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नेपाल में जलप्रलय और त्रिशूली में रेस्क्यू: मोतिहारी का परिवार बचा, टनल में फंसे दर्जनों; क्या है स्थिति?
Sun, 30 Aug 2026 12:04 AM IST
राकेश कुमार
एएनआई, काठमांडो।
एएनआई, काठमांडो।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 30 Aug 2026 12:04 AM IST
सार
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और जलप्रलय से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है, जहां त्रिशूली क्षेत्र में नेपाल सेना बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है। इस दौरान भारत के मोतिहारी निवासी परिवार सहित 418 नेपाली, 42 चीनी और आठ भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है। संकट की इस घड़ी में भारत ने राहत सामग्री से भरे तीन कारगो प्लेन भेजे हैं और पीएम मोदी ने हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।
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नेपाल त्रासदी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। त्रिशूली नदी और उसके आसपास के इलाकों में नेपाल सेना रात-दिन रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर लोगों की जान बचाने में जुटी हुई है। बाढ़ के तेज बहाव और लगातार बिगड़ते मौसम के बावजूद सेना के जवान मुस्तैदी से जलप्रलय में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल रहे हैं।
मौत के मुंह से सही-सलामत निकले मोतिहारी के गणेश ठाकुर
नेपाल की इस भयानक आपदा में भारत के बिहार राज्य के मोतिहारी जिले के रहने वाले गणेश ठाकुर और उनके परिवार के सात लोग भी फंस गए थे। त्रिशूली के ऊपरी इलाके में तूफान और बाढ़ के बीच जिंदगी और मौत से जूझ रहे इस परिवार को नेपाल सेना ने सुरक्षित बाहर निकाला।
गणेश ठाकुर ने क्या कहा?
आपबीती सुनाते हुए गणेश ठाकुर ने कहा, 'हम त्रिशूली में फंस गए थे। अचानक बहुत भयानक तूफान और बाढ़ आ गई। हम जैसे-तैसे बचकर बाहर निकलने में कामयाब रहे, लेकिन सच कहें तो बहुत मुश्किल से जान बची है। हम भारत के बिहार के मोतिहारी जिले के रहने वाले हैं। हमारे साथ कुल सात लोग थे और सभी सुरक्षित हैं। नेपाल सेना हमें त्रिशूली से सुरक्षित यहां लेकर आई है। हम नेपाल सरकार का दिल से धन्यवाद करते हैं। वहां सौ से अधिक लोग पानी में बह गए। यहां तक कि राहत और बचाव काम में लगे लोग भी खुद पानी के तेज बहाव में बह गए।'
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सेना ने अब तक सैकड़ों जिंदगियां बचाईं
नेपाल सेना के एक अधिकारी ने जारी रेस्क्यू ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि 29 अगस्त की शाम 4:45 बजे तक कुल 418 नेपाली नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें 173 महिलाएं और 245 पुरुष शामिल हैं। इसके अलावा बाढ़ की चपेट में आए 42 चीनी नागरिक और 8 भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों तक पहुंचाया गया है।
यह भी पढ़ें: चीन की चुप्पी पर सवाल?: ग्लेशियर टूटने से अचानक आई बाढ़ तक, आपदा पर तिब्बत ने बीजिंग पर क्या-क्या लगाए
भारत की मदद पर नेपाल के वित्त मंत्री का बड़ा बयान
नेपाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वागले ने स्थिति पर बात करते हुए भारत से मिल रही मदद की सराहना की। उन्होंने कहा कि सुरंगों की खुदाई और विशेष राहत कार्यों के लिए भारत से तकनीकी और विशेषज्ञ सहायता मांगी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत हमारा पड़ोसी और पुराना मित्र है, इसलिए संकट की इस घड़ी में हर सहयोगी देश, खासकर भारत की सहायता का हम स्वागत करते हैं। उन्होंने बताया कि पुनर्निर्माण के लिए बाद में बड़े बजट की जरूरत होगी, जिस पर आगे चर्चा की जाएगी।
मोदी सरकार ने भेजी राहत सामग्री
वित्त मंत्री डॉ. वागले ने बताया कि भारत की ओर से राहत सामग्री से भरे 3 कारगो प्लेन नेपाल पहुंच चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नेपाल के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल में फंसे भारतीय श्रद्धालुओं की सुरक्षा और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना नेपाल सरकार की पहली प्राथमिकता में शामिल है।
टनल में फंसे लोगों की तलाश और राहत सामग्री का वितरण तेज
नेपाल के त्रिशूली 3A, 3B और अपर त्रिशूली 1 जैसी बड़ी जलविद्युत (हाइड्रोपावर) परियोजनाओं में दर्जनों कर्मचारियों के टनल (सुरंग) के अंदर फंसे होने की आशंका है। उन्हें बचाने के लिए नेपाली सेना सुरंग के प्रवेश द्वार तक पहुंचने के लिए भारी मशक्कत कर रही है। इसके अलावा सीमा से लगे जंगलों में फंसे लोगों की भी तलाश जारी है। वित्त मंत्री ने बताया कि बाढ़ में 19 मजबूत पुल बह गए हैं, जिससे कई गांव मुख्य मार्ग से कट चुके हैं और राशन खत्म हो रहा है। उन तक हेलीकॉप्टर और राहत दलों के जरिए भोजन-पानी पहुंचाने का प्रयास युद्धस्तर पर जारी है।
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मौत के मुंह से सही-सलामत निकले मोतिहारी के गणेश ठाकुर
नेपाल की इस भयानक आपदा में भारत के बिहार राज्य के मोतिहारी जिले के रहने वाले गणेश ठाकुर और उनके परिवार के सात लोग भी फंस गए थे। त्रिशूली के ऊपरी इलाके में तूफान और बाढ़ के बीच जिंदगी और मौत से जूझ रहे इस परिवार को नेपाल सेना ने सुरक्षित बाहर निकाला।
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गणेश ठाकुर ने क्या कहा?
