{"_id":"6a7db52c5e6563d83207b010","slug":"bangladesh-power-crisis-gas-shortage-load-shedding-electricity-demand-2026-08-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"बांग्लादेश में संकट की आहट: गैस की भारी किल्लत; बिजली की कटौती से गांवों में 10-12 घंटे अंधेरा ही अंधेरा","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
बांग्लादेश में संकट की आहट: गैस की भारी किल्लत; बिजली की कटौती से गांवों में 10-12 घंटे अंधेरा ही अंधेरा
Thu, 13 Aug 2026 05:44 PM IST
राकेश कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 13 Aug 2026 05:44 PM IST
सार
बांग्लादेश में गर्मी और गैस की कमी ने बिजली व्यवस्था पर बड़ा दबाव डाल दिया है। 11 अगस्त को बिजली की कटौती 3,592 मेगावाट तक पहुंच गई। गांवों में 10-12 घंटे की कटौती से आम जनजीवन प्रभावित है। फिलहाल ईंधन संकट दूर होने तक बिजली संकट से पूरी राहत मुश्किल दिख रही है।
विज्ञापन
बांग्लादेश बिजली संकट
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बांग्लादेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर, प्राकृतिक गैस की कमी के कारण कई बिजली संयंत्र पूरी क्षमता से उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं। नतीजा यह है कि देश में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है।
इसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीण इलाकों में दिखाई दे रहा है। कई जगह रोजाना 10 से 12 घंटे तक बिजली गुल रह रही है। खेती से लेकर छोटे कारोबार तक प्रभावित हैं। किराना दुकानें, कार्यशालाएं और ऑनलाइन काम करने वाले लोग परेशान हैं। पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। रात में लंबे समय तक बिजली नहीं रहने से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
18,043 मेगावाट की मांग ने क्यों बढ़ा दिया संकट?
11 और 12 अगस्त को बिजली संकट सबसे गंभीर रहा। 11 अगस्त की आधी रात बिजली की मांग 17,523 मेगावाट थी। इसके मुकाबले आपूर्ति 13,931 मेगावाट रही। यानी मांग और आपूर्ति के बीच 3,592 मेगावाट का अंतर था।
विज्ञापन
इसी दिन रात नौ बजे बिजली की मांग अपने उच्चतम स्तर पर पहुंची। यह 18,043 मेगावाट थी। उस समय आपूर्ति 15,036 मेगावाट रही। बिजली की कमी 3,007 मेगावाट थी। 12 अगस्त की रात एक और दो बजे भी बिजली की कमी 3,000 मेगावाट से अधिक रही। सुबह कुछ राहत मिली। लेकिन दोपहर में संकट फिर बढ़ गया। दोपहर 12 बजे बिजली कटौती 2,688 मेगावाट रही। तीन बजे यह बढ़कर 3,382 मेगावाट हो गई।
बिजली संकट की पांच बड़ी वजहें क्या हैं?
ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती सबसे लंबी है। कई जगह 10 से 12 घंटे तक बिजली उपलब्ध नहीं हो रही। इसका सीधा असर खेती और छोटे कारोबार पर पड़ा है। बिजली के साथ मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं भी कुछ इलाकों में प्रभावित हुई हैं। इससे छात्रों और कर्मचारियों की परेशानी बढ़ गई है। रात की लंबी कटौती ने सुरक्षा को लेकर भी चिंता पैदा कर दी है। कुछ जगह नाराज लोगों ने ग्रामीण बिजली सुविधाओं पर हमला भी किया है।
स्थिति को देखते हुए बांग्लादेश पल्लि बिजली संघ ने बिजली प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। संघ ने पुलिस महानिरीक्षक से ग्रिड, उपकेंद्रों और कार्यालयों की सुरक्षा के लिए मदद मांगी है। संघ के मुताबिक, करीब 80 ग्रामीण बिजली सहकारी समितियां लगभग 4 करोड़ उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराती हैं। लेकिन उत्पादन मांग से कम होने के कारण इन्हें लंबे समय तक बिजली कटौती करनी पड़ रही है।
यह भी पढ़ें: India-Bangladesh: हसीना विवाद में उलझे भारत-बांग्लादेश के रिश्ते, दिल्ली ने बढ़ाया हाथ; ढाका क्यों संशय में?
