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Ebola: कांगो में इबोला से अबतक 232 मौतें, सक्रमितों की संख्या 896 पहुंची; युगांडा को UN से मिली $40 लाख की मदद

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, किंशासा Published by: अमन तिवारी Updated Fri, 19 Jun 2026 01:40 PM IST
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सार

कांगो में इबोला का प्रकोप तेजी से फैल रहा है, जहां अब तक 896 मामले और 232 मौतें दर्ज हुई हैं। वहीं इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने युगांडा की मदद के लिए 40 लाख डॉलर दिए हैं। बीमारी को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर जांच, निगरानी और राहत कार्य जारी हैं।

Multiple deaths from Ebola in Congo so far, number of infected rises; Uganda receives aid from the UN
गहरा रहा इबोला का खतरा - फोटो : आईएएनएस
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विस्तार

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला वायरस का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने जानकारी दी है कि देश में इबोला के पुष्ट मामलों की संख्या अब 896 हो गई है। इस खतरनाक बीमारी ने अब तक 232 लोगों की जान ले ली है। स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को इटुरी और नॉर्थ किवू प्रांतों में इबोला के 21 नए मामले सामने आए, जिनमें छह लोगों की मौत हो गई।


लगातार बढ रही मरीजों की संख्या
यह प्रकोप अब पूर्वी कांगो के तीन प्रांतों-  इटुरी, नॉर्थ किवू और साउथ किवू के 33 स्वास्थ्य क्षेत्रों तक फैल चुका है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में 383 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं या उन्हें अलग (आइसोलेशन) रखा गया है। राहत की बात यह है कि 78 मरीज इस बीमारी से पूरी तरह ठीक हो चुके हैं। वहीं 11 ऐसे मरीज भी शामिल हैं जिनकी जांच रिपोर्ट हाल ही में नकारात्मक आई है।
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6,367 लोगों की हो रही निगरानी
प्रशासन के लिए चिंता की बात यह है कि बुधवार को ही 151 संदिग्ध मामले भी दर्ज किए गए, जिनमें 35 मौतें शामिल हैं। अधिकारी अब उन 6,367 लोगों की कड़ी निगरानी कर रहे हैं जो मरीजों के संपर्क में आए थे। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पुष्ट मामलों की संख्या हर हफ्ते बढ़ रही है। इसका मतलब है कि समुदाय के स्तर पर संक्रमण अभी भी फैल रहा है। अगर स्वास्थ्य संबंधी उपायों को तुरंत और मजबूती से लागू नहीं किया गया, तो यह बीमारी बहुत जल्द नए इलाकों में भी पहुंच सकती है। समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, डीआरसी में यह मौजूदा प्रकोप इबोला का 17वां प्रकोप है, जिसे आधिकारिक रूप से 15 मई को घोषित किया गया था।
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इबोला का इतिहास काफी पुराना है। यह बीमारी पहली बार 1976 में सूडान और कांगो में एक साथ सामने आई थी। कांगो में यह इबोला नदी के पास स्थित एक गांव में फैली थी, जिसके कारण इसका नाम 'इबोला' पड़ा। इस बीमारी के लक्षण अचानक दिखाई देते हैं, जिनमें तेज बुखार, थकान, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और गले में खराश शामिल हैं। हालत बिगड़ने पर मरीज को उल्टी, दस्त, पेट दर्द और त्वचा पर चकत्ते हो सकते हैं। यह वायरस गुर्दे और लीवर को भी नुकसान पहुंचाता है।

संयुक्त राष्ट्र ने बढ़ाया मदद का हाथ
इस संकट के बीच संयुक्त राष्ट्र ने मदद का हाथ बढ़ाया है। संयुक्त राष्ट्र के आपातकालीन राहत समन्वयक टॉम फ्लेचर ने युगांडा में इबोला से निपटने के लिए 40 लाख अमेरिकी डॉलर की राशि मंजूर की है। यह पैसा संयुक्त राष्ट्र के केंद्रीय आपातकालीन प्रतिक्रिया कोष (CERF) से दिया गया है। अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय संगठन जैसे यूनिसेफ और विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) इस काम में सहयोग कर रहे हैं। विश्व खाद्य कार्यक्रम ने मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए 6,000 से अधिक भोजन के पैकेट उपलब्ध कराए हैं।

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कांगो में भी संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी संगठनों ने इस सप्ताह 16 मीट्रिक टन से अधिक चिकित्सा सामग्री पहुंचाई है। किंशासा के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नई स्वास्थ्य जांच सुविधाएं भी बनाई गई हैं ताकि संक्रमण की निगरानी बेहतर हो सके। संयुक्त राष्ट्र ने जूलियन हार्नेस को वरिष्ठ इबोला समन्वयक नियुक्त किया है। वे राहत कार्यों के बीच तालमेल बिठाने और सहायता को तेजी से जरूरतमंदों तक पहुंचाने का काम करेंगे। बता दें कि इबोला एक बहुत ही घातक वायरस है, जिसमें मृत्यु दर लगभग 50 प्रतिशत तक होती है। यह संक्रमित जानवरों या इंसानों के शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।
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