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NASA-ISRO: धरती पर नजर रख रहा निसार, अंटार्कटिका में दिखी हमिंगबर्ड जैसी आकृति; वैज्ञानिकों के लिए क्यों खास?
Wed, 22 Jul 2026 11:17 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
आईएएनएस, वॉशिंगटन
आईएएनएस, वॉशिंगटन
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Wed, 22 Jul 2026 11:17 PM IST
सार
भारत और अमेरिका के संयुक्त उपग्रह 'निसार' ने अब अपना वैज्ञानिक डेटा सार्वजनिक करना शुरू कर दिया है। शुरुआती तस्वीरों में अंटार्कटिका का एक हिस्सा हमिंगबर्ड जैसी आकृति में दिखाई दिया है। यह उपग्रह धरती, बर्फ, जंगल और प्राकृतिक आपदाओं पर लगातार नजर रखेगा। आखिर यह तस्वीर इतनी खास क्यों है और 'निसार' वैज्ञानिकों के लिए कितना महत्वपूर्ण साबित होगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जनाते हैं...
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क्या बर्फ के भीतर भी देख सकता है 'निसार'?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारत और अमेरिका के संयुक्त पृथ्वी अवलोकन उपग्रह 'निसार' (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) ने अब अपने दोनों रडार उपकरणों से जुटाए गए वैज्ञानिक डेटा को सार्वजनिक करना शुरू कर दिया है। इस डेटा की मदद से वैज्ञानिक धरती की सतह, ग्लेशियरों, जंगलों और प्राकृतिक बदलावों को पहले से कहीं बेहतर तरीके से समझ सकेंगे। इसी क्रम में अंटार्कटिका की एक शुरुआती रडार तस्वीर सामने आई है, जिसमें बर्फ से ढका एक इलाका हमिंगबर्ड पक्षी जैसा दिखाई देता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिर्फ एक आकर्षक तस्वीर नहीं, बल्कि बर्फ के भीतर हो रहे बदलावों को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
नासा के अनुसार 20 जुलाई से 'निसार' का एल-बैंड और एस-बैंड रडार डेटा वैज्ञानिकों और आम लोगों के लिए उपलब्ध करा दिया गया है। अमेरिका और भारत की टीमें अब लगातार प्रोसेस किया गया डेटा जारी करेंगी। इस डेटा की मदद से जमीन और बर्फ की हलचल, जंगलों और दलदली क्षेत्रों की निगरानी की जा सकेगी। साथ ही भूकंप, भूस्खलन, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के बाद धरती पर हुए बदलावों का भी सटीक आकलन किया जा सकेगा। यह डेटा ऐसे समय जारी किया गया है, जब 30 जुलाई 2025 को लॉन्च किए गए 'निसार' उपग्रह की पहली वर्षगांठ आने वाली है। लॉन्च के बाद से वैज्ञानिक इसकी प्रणालियों को कैलिब्रेट करने और डेटा प्रोसेसिंग को बेहतर बनाने में जुटे थे।
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नासा के अनुसार 20 जुलाई से 'निसार' का एल-बैंड और एस-बैंड रडार डेटा वैज्ञानिकों और आम लोगों के लिए उपलब्ध करा दिया गया है। अमेरिका और भारत की टीमें अब लगातार प्रोसेस किया गया डेटा जारी करेंगी। इस डेटा की मदद से जमीन और बर्फ की हलचल, जंगलों और दलदली क्षेत्रों की निगरानी की जा सकेगी। साथ ही भूकंप, भूस्खलन, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के बाद धरती पर हुए बदलावों का भी सटीक आकलन किया जा सकेगा। यह डेटा ऐसे समय जारी किया गया है, जब 30 जुलाई 2025 को लॉन्च किए गए 'निसार' उपग्रह की पहली वर्षगांठ आने वाली है। लॉन्च के बाद से वैज्ञानिक इसकी प्रणालियों को कैलिब्रेट करने और डेटा प्रोसेसिंग को बेहतर बनाने में जुटे थे।
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अंटार्कटिका में हमिंगबर्ड जैसी आकृति क्यों दिखाई दी?
नासा ने एक शुरुआती रडार तस्वीर जारी की है, जिसमें पूर्वी अंटार्कटिका का नुनातक जतेरजावशिज्जा नाम का पर्वतीय क्षेत्र दिखाई देता है। इस पहाड़ के चारों ओर बर्फ उत्तर-पूर्व दिशा में समुद्र की ओर बह रही है। बर्फ की टूटी हुई संरचना को देखने पर यह आकृति उड़ते हुए हमिंगबर्ड जैसी नजर आती है। वैज्ञानिकों के अनुसार जब ग्लेशियर पहाड़ के चारों ओर से गुजरता है, तो जमीन की बनावट के कारण बर्फ पर दबाव पड़ता है और उसमें गहरी दरारें बन जाती हैं। रडार चित्र में यही दरारें हरे रंग की चमकीली रेखाओं के रूप में दिखाई देती हैं, जबकि चिकनी बर्फ मैजेंटा रंग में नजर आती है।
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वैज्ञानिकों ने इस तस्वीर को क्यों बताया खास?
नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के सिग्नल विश्लेषण इंजीनियर सेओंगसू जियोंग ने कहा कि यह तस्वीर बेहद सुंदर होने के साथ वैज्ञानिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार इसमें कई ऐसे सूक्ष्म विवरण दिखाई देते हैं, जिनसे यह समझने में मदद मिलती है कि ग्लेशियर किस तरह आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि 'निसार' का रडार बर्फ और हिम की परतों के भीतर तक देखने में सक्षम है। यही वजह है कि यह सामान्य कैमरों से दिखाई न देने वाली जानकारियां भी उपलब्ध कराता है। यह तस्वीर अगस्त 2025 में एल-बैंड रडार से जुटाए गए डेटा के आधार पर तैयार की गई थी, जब भारत और अमेरिका की टीमें उपग्रह की प्रणालियों का परीक्षण कर रही थीं।निसार मिशन कितना अहम और इसकी सबसे बड़ी खासियत क्या है?
- इसरो के अहमदाबाद स्थित स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर ने 'भूनिधि' पोर्टल के जरिए एस-बैंड डेटा जारी करना शुरू कर दिया है। वहीं अमेरिका की ओर से 17 जून से जुटाया गया कैलिब्रेटेड एल-बैंड डेटा भी लगातार उपलब्ध कराया जा रहा है। यह मिशन हर दिन कई दर्जन टेराबाइट वैज्ञानिक डेटा तैयार करता है और दक्षिणी ध्रुव से लेकर उत्तरी गोलार्ध में 77.5 डिग्री अक्षांश तक के क्षेत्रों को स्कैन करता है।
- इसमें लगा 12 मीटर चौड़ा ड्रम आकार का रडार रिफ्लेक्टर अब तक नासा का अंतरिक्ष में भेजा गया सबसे बड़ा रडार एंटीना रिफ्लेक्टर है। 'निसार' नासा और इसरो का पहला संयुक्त उपग्रह मिशन है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि सिंथेटिक अपर्चर रडार बादलों के बीच और रात के अंधेरे में भी सटीक जानकारी जुटा सकता है। इसी कारण इसका उपयोग जमीन में होने वाले धीमे बदलावों के साथ-साथ भूकंप, भूस्खलन, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के बाद हुए नुकसान का आकलन करने में किया जाता है।