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Nepal: सुशीला कार्की बोलीं- सोचा नहीं था कि ओली हार जाएंगे, बालेन पर कही ये बात; बदलाव के नए दौर में नेपाल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
Published by: Pavan
Updated Sun, 15 Mar 2026 11:17 PM IST
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सार
नेपाल में हालिया आम चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि नई पीढ़ी की राजनीतिक ताकत का बड़ा संदेश माना जा रहा है। पुराने दिग्गज नेताओं की पकड़ ढीली पड़ती दिख रही है और युवाओं के भरोसे वाले नए चेहरे तेजी से आगे आ रहे हैं। वहीं सुशीला कार्की के बयान से भी यही साफ होता है कि नेपाल अब एक नए राजनीतिक दौर में प्रवेश करता दिख रहा है।
सुशीला कार्की, अंतरिम प्रधानमंत्री, नेपाल
- फोटो : ANI
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विस्तार
नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने कहा है कि उन्हें बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि नेपाल के चार बार प्रधानमंत्री रह चुके के पी शर्मा ओली आम चुनाव हार जाएंगे। उन्होंने माना कि यह नतीजा युवाओं के बढ़ते असर, बदलाव की मांग और जेन-जी आंदोलन की ताकत को दिखाता है। नेपाल के आम चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी यानी आरएसपी ने बड़ी जीत हासिल की है। पार्टी ने 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में 182 सीटें जीत लीं। इनमें 125 सीटें सीधे चुनाव से मिलीं, जबकि 57 सीटें समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत आईं। इस जीत के साथ पूर्व काठमांडू मेयर बालेंद्र शाह 'बालेन' को प्रधानमंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
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केपी शर्मा ओली के हारने पर जताई हैरानी
सुशीला कार्की ने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की हुई कि ओली अपनी मजबूत सीट झापा-5 से हार गए। उन्होंने कहा कि ओली 30 से 40 साल से उस इलाके की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और वहां उनकी पकड़ बहुत मजबूत मानी जाती थी। इसलिए उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि वहां से उनकी हार हो सकती है। लेकिन बालेन ने इसी सीट पर उन्हें 50 हजार से ज्यादा वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया। पीएम कार्की ने चुनाव नतीजों को साफ तौर पर युवाओं के मूड से जोड़ा। उनके मुताबिक यह परिणाम बताता है कि नेपाल की नई पीढ़ी अब पुरानी राजनीति से अलग कुछ नया चाहती है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं है, बल्कि यह देश में उठ रही नई राजनीतिक लहर का संकेत है। युवाओं ने इस बार खुलकर बदलाव के पक्ष में मतदान किया है।
उन्होंने बालेन शाह को लेकर भी भरोसा जताया। कार्की ने कहा कि बालेन के चुनाव अभियान से यह संदेश गया कि तराई, पहाड़ और हिमालयी क्षेत्र के लोग एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें बालेन पर विश्वास है और उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में कुछ अच्छा होगा। इस बयान को नेपाल की नई राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है।
जेन-जी आंदोलन के बाद गिरी थी ओली सरकार
सुशीला कार्की पिछले साल सितंबर में अंतरिम प्रधानमंत्री बनी थीं। उस समय केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ भड़के जेन-जी प्रदर्शनों के बाद गिर गई थी। कार्की ने कहा कि उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी जिम्मेदारी समय पर शांतिपूर्ण चुनाव कराना थी, और उन्हें खुशी है कि सरकार यह जिम्मेदारी निभाने में सफल रही। उन्होंने अपने कार्यकाल को कठिन लेकिन संतोषजनक बताया। कार्की ने कहा कि शुरुआत में ही उन्होंने तय कर लिया था कि चुनाव के दौरान किसी की जान नहीं जानी चाहिए और खून की एक बूंद भी नहीं बहनी चाहिए। आखिरकार चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से पूरे हुए, जो उनके लिए सबसे बड़ी सफलता रही।
चुनाव कराना आसान नहीं था- सुशीला कार्की
उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव कराना आसान नहीं था। शुरुआत में सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग राजनीतिक दलों से बातचीत करना था। उन्होंने नेपाल की पारंपरिक बड़ी पार्टियों के साथ-साथ छोटे और क्षेत्रीय दलों के नेताओं से भी संवाद किया। कुल मिलाकर करीब 125 राजनीतिक समूहों से संपर्क साधना पड़ा। यह बताता है कि अंतरिम सरकार को चुनावी माहौल संभालने में काफी मेहनत करनी पड़ी।