राहत को लेकर सरकार ने क्या कहा?
बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन राज्य मंत्री अनिंद्य इस्लाम अमित ने कहा कि संकट गैस आधारित बिजली उत्पादन में आई बाधाओं के कारण पैदा हुआ है। उन्होंने बुधवार शाम से स्थिति में कुछ सुधार की उम्मीद जताई। हालांकि, ईंधन संकट पूरी तरह कब खत्म होगा, इसकी कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई।
पावर ग्रिड कंपनी के आंकड़ों के मुताबिक, 12 अगस्त शाम छह बजे बिजली कटौती 1,319 मेगावाट थी। एक दिन पहले इसी समय यह 2,499 मेगावाट थी। शाम के समय तेल आधारित बिजली संयंत्रों को चालू करने से आपूर्ति में कुछ सुधार हुआ। लेकिन रात में इन संयंत्रों के बंद होने के बाद बिजली कटौती फिर बढ़ जाती है।
संकट कब तक रहेगा, विशेषज्ञ ने क्या कहा?
वेस्ट जोन पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के कार्यकारी निदेशक मोहम्मद रोकनुज्जमान ने बताया कि उनकी कंपनी करीब 18 लाख उपभोक्ताओं को बिजली देती है। इसका क्षेत्र 21 जिला शहरों और 22 उपजिला शहरों तक फैला है। उन्होंने बताया कि मांग करीब 700 मेगावाट है। बिजली कटौती करीब 100 मेगावाट रही। मंगलवार को यह 140-150 मेगावाट थी। कंपनी फिलहाल रोजाना तीन से चार घंटे की कटौती के साथ काम चला रही है। बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए सरकार से सुरक्षा भी मांगी गई है।
ऊर्जा विशेषज्ञ बीडी रहमत उल्लाह ने कहा कि ईंधन संकट का तत्काल समाधान संभव नहीं है। जब तक ईंधन की कमी दूर नहीं होगी, बिजली संकट जारी रह सकता है। उन्होंने भविष्य में ऐसे संकट से बचने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा में अधिक निवेश की सलाह दी। खास तौर पर उन्होंने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की बात कही।
विज्ञापन
इसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीण इलाकों में दिखाई दे रहा है। कई जगह रोजाना 10 से 12 घंटे तक बिजली गुल रह रही है। खेती से लेकर छोटे कारोबार तक प्रभावित हैं। किराना दुकानें, कार्यशालाएं और ऑनलाइन काम करने वाले लोग परेशान हैं। पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। रात में लंबे समय तक बिजली नहीं रहने से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
विज्ञापन
18,043 मेगावाट की मांग ने क्यों बढ़ा दिया संकट?
11 और 12 अगस्त को बिजली संकट सबसे गंभीर रहा। 11 अगस्त की आधी रात बिजली की मांग 17,523 मेगावाट थी। इसके मुकाबले आपूर्ति 13,931 मेगावाट रही। यानी मांग और आपूर्ति के बीच 3,592 मेगावाट का अंतर था।
विज्ञापन
इसी दिन रात नौ बजे बिजली की मांग अपने उच्चतम स्तर पर पहुंची। यह 18,043 मेगावाट थी। उस समय आपूर्ति 15,036 मेगावाट रही। बिजली की कमी 3,007 मेगावाट थी। 12 अगस्त की रात एक और दो बजे भी बिजली की कमी 3,000 मेगावाट से अधिक रही। सुबह कुछ राहत मिली। लेकिन दोपहर में संकट फिर बढ़ गया। दोपहर 12 बजे बिजली कटौती 2,688 मेगावाट रही। तीन बजे यह बढ़कर 3,382 मेगावाट हो गई।
बिजली संकट की पांच बड़ी वजहें क्या हैं?
