है। दंड में आजीवन कारावास जैसे कठोर प्रावधान शामिल किए गए हैं।
27 साल से हॉन्गकॉन्ग पर चीनी संप्रभुता; ब्रिटेन को टिप्पणी का अधिकार नहीं
हॉन्गकॉन्ग में चीन के विदेश मंत्रालय के आयुक्त कार्यालय ने विदेशी दखल की निंदा की। ब्रिटिश विदेश सचिव डेविड कैमरुन और यूरोपीय संघ काउंसिल की निंदा करते हुए चीनी प्रवक्ता ने कहा, 1997 से हॉन्गकॉन्ग पर चीनी संप्रभुता है। इसके बाद हॉन्गकॉन्ग पर ब्रिटेन की 'कोई संप्रभुता, शासन या पर्यवेक्षण' नहीं। चीन के मुताबिक हॉन्गकॉन्ग के मामलों पर ब्रिटेन को गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं।
औपनिवेशिक मानसिकता पर बरसा ड्रैगन
ब्रिटेन ने मंगलवार को हॉन्गकॉन्ग की 'केवल देशभक्त' विधायिका (patriots-only legislature) में सर्वसम्मति से विधेयक पारित होने के बाद नए कानूनों को अधिक कठोर करार दिया। हॉन्गकॉन्ग स्थित संगठन ने कहा, ब्रिटेन लगातार परेशानी पैदा कर रहा है। ब्रिटेन हॉन्गकॉन्ग की मौजूदा स्थिति पर मनमानी टिप्पणियां कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय कानून और संबंधों को नियंत्रित करने वाले बुनियादी मानदंडों को खुलेआम रौंदा जा रहा है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी प्रवक्ता ने ब्रिटेन के इस बर्ताव को गहरी जड़ें जमा चुकी औपनिवेशिक मानसिकता और शिक्षक जैसे व्यवहार (teacher-like behaviour) का नतीजा करार दिया।