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क्या मोजतबा खामेनेई जिंदा हैं?: मार्को रूबियो का बड़ा खुलासा, ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाने को लेकर कही ये बात
पीटीआई, वॉशिंगटन
Published by: Devesh Tripathi
Updated Wed, 03 Jun 2026 09:40 AM IST
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सार
पश्चिम एशिया संघर्ष को खत्म करने की कूटनीतिक कोशिशें अब तक खास रंग नहीं ला सकी हैं। इस बीच अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रूबियो ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को लेकर बड़ा दावा किया है। अमेरिकी कांग्रेस की एक समिति के सामने उन्होंने कहा कि मोजतबा ईरान के शासन संबंधी फैसलों में सक्रिय तौर पर शामिल हो हे हैं।
पश्चिम एशिया संघर्ष
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमेरिका-इस्राइल के हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान की कमान सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई संभाल रहे हैं। हालांकि, हमलों के बाद से अब तक मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आए हैं। इसकी वजह से मोजतबा के जिंदा होने पर सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि, अमेरिका ने मानना है कि मोजतबा खामेनेई के ईरान के फैसले लेने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल होने के संकेत मिल रहे हैं।
अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रूबियो ने अमेरिकी कांग्रेस की एक समिति के सामने कहा कि दोनों देशों के बीच वार्ता के महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश करते ही मोजतबा खामेनेई ईरान के शासन संबंधी मामलों में तेजी से सक्रिय हो रहे हैं। सीनेट की सुनवाई के दौरान सांसदों ने ट्रंप प्रशासन से ईरान नीति, परमाणु वार्ता के भविष्य और इस वर्ष अमेरिका-इस्राइल युद्ध के बाद मध्य पूर्व में पैदा हुए हालात को लेकर सवाल पूछे थे।
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इनका जवाब देते हुए मार्को रूबियो ने कहा, "मुझे लगता है कि ऐसे संकेत हैं कि वह किसी स्तर पर अधिक सक्रिय रूप से जुड़ रहे हैं। हालांकि उनके सभी संदेश लिखित रूप में और मध्यस्थों के जरिए आए हैं।" गौरतलब है कि ईरानी अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि अमेरिका-इस्राइल के हमलों में मोजतबा खामेनेई घायल हुए थे। एक ईरानी अधिकारी ने बताया था कि उन्हें केवल मामूली चोटें आई थीं और वह अब भी सरकारी मामलों में सक्रिय हैं।
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ईरान वार्ता को लेकर स्थिति अस्पष्ट
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर असमंजस बना हुआ है। अमेरिका और ईरान की ओर से वार्ता की स्थिति को लेकर मंगलवार को अलग-अलग संकेत मिले। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत के रास्ते अब भी खुले हैं, जबकि कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि वार्ता रुक गई है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "यह फर्जी और गलत खबर है कि ईरान और अमेरिका ने कुछ दिन पहले बातचीत बंद कर दी है। हमारे बीच बातचीत लगातार जारी रही है, जिसमें चार दिन पहले, तीन दिन पहले, दो दिन पहले, एक दिन पहले और आज भी शामिल है।" हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि बातचीत सफल होगी इसकी कोई गारंटी नहीं है, लेकिन कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।
तेहरान बोला- नहीं हुई कई दिनों से बातचीत
हालांकि, ईरान से जुड़े मीडिया संस्थानों ने अलग तस्वीर पेश की है। सरकारी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी अधिकारी अभी भी अमेरिका के नए प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं और कई दिनों से अमेरिकी वार्ताकारों से उनकी सीधी बातचीत नहीं हुई है। रॉयटर्स के अनुसार, तेहरान में अविश्वास अब भी गहरा है।
ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि वॉशिंगटन ने अप्रैल में हुए युद्धविराम समझौते के महत्वपूर्ण हिस्सों का पालन नहीं किया। इसी कारण वार्ता को आगे बढ़ाने की कोशिशें जटिल बनी हुई हैं, हालांकि दोनों पक्ष कूटनीतिक संवाद जारी रखने की इच्छा जता रहे हैं।
कहां अटकी है शांति वार्ता?
अमेरिका की ओर से दिए गए प्रस्ताव में ईरान का परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की बात शामिल है। मार्को रूबियो ने सांसदों से कहा कि ईरान अब अपने परमाणु कार्यक्रम के कुछ पहलुओं पर चर्चा करने के लिए तैयार दिख रहा है, जिन पर वह कुछ सप्ताह या कुछ वर्ष पहले तक बात करने को भी तैयार नहीं था।
उन्होंने कहा, "ईरान के साथ अमेरिकी वार्ता में उनके परमाणु कार्यक्रम के ऐसे पहलू शामिल हो सकते हैं, जिनका जिक्र करने से भी वे एक महीने पहले या एक साल पहले तक इनकार करते थे।" हालांकि उन्होंने आगाह किया कि इससे किसी समझौते की गारंटी नहीं मानी जानी चाहिए।
होर्मुज खोलने पर अमेरिका नहीं देगा ईरानी प्रतिबंधों में ढील
मार्को रूबियो ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और ईरान के उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के भंडार का समाधान करना अमेरिका की प्रमुख प्राथमिकताएं हैं। सुनवाई के दौरान रूबियो ने साफ किया कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के बदले ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार नहीं कर रहा है। रूबियो ने कहा कि प्रतिबंधों से किसी भी प्रकार की राहत सीधे तौर पर ईरान की परमाणु गतिविधियों से जुड़ी होगी।
उन्होंने कहा, "फिलहाल जो भी चर्चा हुई है, उसमें प्रतिबंधों में राहत शर्तों के आधार पर ही संभव है। यानी जिन कारणों से प्रतिबंध लगाए गए थे, उसी के समाधान के बदले राहत दी जा सकती है और वह कारण उनका परमाणु कार्यक्रम है।" उन्होंने कहा, "ईरान पर प्रतिबंध इसलिए लगाए गए हैं क्योंकि उसने उच्च स्तर पर यूरेनियम संवर्धन किया है। अगर वह इन गतिविधियों को छोड़ने पर सहमत होता है, तो उसके वादों और समझौतों के पालन के बदले प्रतिबंधों में राहत दी जा सकती है।"