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PM Modi Gift to Macron: फ्रांस के राष्ट्रपति को भेंट की कलमकारी महाभारत पेंटिंग, ब्रिजिट को दी पोचमपल्ली स्टोल

आईएएनएस, पेरिस Published by: Rahul Kumar Updated Fri, 19 Jun 2026 04:32 PM IST
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सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक नेताओं को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय शिल्पकला से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए।
 

PM Modi gifts Kalamkari Mahabharata painting to French President Macron
पीएम मोदी ने जी 7 के नेताओं को दिए गिफ्ट। - फोटो : एक्स
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विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने फ्रांस दौरे के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिजिट मैक्रों को भारत की समृद्ध कला और हस्तशिल्प परंपरा से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए। इन उपहारों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विरासत, शिल्पकला और पारंपरिक कौशल को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया गया।



कलमकारी महाभारत पेंटिंग भेंट की
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को प्रधानमंत्री मोदी ने आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध हस्तनिर्मित कलमकारी महाभारत पेंटिंग भेंट की। इस कलाकृति को तैयार करने में लगभग छह महीने का समय लगा है। पारंपरिक कलमकारी शैली में बनाई गई यह पेंटिंग महाभारत के विभिन्न प्रसंगों को दर्शाती है, जिसमें धर्म, न्याय, साहस और नैतिक निर्णय जैसे शाश्वत मूल्यों का चित्रण किया गया है।
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पेटिंग में क्या खास? 
पेंटिंग का प्रमुख आकर्षण भगवद्गीता का वह संदेश है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को कर्तव्य, आत्मसंयम और आंतरिक शक्ति का मार्ग दिखाते हैं। यह कलाकृति केवल एक ऐतिहासिक महाकाव्य का चित्रण नहीं, बल्कि नैतिक नेतृत्व, शांति, ज्ञान और मानवीय गरिमा जैसे सार्वभौमिक मूल्यों का भी प्रतीक है, जो आज के समय में भी पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक हैं।
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पोचमपल्ली सिल्क स्टोल 
वहीं, राष्ट्रपति की पत्नी ब्रिजिट मैक्रों को प्रधानमंत्री मोदी ने तेलंगाना का पोचमपल्ली सिल्क स्टोल उपहार स्वरूप भेंट किया। यह हाथ से बुना गया रेशमी स्टोल पारंपरिक इकत रेजिस्ट-डाइंग तकनीक से तैयार किया जाता है और अपनी आकर्षक ज्यामितीय एवं पुष्पीय डिजाइनों, उत्कृष्ट शिल्पकला और सुरुचिपूर्ण बनावट के लिए प्रसिद्ध है।

भारतीय परंपरा और आधुनिक कलात्मकता का सुंदर संगम प्रस्तुत करने वाला यह स्टोल भारत की समृद्ध वस्त्र विरासत का प्रतीक माना जाता है। फैशन, कला और उत्कृष्ट हस्तशिल्प के प्रति फ्रांस की गहरी रुचि को देखते हुए यह उपहार दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत करने वाला माना जा रहा है। बता दें कि पीएम मोदी अपने दौरे के दौरान ग्लोबल लीडर्स को भारत की समृद्ध कला और परंपरा से जुड़ी वस्तुएं भेंट करते हैं, ताकि उन वस्तुओं को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल सके और भारत के ऐतिहासिक महत्व को अधिक से अधिक लोग जान सकें। 

जी 7 नेताओं को दिए यह गिफ्ट
राजस्थान के नागौर जिले में उगाई जाने वाली नागौरी अश्वगंधा अपनी उच्च गुणवत्ता और अधिक विथेनोलाइड मात्रा के लिए प्रसिद्ध है। शुष्क जलवायु और रेतीली मिट्टी में तैयार होने वाली इस औषधीय जड़ी-बूटी को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग भी प्राप्त है। आयुर्वेद में इसे ‘रसायन’ औषधि माना जाता है, जो शरीर की ऊर्जा, मानसिक क्षमता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ाने में सहायक मानी जाती है। यह उत्पाद ग्रामीण आजीविका को भी मजबूत करता है और पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक शोध से जोड़ने का प्रतीक है।

जम्मू-कश्मीर की चिनाब घाटी में तैयार होने वाली रंबन हनी अपनी प्राकृतिक गुणवत्ता और विशिष्ट स्वाद के लिए जानी जाती है। हिमालयी वनस्पतियों और जंगली फूलों के रस से तैयार इस शहद में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट, एंजाइम और कई जैव-सक्रिय तत्व पाए जाते हैं। स्थानीय मधुमक्खी पालकों द्वारा पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल तरीकों से तैयार की जाने वाली यह शहद क्षेत्र की जैव विविधता, सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन शैली का प्रतीक है।

