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Bengal Elections: नतीजों से पहले ममता बनर्जी ने अचानक बुलाई बड़ी बैठक, काउंटिंग एजेंटों को दिए ये निर्देश

Sat, 02 May 2026 10:13 AM IST
Himanshu Singh Chandel पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Sat, 02 May 2026 10:13 AM IST
सार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से दो दिन पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने टीएमसी के सभी काउंटिंग एजेंटों के साथ एक अहम वर्चुअल बैठक बुलाई है। चार मई को होने वाली मतगणना को लेकर एजेंटों को कई सख्त निर्देश भी दिए गए हैं। ईवीएम से छेड़छाड़ की आशंका जताते हुए सतर्क रहने को भी कहा है। आइए, विस्तार से जानते है इस बैठक को बुलाने के पीछे का कारण क्या है।
 

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Mamata banerjee Abhishek to hold meeting with all TMC counting agents ahead of Bengal poll results
ममता बनर्जी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना चार मई को होनी है। इससे पहले ही राज्य में हलचल तेज हो गई है। नतीजों से ठीक दो दिन पहले शनिवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने एक बड़ी बैठक बुलाई है। 

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यह वर्चुअल बैठक सभी काउंटिंग एजेंटों के साथ की जाएगी, ताकि मतगणना के दिन किसी भी तरह की कोई चूक न हो। इस बैठक में उन सभी 291 सीटों के एजेंट शामिल होंगे। यहां से टीएमसी ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं। बाकी 3 सीटों पर उनकी सहयोगी भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) ने दार्जिलिंग हिल्स से चुनाव लड़ा है।
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काउंटिंग एजेंटों को क्या सख्त निर्देश दिए?
 

  • टीएमसी के शीर्ष नेताओं ने शनिवार शाम चार बजे एजेंटों के साथ वर्चुअल बैठक आयोजित होगी।
  • एजेंटों को सबसे अहम निर्देश यह दिया गया है कि वे किसी भी हाल में मतगणना खत्म होने से पहले सेंटर से बाहर न जाएं।
  • उन्हें साफ कहा गया कि जब तक जीते हुए उम्मीदवार को आधिकारिक तौर पर सर्टिफिकेट न मिल जाए, तब तक वे वहीं डटे रहें।
  • साल 2021 में नंदीग्राम सेंटर पर अचानक बिजली कटने जैसी कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो तुरंत पार्टी के बड़े नेताओं को इसकी सूचना दें।
  • किसी भी अप्रत्याशित घटना के समय एजेंटों को अपनी मर्जी से काम करने के बजाय पार्टी के शीर्ष नेताओं के अगले आदेश का इंतजार करना होगा।


नए नियमों को लेकर क्या है टीएमसी की तैयारी?
 

  • बैठक में एजेंटों को मतगणना की पूरी प्रक्रिया और ईवीएम के स्ट्रॉन्गरूम से बाहर आने के बाद के सभी नियमों के बारे में विस्तार से समझाया जाएगा।
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  • चुनाव आयोग ने इस बार सुरक्षा के लिए क्यूआर कोड का इस्तेमाल शुरू किया है, इसलिए एजेंटों को मोबाइल फोन चलाने में माहिर होने को कहा गया है।
  • टीएमसी नेतृत्व का पूरा ध्यान अब मतगणना केंद्रों पर अपने एजेंटों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने पर है।
  • इससे पहले मतदाता सूची में सुधार के दौरान अभिषेक बनर्जी ने नवंबर से फरवरी के बीच बूथ लेवल एजेंटों के साथ कई बैठकें की थीं।
  • हालांकि, मार्च में चुनाव की घोषणा के बाद ममता या अभिषेक ने ऐसी कोई बैठक नहीं की थी, तब महुआ मोइत्रा जैसे नेताओं ने यह जिम्मा संभाला था।


ममता बनर्जी को किस बात का सता रहा डर?
ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी की 'प्रचंड जीत' का पूरा भरोसा जताया है, लेकिन उन्हें मतगणना में धांधली का डर भी सता रहा है। उन्होंने नतीजों से पहले ही ईवीएम से छेड़छाड़ किए जाने की अपनी चिंताएं बार-बार सबके सामने जाहिर की हैं।


मुख्यमंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं से मतगणना केंद्रों के अंदर बने स्ट्रान्ग रूम के आसपास अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है। वहीं दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने दावा किया है कि मतगणना केंद्रों पर किसी भी गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है। फिर भी, शुक्रवार शाम को ममता बनर्जी ने अपने आवास पर अभिषेक बनर्जी के साथ घंटों तक बंद कमरे में चुनाव नतीजों और काउंटिंग के दिन की रणनीति पर चर्चा की।

मतगणना केंद्रों पर गुरुवार रात को क्यों हुआ था भारी बवाल?
गुरुवार देर रात कोलकाता के दो मतगणना केंद्रों पर हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला था। टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया था कि 29 अप्रैल को संपन्न हुए विधानसभा चुनाव की सील बंद ईवीएम वाले स्ट्रान्ग रूम में पारदर्शिता की कमी है। गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सखावत मेमोरियल स्कूल के मतगणना केंद्र पर पहुंच गई थीं और करीब चार घंटे तक वहां डटी रहीं। वहीं, खुदीराम अनुशीलन केंद्र के बाहर टीएमसी नेता शशि पांजा और कुणाल घोष ने धरने पर बैठकर अपना कड़ा विरोध जताया। इन नेताओं का सीधा आरोप था कि टीएमसी एजेंटों की गैरमौजूदगी में स्ट्रॉन्गरूम के अंदर कुछ अनधिकृत और संदिग्ध गतिविधियां की जा रही थीं।


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