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फीकी पड़ी ट्रंप की अपील: होर्मुज में नहीं मिला किसी का साथ, ऑस्ट्रेलिया-जापान ने भी नौसेना भेजने से किया इनकार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: अमन तिवारी
Updated Mon, 16 Mar 2026 11:57 AM IST
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सार
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा के लिए कई देशों से युद्धपोत भेजने की मांग की है। ऑस्ट्रेलिया और जापान ने फिलहाल इससे इनकार कर दिया है, जबकि ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया अभी विचार कर रहे हैं। ट्रंप का मानना है कि तेल पर निर्भर देशों को अपने व्यापारिक हितों की रक्षा खुद करनी चाहिए।
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : ANI
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विस्तार
पश्चिम एशिया में ईरान के साथ लगातार बढ़ते तनाव के कारण तेल सप्लाई का यह मुख्य समुद्री रास्ता (होर्मुज जलडमरूमध्य) बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब सात देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य में अपने युद्धपोत तैनात करने की मांग की है। ट्रंप चाहते हैं कि ये देश अपनी नौसेना भेजकर इस रास्ते की सुरक्षा करें। हालांकि, अमेरिका के करीबी सहयोगियों ने इस मांग पर बहुत ही सावधानी भरा रुख अपनाया है और कुछ ने तो इससे साफ इनकार कर दिया है।
ऑस्ट्रेलिया ने क्या कहा?
ऑस्ट्रेलिया ने इस क्षेत्र में नौसैनिक सहायता देने से मना कर दिया है। कैबिनेट मंत्री कैथरीन किंग ने बताया कि यह समुद्री रास्ता बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के पास जहाज भेजने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास इस संबंध में कोई औपचारिक अनुरोध नहीं आया है।
जापान ने भी किया इनकार
मामले पर जापान का रुख भी कुछ ऐसा ही है। प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने सोमवार को संसद में कहा कि फिलहाल पश्चिम एशिया में जहाजों की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने साफ किया कि जापान ने अभी तक किसी भी सैन्य भागीदारी के लिए हामी नहीं भरी है। सरकार अभी इस बात की जांच कर रही है कि वह अपने कानूनों के दायरे में रहकर स्वतंत्र रूप से क्या कर सकती है।
ये भी पढ़ें: पश्चिम एशिया संघर्ष: तेल संकट के बीच बढ़ेगा वैश्चिक टकराव, ट्रंप ने होर्मुज पर सात देशों से क्यों मांगी मदद?
दक्षिण कोरिया ने क्या कहा?
वहीं दक्षिण कोरिया ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर वाशिंगटन के साथ बातचीत कर रहा है। सियोल के राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, कोई भी फैसला लेने से पहले स्थिति की गहराई से समीक्षा की जाएगी। वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस मामले में कूटनीतिक रास्ता अपनाया है। उन्होंने ट्रंप से बात की और समुद्री रास्ते को फिर से खोलने की जरूरत पर जोर दिया ताकि दुनिया भर में सामान की आवाजाही न रुके। स्टार्मर ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से भी इस संकट पर चर्चा की है।
क्या बोले थे ट्रंप?
राष्ट्रपति ट्रंप ने एयरफोर्स वन विमान में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जो देश अपनी तेल जरूरतों के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर हैं, उन्हें इस रास्ते की सुरक्षा में मदद करनी चाहिए। ट्रंप का तर्क है कि इन देशों को अपने हितों की रक्षा खुद करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अब इस रास्ते पर उतना निर्भर नहीं है जितना कि दूसरे बड़े देश हैं।
चीन का भी किया था जिक्र
ट्रंप ने खास तौर पर चीन का नाम लिया। उन्होंने कहा कि चीन अपनी तेल सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से मंगवाता है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि चीन इस गठबंधन का हिस्सा बनेगा या नहीं। ट्रंप की इन कोशिशों के बावजूद अभी तक किसी भी देश ने सेना भेजने का पक्का वादा नहीं किया है। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
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ऑस्ट्रेलिया ने क्या कहा?
ऑस्ट्रेलिया ने इस क्षेत्र में नौसैनिक सहायता देने से मना कर दिया है। कैबिनेट मंत्री कैथरीन किंग ने बताया कि यह समुद्री रास्ता बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के पास जहाज भेजने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास इस संबंध में कोई औपचारिक अनुरोध नहीं आया है।
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जापान ने भी किया इनकार
मामले पर जापान का रुख भी कुछ ऐसा ही है। प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने सोमवार को संसद में कहा कि फिलहाल पश्चिम एशिया में जहाजों की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने साफ किया कि जापान ने अभी तक किसी भी सैन्य भागीदारी के लिए हामी नहीं भरी है। सरकार अभी इस बात की जांच कर रही है कि वह अपने कानूनों के दायरे में रहकर स्वतंत्र रूप से क्या कर सकती है।
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दक्षिण कोरिया ने क्या कहा?
वहीं दक्षिण कोरिया ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर वाशिंगटन के साथ बातचीत कर रहा है। सियोल के राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, कोई भी फैसला लेने से पहले स्थिति की गहराई से समीक्षा की जाएगी। वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस मामले में कूटनीतिक रास्ता अपनाया है। उन्होंने ट्रंप से बात की और समुद्री रास्ते को फिर से खोलने की जरूरत पर जोर दिया ताकि दुनिया भर में सामान की आवाजाही न रुके। स्टार्मर ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से भी इस संकट पर चर्चा की है।
क्या बोले थे ट्रंप?
राष्ट्रपति ट्रंप ने एयरफोर्स वन विमान में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जो देश अपनी तेल जरूरतों के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर हैं, उन्हें इस रास्ते की सुरक्षा में मदद करनी चाहिए। ट्रंप का तर्क है कि इन देशों को अपने हितों की रक्षा खुद करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अब इस रास्ते पर उतना निर्भर नहीं है जितना कि दूसरे बड़े देश हैं।
चीन का भी किया था जिक्र
ट्रंप ने खास तौर पर चीन का नाम लिया। उन्होंने कहा कि चीन अपनी तेल सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से मंगवाता है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि चीन इस गठबंधन का हिस्सा बनेगा या नहीं। ट्रंप की इन कोशिशों के बावजूद अभी तक किसी भी देश ने सेना भेजने का पक्का वादा नहीं किया है। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
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