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'न युद्धविराम की मांग न ही बातचीत की': ईरान ने खारिज किया अमेरिकी दावा, भड़के ट्रंप बोले- झूठी खबरें फैला रहा

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: Shubham Kumar Updated Mon, 16 Mar 2026 07:45 AM IST
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सार

पश्चिम एशिया में अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच संघर्ष 17वें दिन और उग्र हो गया है।मिसाइलों और ड्रोन हमलों के बीच क्षेत्र में तनाव चरम पर है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि ईरान सीजफायर चाहता है। दूसरी ओर पलटवार करते हुए ट्रंप ने फिर ईरान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आइए जानते हैं किसने क्या कहा?

West Asia Conflict Iran Rejects Trump Claim ceasefire said We have neither sought truce nor talks
ईरान-अमेरिका टकराव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-प्रतिदिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के भीषण हमलों से दहक रहे मोर्चे पर ईरान भी जोरदार पलटवार कर रहा है। मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब 17वें दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। इसी उग्र हालात के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने रविवार को अमेरिका के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि ईरान युद्धविराम चाहता है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान ने न तो कभी सीजफायर मांगा है और न ही किसी तरह की बातचीत की मांग की है।

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अराघची ने सख्त संदेश देते हुए कहा कि ईरान तब तक अपनी रक्षा करता रहेगा जब तक जरूरत होगी। अमेरिकी मीडिया संगठन सीबीएस न्यूज को दिए इंटरव्यू में अराघची ने कहा कि ईरान अमेरिका के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा, जब तक कि अमेरिका इस युद्ध को गैरकानूनी मानकर अपना रुख नहीं बदलता। उन्होंने कहा फिर से इस बात को दोहराया कि हमने कभी सीजफायर नहीं मांगा और न ही बातचीत की मांग की है। हम जितने समय तक जरूरी होगा, अपनी रक्षा के लिए तैयार हैं।
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ईरान फैला रहा झूठी खबरें- ट्रंप
इधर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के विदेश मंत्री की तरफ से उनके बयान को खारिज किए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने कहा कि ईरान जनता को सच्चाई नहीं बता रहा और गलत जानकारी फैला रहा है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने सिर्फ सच्चाई सामने रखी है, जबकि ईरान झूठी खबरें फैला रहा है। उनके मुताबिक, ईरान ने यह दावा किया था कि उसने अमेरिकी युद्धपोत USS अब्राहम लिंकन (CVN-72) पर हमला किया और उसे नुकसान पहुंचाया, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यह जहाज न तो कभी हमले का शिकार हुआ और न ही उसमें आग लगी थी।

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ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें पहले अंदाजा नहीं था कि ईरान फर्जी खबरें फैलाने के लिए इतना बदनाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अमेरिकी मीडिया संस्थान भी ऐसी गलत जानकारियों को आगे बढ़ा रहे हैं, जिनके बारे में उन्हें पता होता है कि वे सच नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर मीडिया जानबूझकर झूठी जानकारी फैलाता है, तो इसके लिए उन्हें गंभीर कानूनी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।



अमेरिका पर लगाया गैरकानूनी युद्ध का आरोप
इस दौरान ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि यह युद्ध अमेरिका ने शुरू किया है और ईरान सिर्फ अपने बचाव में कार्रवाई कर रहा है। उनके अनुसार, जब तक डोनाल्ड ट्रंप को यह समझ नहीं आता कि यह युद्ध जीतने वाला नहीं है, तब तक ईरान अपनी कार्रवाई जारी रखेगा। अराघची ने यह भी कहा कि अभी अमेरिका से बातचीत करने का कोई कारण नहीं है। उनका कहना था कि जब ईरान अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा था, उसी समय अमेरिका ने उस पर हमला कर दिया। इसलिए अब बातचीत का कोई भरोसा नहीं रह गया है।

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खाड़ी देशों पर हमले का किया बचाव
उन्होंने कहा कि हम अमेरिकियों से बात करने का कोई कारण नहीं देखते, क्योंकि जब हम उनसे बात कर रहे थे, उसी समय उन्होंने हम पर हमला करने का फैसला कर लिया। इसके साथ ही ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में किए गए अपने हमलों का भी बचाव किया। अराघची ने कहा कि ईरानी सेना सिर्फ अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सैन्य संसाधनों को निशाना बना रही है, किसी दूसरे देश को नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि जिन खाड़ी देशों ने अपनी जमीन पर अमेरिकी सेना को ठिकाने दिए हैं, उन्होंने ही अमेरिका को ईरान पर हमला करने का मौका दिया है।

ट्रंप ने कहा था- अभी समझौते के लिए तैयार नहीं
गौरतलब है कि इससे पहले शनिवार को एनबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन अमेरिका अभी इसके लिए तैयार नहीं है क्योंकि ईरान की ओर से रखी गई शर्तें पर्याप्त नहीं हैं। ट्रंप ने कहा था कि अगर कोई समझौता होता है तो वह बहुत मजबूत और ठोस होना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि अमेरिका किन शर्तों पर समझौता करेगा, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह छोड़ना पड़ सकता है।

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