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क्या हैं फ्रांस की हैमर मिसाइलें?: ऑपरेशन सिंदूर में जिसने तबाह किए आतंकी ठिकाने, अब वो हथियार भारत में बनेगा

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 17 Feb 2026 08:06 PM IST
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सार

यह हैमर मिसाइलें क्या हैं और इन्हें क्यों 'स्मार्ट मिसाइल' कहा जाता है? हैमर को लेकर हुई डील क्यों अहम है? इसके अलावा दोनों देश और कौन-कौन सी रक्षा डील पर हस्ताक्षर करने वाले हैं? आइये जानते हैं...

India France Strike deal Joint Venture BEL Safran to produce HAMMER missiles in India Op Sindoor explained
भारत में बनेंगी हैमर मिसाइलें। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों नेताओं के बीच कई अहम समझौतों पर मुहर लगी। इनमें राफेल लड़ाकू विमान की खरीद पर चर्चा से लेकर हैमर मिसाइलों को भारत में बनाने के लिए समझौते पर भी बात हुई। इन मिसाइलों का जिक्र इसलिए भी अहम है, क्योंकि पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करने में इन मिसाइलों की भूमिका काफी अहम रही थी। 
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दरअसल, भारत ने बीते साल सात मई में जब पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था, तब हमारे किसी भी जवान या विमान ने सीमा पार नहीं की थी। बल्कि आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करने का असल काम इन्हीं हैमर मिसाइलों और भारत की स्वदेशी निर्मित ब्रह्मोस मिसाइलों के जरिए किया गया था। ऐसे में भारत के लिए हैमर मिसाइलों को मेक इन इंडिया पहल के तहत देश में ही बनाने के लिए फ्रांस के साथ हुआ समझौता कई मायनों में अभूतपूर्व है। 
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर यह हैमर मिसाइलें क्या हैं और इन्हें क्यों 'स्मार्ट मिसाइल' कहा जाता है? हैमर को लेकर हुई डील क्यों अहम है? इसके अलावा दोनों देश और कौन-कौन सी रक्षा डील पर हस्ताक्षर करने वाले हैं? आइये जानते हैं...

क्या हैं हैमर मिसाइलें, ये कितनी घातक?

हैमर (HAMMER) का पूरा नाम हाइली एजाइल मॉड्यूलर म्यूनिशन एक्सटेंडेड रेंज (Highly Agile Modular Munition Extended Range) है। इसे इसके फ्रांसीसी नाम एएएसएम (Armement Air-Sol Modulaire) के नाम से भी जाना जाता है।

हैमर सिर्फ एक मिसाइल नहीं है, बल्कि एक मॉड्यूलर किट है जो पारंपरिक अनगाइडेड (बिना दिशा वाले) बमों को सटीक-निर्देशित हथियारों में परिवर्तित कर देती है। इसकी प्रणाली दो चरण में काम करती है।

पहला: आगे लगा एक गाइडेंस सेक्शन जो नेविगेशन और लक्ष्य को खोजने का काम करता है। मिशन की जरूरत के मुताबिक इसमें जीपीएस, इन्फ्रारेड इमेजिंग (आईआरआई) या लेजर गाइडेंस का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

दूसरा: पीछे लगा एक रेंज एक्सटेंशन किट, जिसमें ठोस-ईंधन वाला रॉकेट बूस्टर और कलाबाजी वाले पंख होते हैं, जो इसे लंबी दूरी तक ले जाने और हवा में ही दिशा बदलने में मदद करते हैं।

 

ऑपरेशन सिंदूर में क्या थी इस मिसाइल की भूमिका?

