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Nepal: सीमा विवाद के बयान पर संसद में घिरे पीएम बालेन, भारी हंगामें के बीच दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित

पीटीआई, काठमांडू Published by: अमन तिवारी Updated Tue, 02 Jun 2026 07:04 PM IST
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सार

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के भारत-नेपाल सीमा विवाद पर दिए गए बयान के बाद संसद में भारी हंगामा हुआ। विपक्षी सांसदों के विरोध के चलते संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इस बीच भारत ने सीमा विवाद में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को खारिज कर दिया।

Nepal PM Cornered in Parliament Over Remark on Border Dispute Proceedings in Both Houses Adjourned Amid Uproar
बालेंद्र शाह - फोटो : इंस्टाग्राम/बालेंद्र शाह
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विस्तार

नेपाल की संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही मंगलवार को स्थगित कर दी गई। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) ने भारत के साथ सीमा विवाद को लेकर एक विवादित बयान दिया था। इस बयान पर सांसदों ने कड़ा विरोध जताया और सदन के कामकाज में बाधा डाली। इसके चलते प्रतिनिधि सभा (निचला सदन) को आठ जून तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। वहीं, नेशनल असेंबली की कार्यवाही बुधवार तक के लिए टाल दी गई है। इससे पहले सोमवार को भी संसद की बैठकें इसी मुद्दे पर स्थगित हुई थीं।


नेपाल के पीएम ने क्या कहा था?
विपक्षी सांसद प्रधानमंत्री बालेन के उस बयान का विरोध कर रहे हैं जो उन्होंने रविवार को संसद में दिया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि 'सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत के इलाकों पर कब्जा किया है।' उनके इस बयान से देश में बड़ा विवाद खड़ा हो गया। बालेन ने यह भी कहा कि भारत और नेपाल ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और विशेषज्ञों की मदद लेने पर सहमति जताई है। उन्होंने जानकारी दी कि काठमांडू ने इस मामले को चीन और ब्रिटेन के सामने भी उठाया है।
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भारत का जवाब
भारत ने मंगलवार को इस मामले पर अपनी स्थिति साफ कर दी। भारत ने सीमा विवाद को सुलझाने में किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और नेपाल की लगभग 98 प्रतिशत सीमा तय हो चुकी है। कुछ हिस्से अभी अनसुलझे हैं क्योंकि गंडक नदी ने अपना रास्ता बदल लिया है। उन्होंने बताया कि सीमा के कुछ हिस्सों में 'नो-मैन्स लैंड' पर अतिक्रमण के मामले हैं, जिनका अभी दोनों देश मिलकर नक्शा तैयार कर रहे हैं।
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मंगलवार को जैसे ही प्रतिनिधि सभा की बैठक शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री के बयान पर नाराजगी जताई। कुछ सांसद विरोध करने के लिए अध्यक्ष के आसन के पास तक पहुंच गए। स्पीकर डोल प्रसाद अर्याल ने सदस्यों से शांत रहने की अपील की, लेकिन सांसदों ने उनकी बात नहीं मानी। विपक्षी सांसद मांग कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री अपना बयान वापस लें और इसे संसद के रिकॉर्ड से हटाया जाए।नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी को लेकर पुराना विवाद है। दोनों देश इन इलाकों पर अपना दावा करते हैं। भारत का कहना है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा हैं और इस मुद्दे को आपसी बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए।
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