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Joe Kent on Iran: 'ईरान से खतरा नहीं, ट्रंप पर इस्राइल का दबाव'; इस्तीफे के बाद बोले केंट- सलाह नहीं सुनी गई

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला। Published by: Jyoti Bhaskar Updated Thu, 19 Mar 2026 07:49 AM IST
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सार

ईरान में सैन्य कार्रवाई को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कटघरे में हैं। अमेरिकी सेना इस्राइल के साथ मिलकर हवाई हमले कर रही है। बीते 20 दिन से जारी इस हिंसक संघर्ष के बीच ट्रंप प्रशासन के शीर्ष अधिकारी जो केंट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने ट्रंप पर इस्राइल का दबाव होने और सलाह न सुने जाने का दावा किया है। इनके बयान के बाद अब ट्रंप के निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। केंट ने ट्रंप को लेकर क्या कुछ कहा? जानिए इस खबर में

Joe Kent on Iran threat Israel pressure on Donald Trump advice went unheeded blocked access to US president
इस्तीफे के समय जो केंट का बयान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

अमेरिका अपनी धौंस और विदेश नीति को लेकर कटघरे में है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को खतरनाक बताते हुए उसके परमाणु ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए बीते साल भी सैन्य कार्रवाई की थी। अब बीते 28 फरवरी से शुरू हुए हिंसक संघर्ष में अमेरिकी सेना ने इस्राइल के साथ मिलकर ईरान के ठिकानों पर बम बरसाए हैं। इस कार्रवाई में ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई, उनके करीबी लारीजानी समेत कई शीर्ष सैन्य कमांडर मारे जा चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान में अब तक 1440 से अधिक मौतें हुई हैं, जबकि 18,400 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इस टकराव के कारण वैश्विक तनाव भी बढ़ रहा है। पश्चिम एशिया की उथल-पुथल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कटघरे में हैं। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी प्रशासन के शीर्ष अधिकारी जो केंट ने चौंकाने वाले बयान दिए हैं। उन्होंने कहा है कि ट्रंप इस्राइल के दबाव में ईरान पर हमले कर रहे हैं। 

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आतंकवादी घटनाओं पर नकेल कसने वाली एजेंसी के पूर्व निदेशक जो केंट ने बुधवार को दावा किया कि उन्हें और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को ईरान में युद्ध से जुड़ी चिंताओं को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ साझा करने की अनुमति नहीं मिली। उन्होंने कहा, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर हमला करने का निर्णय लेते समय सलाहकारों के एक छोटे समूह पर भरोसा किया। इस्राइल ने ट्रंप पर कार्रवाई करने का दबाव डाला। अमेरिका को ईरान से कोई खतरा है, इस बात के कोई पुख्ता सबूत नहीं थे। 
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केंट ने टकर कार्लसन के शो में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा के दौरान बताया, ईरान में सैन्य कार्रवाई जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाले कई अधिकारियों को राष्ट्रपति के सामने अपनी राय व्यक्त करने की अनुमति नहीं मिली। हवाई हमले से पहले इस मुद्दे पर कोई ठोस और खुली चर्चा तक नहीं हुई। बकौल केंट, 'मैंने इस्तीफा देने का फैसला तब किया जब यह स्पष्ट हो गया कि उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया जाएगा। मैं जानता हूं कि युद्ध का ये रास्ता कारगर नहीं है। मेरी अंतरात्मा की आवाज है कि मुझे ऐसी कार्रवाई का हिस्सा नहीं बनना।'

गौरतलब है कि जो केंट ने इसी सप्ताह ईरान में युद्ध को लेकर चिंता जताते हुए नैतिक कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद उनके बयान से इस बात का संकेत मिलता है कि 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिकी सेना का हमला कैसे हुआ। ट्रंप के निर्णय से जुड़ी ऐसी अंदरूनी जानकारी आने के बाद प्रशासन के भीतर गहरी चिंताओं को भी उजागर करती हैं। दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी केंद्र के प्रमुख के रूप में, केंट पर आतंकवादी खतरों का विश्लेषण और खतरों का पता लगाने की जिम्मेदारी थी। इनका दफ्तर राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गबार्ड के तहत काम करता है। केंट के इस्तीफे के प्रकरण में गबार्ड ने कहा, ईरान से खतरा है या नहीं, यह तय करना केवल ट्रंप का काम था।

क्या इस्राइल ने ट्रंप पर हमले का दबाव डाला?
केंट ने कहा, ऐसी कोई खुफिया जानकारी नहीं है जिससे पता लगता हो कि ईरान परमाणु हथियार विकसित कर रहा था। इस्राइल ने पहले कार्रवाई करने का वादा करके अमेरिका को मजबूर किया। सैन्य कार्रवाई के कारण पश्चिम एशिया में अमेरिकी हितों पर गंभीर जोखिम मंडराने लगा है। इस्राइली अधिकारियों और अमेरिकी मीडिया के विशेषज्ञों ने ईरान से खतरे का हौव्वा खड़ा करने में मदद की। 28 फरवरी से शुरू हुई सैन्य कार्रवाई का निर्णय इस्राइल ने लिया। केंट ने अपने दावे के समर्थन में विदेश मंत्री मार्को रुबियो और हाउस स्पीकर माइक जॉनसन के बयानों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इनकी टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि अमेरिका ने ईरान में कार्रवाई इस्राइल की योजनाओं के आधार पर की।

ट्रंप और केंट के बीच मतभेद?
केंट ने कहा, इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू समेत शीर्ष अधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से ट्रंप से बात कर ईरान पर हमले की पैरवी की। अमेरिकी राष्ट्रपति को अक्सर ऐसी जानकारी दी गई जिसकी अमेरिकी अधिकारी पुष्टि नहीं कर सकते थे। बकौल केंट, 'जब वे इस्राइली अधिकारियों की बातें सुनते थे, तो वे अमेरिकी खुफिया चैनलों से मेल नहीं खाती थीं।' 

इस्तीफे के बाद जो केंट के चौंकाने वाले दावों को यहूदी समूहों ने यहूदी विरोधी बताया है। इस दावे का पुरजोर खंडन किया जा रहा है कि इस्राइल ने अमेरिका को ईरान में सैन्य कार्रवाई करने के लिए मजबूर किया। ट्रंप ने ईरान में हमलों के अलग-अलग कारण बताए हैं। इस आधार पर युद्ध के निर्णय के पीछे इस्राइली लॉबी का दबाव होने के दावे को खुद ट्रंप ने भी खारिज कर दिया है। उन्होंने केंट की आलोचना पर कहा, 'मैं केंट को सुरक्षा मामलों पर हमेशा से कमजोर' मानता था। ट्रंप ने कहा कि अगर उनके प्रशासन में कोई ईरान को खतरा नहीं मानता, तो प्रशासन में ऐसे लोगों की कोई जगह नहीं।" ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ईरान बड़ा खतरा था।

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