- गैस की कमी: गैस आधारित बिजली संयंत्रों को पर्याप्त ईंधन नहीं मिल रहा।
- घरेलू उत्पादन में गिरावट: देश में प्राकृतिक गैस का उत्पादन घट रहा है।
- भीषण गर्मी: तापमान बढ़ने के साथ बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है।
- ईंधन का दबाव: कोयले और तरल ईंधन की उपलब्धता और लागत ने संकट बढ़ाया है।
- बिजली की बढ़ती मांग: साल की शुरुआत में व्यस्त समय के दौरान मांग 9,000 मेगावाट से कुछ अधिक थी। 11 अगस्त को यह बढ़कर 18,043 मेगावाट हो गई।
ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती सबसे लंबी है। कई जगह 10 से 12 घंटे तक बिजली उपलब्ध नहीं हो रही। इसका सीधा असर खेती और छोटे कारोबार पर पड़ा है। बिजली के साथ मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं भी कुछ इलाकों में प्रभावित हुई हैं। इससे छात्रों और कर्मचारियों की परेशानी बढ़ गई है। रात की लंबी कटौती ने सुरक्षा को लेकर भी चिंता पैदा कर दी है। कुछ जगह नाराज लोगों ने ग्रामीण बिजली सुविधाओं पर हमला भी किया है।
स्थिति को देखते हुए बांग्लादेश पल्लि बिजली संघ ने बिजली प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। संघ ने पुलिस महानिरीक्षक से ग्रिड, उपकेंद्रों और कार्यालयों की सुरक्षा के लिए मदद मांगी है। संघ के मुताबिक, करीब 80 ग्रामीण बिजली सहकारी समितियां लगभग 4 करोड़ उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराती हैं। लेकिन उत्पादन मांग से कम होने के कारण इन्हें लंबे समय तक बिजली कटौती करनी पड़ रही है।
यह भी पढ़ें: India-Bangladesh: हसीना विवाद में उलझे भारत-बांग्लादेश के रिश्ते, दिल्ली ने बढ़ाया हाथ; ढाका क्यों संशय में?
राहत को लेकर सरकार ने क्या कहा?
बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन राज्य मंत्री अनिंद्य इस्लाम अमित ने कहा कि संकट गैस आधारित बिजली उत्पादन में आई बाधाओं के कारण पैदा हुआ है। उन्होंने बुधवार शाम से स्थिति में कुछ सुधार की उम्मीद जताई। हालांकि, ईंधन संकट पूरी तरह कब खत्म होगा, इसकी कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई।
पावर ग्रिड कंपनी के आंकड़ों के मुताबिक, 12 अगस्त शाम छह बजे बिजली कटौती 1,319 मेगावाट थी। एक दिन पहले इसी समय यह 2,499 मेगावाट थी। शाम के समय तेल आधारित बिजली संयंत्रों को चालू करने से आपूर्ति में कुछ सुधार हुआ। लेकिन रात में इन संयंत्रों के बंद होने के बाद बिजली कटौती फिर बढ़ जाती है।
संकट कब तक रहेगा, विशेषज्ञ ने क्या कहा?
वेस्ट जोन पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के कार्यकारी निदेशक मोहम्मद रोकनुज्जमान ने बताया कि उनकी कंपनी करीब 18 लाख उपभोक्ताओं को बिजली देती है। इसका क्षेत्र 21 जिला शहरों और 22 उपजिला शहरों तक फैला है। उन्होंने बताया कि मांग करीब 700 मेगावाट है। बिजली कटौती करीब 100 मेगावाट रही। मंगलवार को यह 140-150 मेगावाट थी। कंपनी फिलहाल रोजाना तीन से चार घंटे की कटौती के साथ काम चला रही है। बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए सरकार से सुरक्षा भी मांगी गई है।
ऊर्जा विशेषज्ञ बीडी रहमत उल्लाह ने कहा कि ईंधन संकट का तत्काल समाधान संभव नहीं है। जब तक ईंधन की कमी दूर नहीं होगी, बिजली संकट जारी रह सकता है। उन्होंने भविष्य में ऐसे संकट से बचने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा में अधिक निवेश की सलाह दी। खास तौर पर उन्होंने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की बात कही।