सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Lanka court issues restraining order against events commemorating Gotabaya Rajapaksas fall

Sri Lanka Crisis: श्रीलंका की अदालत का आदेश, राजपक्षे सरकार के पतन की वर्षगांठ पर न आयोजित हों कार्यक्रम

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 09 May 2023 05:05 PM IST
विज्ञापन
सार

पिछले साल हजारों प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति गोटाबाया और प्रधान मंत्री महिंदा के इस्तीफे की मांग करते हुए देशभर में विरोध प्रदर्शन किए थे। श्रीलंका की सरकार के पास जरूरी वस्तुओं के आयात के लिए भी पैसे खत्म हो गए थे।

Lanka court issues restraining order against events commemorating Gotabaya Rajapaksas fall
श्रीलंका में विपक्षी दलों का प्रदर्शन - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार

श्रीलंका की एक अदालत ने मंगलवार को पुलिस के उस अनुरोध को स्वीकार कर लिया, जिसमें उन घटनाओं की बरसी पर होने वाले कार्यक रोक लगाने की मांग की गई थी, जिसके कारण एक साल पहले राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे की दिवालिया सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था। पिछले साल नौ मई को गोटबाया राजपक्षे के कार्यालय पर सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने हमला कर दिया था, जिसके कुछ घंटे बाद महिंदा राक्षपक्षे ने इस्तीफा दे दिया था। 

Trending Videos


पिछले साल हजारों प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति गोटाबाया और प्रधान मंत्री महिंदा के इस्तीफे की मांग करते हुए देशभर में विरोध प्रदर्शन किए थे। श्रीलंका की सरकार के पास जरूरी वस्तुओं के आयात के लिए भी पैसे खत्म हो गए थे। इससे आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही थीं और ईंधन, दवाओं और बिजली की आपूर्ति में भारी कमी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


पुलिस ने मंगलवार को कहा कि कोलंबो फोर्ट मजिस्ट्रेट ने विरोध प्रदर्शन की बरसी पर राष्ट्रपति भवन, राष्ट्रपति सचिवालय, वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास जैसे प्रमुख प्रतिष्ठानों में प्रवेश रोकने के लिए एक निरोधक आदेश जारी किया है। कोलपेट्टी पुलिस के अनुरोध के आधार पर फोर्ट मजिस्ट्रेट की अदालत ने मंगलवार को यह आदेश जारी किया।

श्रीलंका में एक साल पहले आज के ही दिन 9 मई 2022 को देशव्यापी अशांति भड़की थी। कोलंबो के गल्ले फेस में श्रीलंका पोडुजाना पेरामुना (एसएलपीपी) पार्टी के समर्थकों द्वारा सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हमला करने के बाद अशांति फैल गई थी। सरकार के कुछ राजनेताओं पर उन प्रदर्शनकारियों पर हमला करने का आरोप लगा था जिन्होंने गोटबाया के इस्तीफे की मांग की थी। द्वीप राष्ट्र 1948 के बाद पहली बार दिवालिया हो गया था। 

मार्च में श्रीलंका को आईएमएफ बेलआउट कार्यक्रम की पहली किस्त के रूप में 330 मिलियन अमेरिकी डॉलर मिले थे। इससे कर्ज के बोझ तले दबे देश के लिए बेहतर राजकोषीय अनुशासन और बेहतर प्रशासन हासिल करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। महिंदा के कुछ समर्थकों ने सरकारी कार्यालयों के सामने डेरा डाले शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हमला किया था, जिसके कुछ घंटे बाद महिंदा ने नौ मई को इस्तीफा दे दिया था। दर्जनों लोग घायल हो गए थे। देशभर में सरकार के मंत्रियों के घरों पर जवाबी हमले की सूचना मिली थी। पूरे द्वीप राष्ट्र में करीब 100 सत्ताधारी सांसदों को संपत्ति पर आगजनी के हमलों का सामना करना पड़ा।
 
तीन दिन बाद मौजूदा राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद उन्होंने आर्थिक संकट से निपटना शुरू कर दिया। लोगों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। जरूरी वस्तुओं के लिए लंबी कतारें थीं। ईंधन की आपूर्ति कम थी और दस घंटे से अधिक बिजली कटौती हुई। दो महीने बाद एक और भी बड़े विरोध के कारण राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को इस्तीफा देना पड़ा था।

श्रीलंका के संविधान के तहत यदि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों इस्तीफा देते हैं, तो संसद के स्पीकर अधिकतम 30 दिनों के लिए कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेंगे। बाद में विक्रमसिंघे ने  सितंबर 2024 तक चलने वाले राष्ट्रपति पद के शेष कार्यकाल के लिए गोटबाया की जगह ली।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed