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West Asia: ट्रंप ने कहा- इस्राइल तब तक शांत, जब तक ईरान.., क्या कतर में LNG संयंत्र पर हमले से बदला US का रुख?
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 19 Mar 2026 12:07 PM IST
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सार
ईरान और इस्राइल के बीच ऊर्जा ठिकानों पर हमलों से तनाव चरम पर है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि कतर पर दोबारा हमला होने पर अमेरिका ईरान के उर्जा ठिकानो को पूरी तरह नष्ट कर देगा। इस युद्ध के कारण तेल की कीमतें 108 डॉलर के पार पहुंच गई हैं।
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : ANI
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि इस्राइल अब ईरान के कीमती साउथ पार्स गैस फील्ड पर तब तक हमला नहीं करेगा, जब तक ईरान किसी बेकसूर देश पर हमला करने का फैसला नहीं करता। ट्रंप का यह बयान तब आया है जब ईरान ने कतर के ऊर्जा ठिकानों पर हमले कर भारी नुकसान पहुंचाया है। दरअसल, इस्राइल ने पहले ईरान के उस गैस फील्ड पर हमला किया था जिसे वह कतर के साथ साझा करता है। इसके जवाब में ईरान ने कतर के ठिकानों को निशाना बनाया।
क्या बोले ट्रंप?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि इस्राइल ने मध्य पूर्व के युद्ध के गुस्से में आकर ईरान के गैस फील्ड पर हमला किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस हमले के बारे में अमेरिका को पहले से कोई जानकारी नहीं थी। ट्रंप के अनुसार, इस्राइल ने ईरान के एक बड़े गैस ठिकाने के केवल एक छोटे हिस्से को निशाना बनाया था। उन्होंने कहा कि कतर का इस हमले से कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन ईरान ने बिना सोचे-समझे कतर के एलएनजी प्लांट पर हमला कर दिया, जो पूरी तरह गलत है।
ट्रंप ने कहा, अगर ईरान ने दोबारा कतर पर हमला है तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने धमकी दी कि ऐसी स्थिति में अमेरिका, इस्राइल की मदद या सहमति के बिना भी, ईरान के पूरे साउथ पार्स गैस फील्ड को पूरी तरह तबाह कर देगा। ट्रंप ने कहा कि वे इतनी बड़ी हिंसा और तबाही नहीं चाहते क्योंकि इसके परिणाम भविष्य में ईरान के लिए बहुत बुरे होंगे, लेकिन कतर की सुरक्षा के लिए वे कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
कतर और यूएई में भारी नुकसान
कतर की सरकारी कंपनी कतर एनर्जी ने बताया कि ईरानी मिसाइल हमलों से उनके गैस ठिकानों को काफी नुकसान पहुंचा है। वहां कई जगहों पर भीषण आग लग गई है, जिसे बुझाने का काम जारी है। हालांकि, अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। कतर दुनिया के लिए प्राकृतिक गैस का एक बहुत बड़ा स्रोत है। इस हमले के विरोध में कतर ने कड़ा रुख अपनाते हुए ईरानी दूतावास के अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दे दिया है।
ये भी पढ़ें: West Asia Crisis: 'गैस फील्ड पर हमला हुआ तो करारा जवाब देंगे', कतर के ऊर्जा ठिकाने पर हमले के बाद ईरान की धमकी
ईरान ने केवल कतर ही नहीं, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के हबशान और बाब गैस क्षेत्रों पर भी हमले किए हैं। यूएई सरकार ने इसे युद्ध को एक खतरनाक मोड़ पर ले जाने वाली हरकत बताया है। सुरक्षा कारणों से वहां गैस उत्पादन का काम फिलहाल रोक दिया गया है। बता दें कि खाड़ी देश युद्ध की शुरुआत से ही ईरानी हमलों का सामना कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने अब तक ईरान के खिलाफ कोई सीधी सैन्य कार्रवाई नहीं की है।
दुनिया भर में बढ़ी तेल की कीमतें
इन हमलों का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 5 प्रतिशत और बढ़ गई हैं। अब तेल की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से तेल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत का उछाल आ चुका है। इस युद्ध के चलते ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्री रास्ते को भी प्रभावित किया है, जहां से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल गुजरता है।
तेल की कमी को पूरा करने और बाजार मे स्थिरता के लिए लिए ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। अमेरिकी वित्त विभाग ने वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी है। अब अमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी के साथ व्यापार कर सकेंगी ताकि बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ाई जा सके और कीमतों को काबू में किया जा सके।
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क्या बोले ट्रंप?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि इस्राइल ने मध्य पूर्व के युद्ध के गुस्से में आकर ईरान के गैस फील्ड पर हमला किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस हमले के बारे में अमेरिका को पहले से कोई जानकारी नहीं थी। ट्रंप के अनुसार, इस्राइल ने ईरान के एक बड़े गैस ठिकाने के केवल एक छोटे हिस्से को निशाना बनाया था। उन्होंने कहा कि कतर का इस हमले से कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन ईरान ने बिना सोचे-समझे कतर के एलएनजी प्लांट पर हमला कर दिया, जो पूरी तरह गलत है।
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ट्रंप ने कहा, अगर ईरान ने दोबारा कतर पर हमला है तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने धमकी दी कि ऐसी स्थिति में अमेरिका, इस्राइल की मदद या सहमति के बिना भी, ईरान के पूरे साउथ पार्स गैस फील्ड को पूरी तरह तबाह कर देगा। ट्रंप ने कहा कि वे इतनी बड़ी हिंसा और तबाही नहीं चाहते क्योंकि इसके परिणाम भविष्य में ईरान के लिए बहुत बुरे होंगे, लेकिन कतर की सुरक्षा के लिए वे कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
कतर और यूएई में भारी नुकसान
कतर की सरकारी कंपनी कतर एनर्जी ने बताया कि ईरानी मिसाइल हमलों से उनके गैस ठिकानों को काफी नुकसान पहुंचा है। वहां कई जगहों पर भीषण आग लग गई है, जिसे बुझाने का काम जारी है। हालांकि, अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। कतर दुनिया के लिए प्राकृतिक गैस का एक बहुत बड़ा स्रोत है। इस हमले के विरोध में कतर ने कड़ा रुख अपनाते हुए ईरानी दूतावास के अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दे दिया है।
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ईरान ने केवल कतर ही नहीं, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के हबशान और बाब गैस क्षेत्रों पर भी हमले किए हैं। यूएई सरकार ने इसे युद्ध को एक खतरनाक मोड़ पर ले जाने वाली हरकत बताया है। सुरक्षा कारणों से वहां गैस उत्पादन का काम फिलहाल रोक दिया गया है। बता दें कि खाड़ी देश युद्ध की शुरुआत से ही ईरानी हमलों का सामना कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने अब तक ईरान के खिलाफ कोई सीधी सैन्य कार्रवाई नहीं की है।
दुनिया भर में बढ़ी तेल की कीमतें
इन हमलों का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 5 प्रतिशत और बढ़ गई हैं। अब तेल की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से तेल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत का उछाल आ चुका है। इस युद्ध के चलते ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्री रास्ते को भी प्रभावित किया है, जहां से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल गुजरता है।
तेल की कमी को पूरा करने और बाजार मे स्थिरता के लिए लिए ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। अमेरिकी वित्त विभाग ने वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी है। अब अमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी के साथ व्यापार कर सकेंगी ताकि बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ाई जा सके और कीमतों को काबू में किया जा सके।
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