तपती गर्मी से राहत का जापानी जुगाड़: एसी जैकेट से UV छाते तक, ये तकनीकें कैसे बदलेंगी गर्मी से बचने का तरीका?
पूर्वी एशिया में बढ़ती गर्मी के बीच जापान में लोग राहत के लिए नई तकनीक का सहारा ले रहे हैं। पंखे वाली जैकेट, सेमीकंडक्टर पंखे, ठंडे बूथ, सौर ऊर्जा वाली टोपियां और यूवी छाते इस्तेमाल में बढ़े हैं। कुछ उपकरण शरीर के आसपास हवा पहुंचाते हैं तो कुछ ठंडक पैदा करते हैं। लेकिन जब तापमान 33 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाए, तो क्या ये तकनीकें पर्याप्त हैं या सावधानी ज्यादा जरूरी है?
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पूर्वी एशिया में गर्मी बढ़ने के साथ जापान में लोग इससे बचने के लिए तकनीक और पारंपरिक उपायों का इस्तेमाल कर रहे हैं। आम पंखे से लेकर खास तरह की जैकेट और ठंडे बूथ तक बाजार में मौजूद हैं। पंखे वाली जैकेट शरीर के आसपास हवा पहुंचाकर पसीना जल्दी सुखाती है, जबकि कुछ छोटे पंखों में लगी विशेष धातु की प्लेट विद्युत प्रवाह के जरिए ठंडक पैदा करती है। तेज धूप से बचने के लिए यूवी रोधी छाते और पंखे वाली सौर टोपियां भी लोगों के बीच लोकप्रिय हो रही हैं।
एसी जैकेट शरीर को कैसे ठंडा करती है?
एसी जैकेट में छोटे पंखे लगाए जाते हैं। ये पंखे बाहर की हवा को जैकेट के अंदर खींचते हैं और शरीर के आसपास हवा का प्रवाह बनाए रखते हैं। इससे पसीना तेजी से सूखता है और शरीर का तापमान बढ़ने से रोकने में मदद मिलती है। गर्मी में बाहर काम करने वाले लोगों के लिए ऐसी जैकेट राहत का साधन बन रही हैं। इसका उद्देश्य कमरे की तरह पूरे शरीर को ठंडा करना नहीं, बल्कि शरीर के आसपास लगातार हवा पहुंचाकर गर्मी का असर कम करना है।
सेमीकंडक्टर पंखे और ठंडे बूथ में क्या खास है?
जापान में गर्मी से बचने के लिए तकनीक आधारित दूसरे विकल्प भी इस्तेमाल हो रहे हैं। छोटे सेमीकंडक्टर पंखों में लगी विशेष धातु की प्लेट विद्युत प्रवाह से ठंडक पैदा करती है। इससे केवल हवा चलाने के बजाय ठंडक का एहसास भी कराया जाता है। इसके अलावा इंसान के आकार के रेफ्रिजरेटेड बूथ भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इन्हें निर्माण स्थलों और राहत केंद्रों में लगाया जा रहा है, ताकि तेज गर्मी के बीच लोग कुछ समय ठंडे वातावरण में रह सकें।
सौर टोपी और यूवी छाते कैसे देते हैं गर्मी से राहत?
धूप में सिर को ठंडा रखने के लिए पंखे वाली सौर टोपियों का चलन भी बढ़ रहा है। इन टोपियों में पंखे लगाए जाते हैं, जिन्हें सौर ऊर्जा से चलाया जा सकता है। दूसरी ओर यूवी रोधी छाते सीधी धूप से बचाने में मदद करते हैं। इनकी अंदरूनी परत काली होती है, जो पराबैंगनी किरणों से बचाव के लिए बनाई गई है। छाते इस तरह तैयार किए गए हैं कि उन्हें लंबे समय तक पकड़ना अपेक्षाकृत आरामदायक रहे।
33 डिग्री से ऊपर गर्मी में क्या सावधानी जरूरी है?
विशेषज्ञों के अनुसार करीब 33 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान होने पर गर्मी का असर बहुत ज्यादा हो सकता है। ऐसे समय केवल तकनीकी उपकरणों पर निर्भर रहने के बजाय शरीर को ठंडा रखना और सीधी धूप से बचना जरूरी है। ठंडे पेय लेना और पैरों को ठंडा रखना भी राहत दे सकता है। यानी एसी जैकेट, पंखे वाली टोपी और यूवी छाते गर्मी से बचने में मदद कर सकते हैं, लेकिन तेज गर्मी में सावधानी और शरीर को ठंडा रखना सबसे अहम है।