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क्या नेताओं की मौत से कमजोर हुआ ईरान?: इस्राइल को अराघची की दो टूक, कहा- व्यवस्था पर कोई असर नहीं, ताकत बरकरार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Wed, 18 Mar 2026 03:40 PM IST
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सार
इस्राइल के हमलों में शीर्ष अधिकारियों की मौत के बाद ईरान ने मजबूती का दावा किया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि देश की राजनीतिक व्यवस्था मजबूत है और किसी एक नेता की कमी से सिस्टम पर असर नहीं पड़ता। उन्होंने इस्राइल को सख्त संदेश देते हुए कहा कि ईरान हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और इस्राइल के पीएम नेतन्याहू
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
इस्राइल के हमलों में शीर्ष अधिकारियों की मौत के बाद भी ईरान ने साफ कर दिया है कि उसका सिस्टम कमजोर नहीं पड़ा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि देश की राजनीतिक व्यवस्था इतनी मजबूत है कि किसी एक बड़े नेता की गैरमौजूदगी से कोई फर्क नहीं पड़ता। उनके इस बयान को इस्राइल के खिलाफ सीधा और सख्त संदेश माना जा रहा है।
दरअसल, इस्राइल के हवाई हमलों में सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी और बसिज कमांडर घोलामरेजा सोलैमानी समेत कई अहम चेहरों की मौत हुई है। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या ईरान की सत्ता व्यवस्था पर इसका असर पड़ेगा। इसी को लेकर अराघची ने स्पष्ट कहा कि इस्लामिक गणराज्य की संरचना मजबूत है और यह किसी भी झटके को झेलने में सक्षम है।
क्या नेताओं की मौत से कमजोर होगा ईरान?
अराघची ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संस्थाएं मजबूत हैं। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति की मौजूदगी या गैरमौजूदगी से पूरे सिस्टम पर असर नहीं पड़ता। उनका कहना है कि यह व्यवस्था लंबे समय से बनी हुई है और कई चुनौतियों के बावजूद टिके रहने में सक्षम है।
ये भी पढ़ें- ट्रंप को बड़ा झटका: 'इस्राइल के दबाव में किया ईरान पर हमला', अमेरिकी आतंकरोधी एजेंसी के प्रमुख का इस्तीफा
इस्राइल के हमलों पर क्या है ईरान का रुख?
ईरान ने इस्राइल के हमलों को आक्रामक और गैरकानूनी बताया है। अराघची ने कहा कि इस तरह के हमलों से ईरान डरने वाला नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी जवाबी कार्रवाई का जिक्र नहीं किया, लेकिन रुख सख्त जरूर दिखा।
क्या क्षेत्र में बढ़ेगा तनाव?
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस घटनाक्रम से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है। ईरान और इस्राइल के बीच पहले से ही टकराव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में बड़े नेताओं की मौत के बाद बयानबाजी तेज होना इस बात का संकेत है कि हालात और बिगड़ सकते हैं।
क्या ईरान का सिस्टम वाकई इतना मजबूत है?
अराघची ने इंटरव्यू में कहा कि ईरान का सिस्टम एक मजबूत ढांचा है, जो किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं करता। उन्होंने इसे “बहुत ठोस संरचना” बताया। उनका कहना है कि संस्थाएं लगातार काम कर रही हैं और देश के अंदर स्थिरता बनी हुई है। इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि ईरान अंदर से कमजोर नहीं है।
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दरअसल, इस्राइल के हवाई हमलों में सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी और बसिज कमांडर घोलामरेजा सोलैमानी समेत कई अहम चेहरों की मौत हुई है। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या ईरान की सत्ता व्यवस्था पर इसका असर पड़ेगा। इसी को लेकर अराघची ने स्पष्ट कहा कि इस्लामिक गणराज्य की संरचना मजबूत है और यह किसी भी झटके को झेलने में सक्षम है।
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क्या नेताओं की मौत से कमजोर होगा ईरान?
अराघची ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संस्थाएं मजबूत हैं। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति की मौजूदगी या गैरमौजूदगी से पूरे सिस्टम पर असर नहीं पड़ता। उनका कहना है कि यह व्यवस्था लंबे समय से बनी हुई है और कई चुनौतियों के बावजूद टिके रहने में सक्षम है।
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इस्राइल के हमलों पर क्या है ईरान का रुख?
ईरान ने इस्राइल के हमलों को आक्रामक और गैरकानूनी बताया है। अराघची ने कहा कि इस तरह के हमलों से ईरान डरने वाला नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी जवाबी कार्रवाई का जिक्र नहीं किया, लेकिन रुख सख्त जरूर दिखा।
क्या क्षेत्र में बढ़ेगा तनाव?
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस घटनाक्रम से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है। ईरान और इस्राइल के बीच पहले से ही टकराव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में बड़े नेताओं की मौत के बाद बयानबाजी तेज होना इस बात का संकेत है कि हालात और बिगड़ सकते हैं।
क्या ईरान का सिस्टम वाकई इतना मजबूत है?
अराघची ने इंटरव्यू में कहा कि ईरान का सिस्टम एक मजबूत ढांचा है, जो किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं करता। उन्होंने इसे “बहुत ठोस संरचना” बताया। उनका कहना है कि संस्थाएं लगातार काम कर रही हैं और देश के अंदर स्थिरता बनी हुई है। इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि ईरान अंदर से कमजोर नहीं है।
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