वाराणसी में हाथों से बुना जाने वाला बनारसी सिल्क स्टोल भारतीय वस्त्र परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण है। महीन रेशम और जरी की बारीक कारीगरी से तैयार इस स्टोल पर प्रकृति से प्रेरित आकर्षक डिज़ाइन बनाए जाते हैं। जीआई टैग प्राप्त बनारसी सिल्क भारत की सबसे प्रतिष्ठित हस्तकरघा परंपराओं में से एक है। यह न केवल बुनकर समुदाय की आजीविका का आधार है, बल्कि भारतीय संस्कृति, शिल्प कौशल और सदियों पुरानी कलात्मक विरासत का भी प्रतीक है।

पीएम मोदी ने स्लोवाकिया के नेताओं को तोहफे में थेवा मोटिफ

पीएम मोदी ने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी को हाथ से बने थेवा मोटिफ कफलिंक, हिमरू सिल्क टाई और पॉकेट स्क्वायर और पीतल का डोकरा एंटीलोप सेट भेंट किया। हाथ से बने थेवा मोटिफ कफलिंक प्रतापगढ़ की पारंपरिक जेवर की कला को दिखाते हैं। इसे दुर्लभ थेवा तकनीक का इस्तेमाल करके बनाया जाता है। इनमें रंगीन कांच पर बारीक नक्काशी वाली सोने की शीट लगी होती हैं, जो प्रकृति और प्रतीकों से प्रेरित जटिल और सुंदर डिजाइन बनाती हैं। 

पीएम मोदी ने स्लोवाकिया के स्पीकर रिचर्ड रासी को सुश्रुत संहिता और चरक संहिता भेंट की। सुश्रुत संहिता एक बुनियादी पुराना आयुर्वेदिक ग्रंथ है जिसे डॉक्टर सुश्रुत ने लिखा था और इसे सर्जरी पर सबसे शुरुआती और सबसे जरूरी कामों में से एक माना जाता है। इसमें एडवांस्ड सर्जिकल तकनीक, इंस्ट्रूमेंट, एनाटॉमी और मेडिकल इलाज के बारे में बताया गया है, जिसमें राइनोप्लास्टी जैसे नए रिकंस्ट्रक्टिव प्रोसीजर भी शामिल हैं। पीएम मोदी ने रासी को 'ठेकुआ' भी भेंट किया। 


हिमरू सिल्क टाई और पॉकेट स्क्वायर सेट औरंगाबाद की पारंपरिक बुनाई की कला को दिखाता है। सिल्क-कॉटन के मिश्रण से बना, हिमरू अपनी रिवर्सिबल बुनाई, मुलायम टेक्सचर और हल्की चमक के लिए जाना जाता है, जिसमें कपड़े में सीधे बुने हुए बारीक फूलों और पैजली पैटर्न होते हैं। डेक्कन दरबार के संरक्षण में शुरू हुआ, यह एक बेहतरीन लग्जरी कपड़ा बन गया जिसे इसकी सुंदरता और टिकाऊपन के लिए महत्व दिया जाता है। जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग से पहचानी गई और छत्रपति संभाजीनगर जिले के लिए ओडीओपी पहल में शामिल, हिमरू बुनाई एक जरूरी संस्कृति और आर्थिक विरासत का काम है।

पीतल का डोकरा एंटीलोप सेट हाथ से बनी एक कलाकृति है जो भारत की पुरानी डोकरा मेटल-कास्टिंग परंपरा को दिखाती है, जिसे छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के आदिवासी कारीगर सदियों से करते आ रहे हैं। पारंपरिक लॉस्ट-वैक्स कास्टिंग तकनीक का इस्तेमाल करके बनाया गया, हर पीस अनोखा है और प्रकृति, लोककथाओं और ग्रामीण जीवन की थीम को दिखाता है।


हिरण की मूर्तियां कोमलता, फुर्ती और प्रकृति के साथ तालमेल की निशानी हैं, जो स्लोवाकिया के टाट्रा चामोइस से एक सांस्कृति कनेक्शन बनाती हैं। दोनों जानवर मजबूती और अपने प्राकृतिक माहौल के साथ गहरे संबंध को दिखाते हैं।


पीएम मोदी ने स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको को कश्मीरी सिल्क कारपेट भेंट किया। कश्मीरी सिल्क कारपेट कश्मीर घाटी, खासकर श्रीनगर इलाके का एक मशहूर हाथ से बुना हुआ क्राफ्ट है। उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक सिल्क से बना, यह अपने बारीक फूलों, पैस्ले, बेल और मेडलियन डिजाइन के लिए जाना जाता है। यह स्थानीय कलात्मक परंपराओं और प्राकृतिक सुंदरता से प्रेरित है।

 

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