यह भी पढ़ें - नेपाल में दर्दनाक हादसा: मनोकामना मंदिर से लौट रहे सात भारतीय श्रद्धालुओं की मौत, करीब 200 मीटर नीचे गिरी बस
सुशीला कार्की ने नई सरकार को दिए कई अहम सलाह
नई सरकार को लेकर सुशीला कार्की ने कुछ अहम सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं के लिए रोजगार के मौके पैदा करने होंगे, ताकि नेपाली युवाओं को अपना देश छोड़कर बाहर जाने की मजबूरी न हो। साथ ही शिक्षा व्यवस्था में सुधार जरूरी है और देश के प्रति भरोसे का माहौल बनाना भी बहुत अहम है। उनका मानना है कि नेपाल प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर और बेहद सुंदर देश है, इसलिए अब देश को टकराव और तनाव नहीं, बल्कि स्थिरता और विकास की जरूरत है।
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केपी शर्मा ओली के हारने पर जताई हैरानी
सुशीला कार्की ने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की हुई कि ओली अपनी मजबूत सीट झापा-5 से हार गए। उन्होंने कहा कि ओली 30 से 40 साल से उस इलाके की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और वहां उनकी पकड़ बहुत मजबूत मानी जाती थी। इसलिए उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि वहां से उनकी हार हो सकती है। लेकिन बालेन ने इसी सीट पर उन्हें 50 हजार से ज्यादा वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया। पीएम कार्की ने चुनाव नतीजों को साफ तौर पर युवाओं के मूड से जोड़ा। उनके मुताबिक यह परिणाम बताता है कि नेपाल की नई पीढ़ी अब पुरानी राजनीति से अलग कुछ नया चाहती है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं है, बल्कि यह देश में उठ रही नई राजनीतिक लहर का संकेत है। युवाओं ने इस बार खुलकर बदलाव के पक्ष में मतदान किया है।
उन्होंने बालेन शाह को लेकर भी भरोसा जताया। कार्की ने कहा कि बालेन के चुनाव अभियान से यह संदेश गया कि तराई, पहाड़ और हिमालयी क्षेत्र के लोग एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें बालेन पर विश्वास है और उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में कुछ अच्छा होगा। इस बयान को नेपाल की नई राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है।
जेन-जी आंदोलन के बाद गिरी थी ओली सरकार
सुशीला कार्की पिछले साल सितंबर में अंतरिम प्रधानमंत्री बनी थीं। उस समय केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ भड़के जेन-जी प्रदर्शनों के बाद गिर गई थी। कार्की ने कहा कि उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी जिम्मेदारी समय पर शांतिपूर्ण चुनाव कराना थी, और उन्हें खुशी है कि सरकार यह जिम्मेदारी निभाने में सफल रही। उन्होंने अपने कार्यकाल को कठिन लेकिन संतोषजनक बताया। कार्की ने कहा कि शुरुआत में ही उन्होंने तय कर लिया था कि चुनाव के दौरान किसी की जान नहीं जानी चाहिए और खून की एक बूंद भी नहीं बहनी चाहिए। आखिरकार चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से पूरे हुए, जो उनके लिए सबसे बड़ी सफलता रही।
चुनाव कराना आसान नहीं था- सुशीला कार्की
उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव कराना आसान नहीं था। शुरुआत में सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग राजनीतिक दलों से बातचीत करना था। उन्होंने नेपाल की पारंपरिक बड़ी पार्टियों के साथ-साथ छोटे और क्षेत्रीय दलों के नेताओं से भी संवाद किया। कुल मिलाकर करीब 125 राजनीतिक समूहों से संपर्क साधना पड़ा। यह बताता है कि अंतरिम सरकार को चुनावी माहौल संभालने में काफी मेहनत करनी पड़ी।
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सुशीला कार्की ने नई सरकार को दिए कई अहम सलाह
नई सरकार को लेकर सुशीला कार्की ने कुछ अहम सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं के लिए रोजगार के मौके पैदा करने होंगे, ताकि नेपाली युवाओं को अपना देश छोड़कर बाहर जाने की मजबूरी न हो। साथ ही शिक्षा व्यवस्था में सुधार जरूरी है और देश के प्रति भरोसे का माहौल बनाना भी बहुत अहम है। उनका मानना है कि नेपाल प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर और बेहद सुंदर देश है, इसलिए अब देश को टकराव और तनाव नहीं, बल्कि स्थिरता और विकास की जरूरत है।
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