आपबीती सुनाते हुए गणेश ठाकुर ने कहा, 'हम त्रिशूली में फंस गए थे। अचानक बहुत भयानक तूफान और बाढ़ आ गई। हम जैसे-तैसे बचकर बाहर निकलने में कामयाब रहे, लेकिन सच कहें तो बहुत मुश्किल से जान बची है। हम भारत के बिहार के मोतिहारी जिले के रहने वाले हैं। हमारे साथ कुल सात लोग थे और सभी सुरक्षित हैं। नेपाल सेना हमें त्रिशूली से सुरक्षित यहां लेकर आई है। हम नेपाल सरकार का दिल से धन्यवाद करते हैं। वहां सौ से अधिक लोग पानी में बह गए। यहां तक कि राहत और बचाव काम में लगे लोग भी खुद पानी के तेज बहाव में बह गए।'
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सेना ने अब तक सैकड़ों जिंदगियां बचाईं
नेपाल सेना के एक अधिकारी ने जारी रेस्क्यू ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि 29 अगस्त की शाम 4:45 बजे तक कुल 418 नेपाली नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें 173 महिलाएं और 245 पुरुष शामिल हैं। इसके अलावा बाढ़ की चपेट में आए 42 चीनी नागरिक और 8 भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों तक पहुंचाया गया है।
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भारत की मदद पर नेपाल के वित्त मंत्री का बड़ा बयान
नेपाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वागले ने स्थिति पर बात करते हुए भारत से मिल रही मदद की सराहना की। उन्होंने कहा कि सुरंगों की खुदाई और विशेष राहत कार्यों के लिए भारत से तकनीकी और विशेषज्ञ सहायता मांगी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत हमारा पड़ोसी और पुराना मित्र है, इसलिए संकट की इस घड़ी में हर सहयोगी देश, खासकर भारत की सहायता का हम स्वागत करते हैं। उन्होंने बताया कि पुनर्निर्माण के लिए बाद में बड़े बजट की जरूरत होगी, जिस पर आगे चर्चा की जाएगी।
मोदी सरकार ने भेजी राहत सामग्री
वित्त मंत्री डॉ. वागले ने बताया कि भारत की ओर से राहत सामग्री से भरे 3 कारगो प्लेन नेपाल पहुंच चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नेपाल के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल में फंसे भारतीय श्रद्धालुओं की सुरक्षा और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना नेपाल सरकार की पहली प्राथमिकता में शामिल है।
टनल में फंसे लोगों की तलाश और राहत सामग्री का वितरण तेज
नेपाल के त्रिशूली 3A, 3B और अपर त्रिशूली 1 जैसी बड़ी जलविद्युत (हाइड्रोपावर) परियोजनाओं में दर्जनों कर्मचारियों के टनल (सुरंग) के अंदर फंसे होने की आशंका है। उन्हें बचाने के लिए नेपाली सेना सुरंग के प्रवेश द्वार तक पहुंचने के लिए भारी मशक्कत कर रही है। इसके अलावा सीमा से लगे जंगलों में फंसे लोगों की भी तलाश जारी है। वित्त मंत्री ने बताया कि बाढ़ में 19 मजबूत पुल बह गए हैं, जिससे कई गांव मुख्य मार्ग से कट चुके हैं और राशन खत्म हो रहा है। उन तक हेलीकॉप्टर और राहत दलों के जरिए भोजन-पानी पहुंचाने का प्रयास युद्धस्तर पर जारी है।