ऑपरेशन सिंदूर में हैमर मिसाइलों की भूमिका बेहद अहम और रणनीतिक रही थी। भारत ने इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में स्थित आतंकी शिविरों को निशाना बनाया था। भारत ने इस ऑपरेशन में बिना सीमा पार किए दुश्मनों के ठिकानों को तबाह कर दिया था और 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया था। 

इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय वायुसेना ने मुख्यतः स्कैल्प और हैमर मिसाइलों का इस्तेमाल किया था। दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान और पीओके के उन ठिकानों को निशाना बनाया जाना था, जहां लचीलेपन और अनुकूलन क्षमता जरूरी थी। जहां स्कैल्प का इस्तेमाल गहरे और जबरदस्त मजबूत लक्ष्यों को भेदने के लिए किया गया, वहीं हैमर ने उन मध्यम दूरी के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, जहां उच्च सटीकता और तुरंत निशाने बदलने की जरूरत थी।

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ऑपरेशन सिंदूर में कितनी कारगर रही हैमर?
  • स्वायत्त दिशा पकड़ने की प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग प्रतिरोधक क्षमता के चलते इसे जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के मजबूत और सुरक्षित बुनियादी ढांचे को नष्ट करने में इस्तेमाल किया गया।
  • इसकी स्टैंड-ऑफ क्षमता ने भारतीय विमानों को दुश्मन के हवाई रक्षा घेरे के बाहर रहकर हमला करने की सुविधा दी। इससे विमानों को भारी सुरक्षा वाले क्षेत्रों के ऊपर से उड़ान भरने की जरूरत नहीं पड़ी। 
  • हैमर मिसाइलों की हवा से जमीन पर मार करने और कोण बदलकर लॉन्च करने की क्षमता ने भारतीय लड़ाकू विमानों के लिए पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम के जोखिम को और भी कम कर दिया। 

भारत के लिए समझौता कितना अहम?

मेक इन इंडिया को बढ़ावा: यह समझौता भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और फ्रांस की साफरान के बीच एक संयुक्त उद्यम के जरिए मेक इन इंडिया अभियान को मजबूती देगा। इसके तहत पुणे में एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा, जो इन मिसाइलों के गाइडेंस किट के निर्माण, आपूर्ति और मरम्मत का काम करेगा।

परियोजना में स्वदेशीकरण का स्तर धीरे-धीरे बढ़कर 60% तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें मुख्य पुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल कंपोनेंट्स का निर्माण स्थानीय स्तर पर ही किया जाएगा।

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रणनीतिक स्वायत्तता: इस पहल से रक्षा क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ेगी और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम होगी। स्थानीय स्तर पर उत्पादन और रखरखाव की सुविधा होने से भारतीय सशस्त्र बलों के लिए इसकी उपलब्धता में सुधार होगा। यह घरेलू तकनीकी क्षमताओं को उत्पादन और लाइफसाइकिल सपोर्ट के मामले में और भी सशक्त बनाएगा।

सैन्य क्षमता में विस्तार: इन स्वदेशी गाइडेड मिसाइलों का इस्तेमाल भारतीय नौसेना के राफेल-एम विमानों पर किया जाएगा। आपसी सहमति से इन्हें अन्य भारतीय कंपनियों या विदेशी उपभोक्ताों को भी दिया जा सकेगा।

औद्योगिक और रणनीतिक साझेदारी का विकास: यह समझौता भारत-फ्रांस संबंधों को केवल खरीदार-विक्रेता के स्तर से आगे ले जाकर सह-विकास और सह-उत्पादन पर आधारित एक गहरे औद्योगिक साझेदारी में बदल देगा।

...और कौन से रक्षा समझौतों पर नजर?

हैमर मिसाइलों के संयुक्त उत्पादन के अलावा, भारत और फ्रांस के बीच कई अन्य महत्वपूर्ण रक्षा और रणनीतिक समझौतों पर चर्चा और प्रगति होने की संभावना है।

1. राफेल लड़ाकू विमान: दोनों देशों के बीच 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए एक बड़े अरबों डॉलर के सौदे पर बातचीत चल रही है।

2. एच125 हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन: बंगलूरु में आयोजित होने वाली छठी भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा वार्ता के दौरान टाटा-एयरबस द्वारा स्थापित एच125 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन का वर्चुअल उद्घाटन।

3. नौसेना के लिए राफेल-एम: रणनीतिक चर्चाओं में भारतीय नौसेना के लिए राफेल-एम विमानों की जरूरत और उन पर इन स्वदेशी हैमर मिसाइलों के एकीकरण को लेकर भी एमओयू पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।


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