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Explainer: क्या फिर खतरे में US-ईरान की डील, क्यों शांति वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड नहीं जा रहे जेडी वेंस?
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Fri, 19 Jun 2026 06:09 PM IST
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सार
लेबनान में इस्राइली सेना की कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में तनाव फिर से भड़कने की आशंका है। दरअसल, 111 दिनों के संघर्ष के बाद ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर समझौता हुआ। इस समझौते में एक शर्त यह रखी गई थी कि इस्राइल आगे लेबनान को निशाना नहीं बनाएगा। हालांकि, इस समझौते को मानने से इस्राइल ने इनकार कर दिया। इस्राइली सेना ने शुक्रवार को रात भर दक्षिणी लेबनान में कई ठिकानों पर हमले किए।
इस्राइल के लेबनान पर हमले से अमेरिका नाखुश।
- फोटो : अमर उजाला/AI
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विस्तार
अमेरिका और ईरान के बीच करीब साढ़े तीन महीने तक चले युद्ध का आखिरकार अंत हो चुका है। दोनों देशों ने एक अंतरिम समझौते के तहत युद्ध विराम तय किया है। हालांकि, एक बार फिर इस संघर्ष विराम पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। दरअसल, शुक्रवार (19 जून) को अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में शांति समझौते की शर्तों को लागू करने के लिए वार्ता तय थी। लेकिन इसके लिए अमेरिका के प्रतिनिधि के तौर पर जाने वाले जेडी वेंस ने आखिरी समय पर अपनी यात्रा टाल दी। इसके पीछे अब तक अमेरिका की तरफ से कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई गई है। इसके बावजूद जानकार इसके पीछे इस्राइल और ईरान की शर्तों को एक बड़ा कारण मान रहे हैं।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में जो अहम वार्ता होनी थी उसे लेकर पहले क्या तय हुआ था? अब इस बैठक में क्या अड़चन आई हैं? क्यों अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विट्जरलैंड नहीं जा रहे? इस्राइल से अमेरिका की नाराजगी अचानक क्यों बढ़ गई है? आइये जानते हैं...
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में जो अहम वार्ता होनी थी उसे लेकर पहले क्या तय हुआ था? अब इस बैठक में क्या अड़चन आई हैं? क्यों अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विट्जरलैंड नहीं जा रहे? इस्राइल से अमेरिका की नाराजगी अचानक क्यों बढ़ गई है? आइये जानते हैं...
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अमेरिका-ईरान की वार्ता के लिए क्या तय हुआ था?
कहां तय हुई थी अमेरिका-ईरान के अधिकारियों की बैठक?अमेरिका और ईरान के अधिकारियों की बैठक मध्य स्विट्जरलैंड में ल्यूसर्न झील के पास स्थित एक पहाड़ी लग्जरी रिजॉर्ट- बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में आयोजित की जानी थी। यह रिजॉर्ट स्टैनस्टैड में स्थित है और इसका स्वामित्व कतारा हॉस्पिटैलिटी के पास है, जो कतर के सॉवरेन वेल्थ फंड का हिस्सा है। गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान के युद्ध को खत्म करने में कतर ने भी मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।
ऐतिहासिक अहमियत: बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट पहले भी उच्च-स्तरीय कूटनीतिक वार्ताओं का केंद्र रहा है। इसी रिजॉर्ट में 2024 में यूक्रेन शांति शिखर सम्मेलन और 2002 में सूडान शांति समझौता भी हुआ था। एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित होने के कारण यह जगह बेहतरीन सुरक्षा और एकांत प्रदान करती है।
वार्ता की मौजूदा स्थिति: हालांकि यह बैठक शुक्रवार को होनी तय थी, लेकिन रसद चुनौतियों और क्षेत्रीय तनाव के कारण अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपनी यात्रा टाल दी और यह बैठक स्थगित कर दी गई है।
स्विट्जरलैंड में वार्ता में कौन-कौन होने वाला था शामिल?
स्विट्जरलैंड में होने वाली इस वार्ता में मुख्य रूप से अमेरिका, ईरान और मध्यस्थता करने वाले देशों के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधियों के शामिल होने की योजना थी।
क्यों इस बैठक में नहीं पहुंच रहा कोई भी नेता?
बुधवार तक इस बैठक के स्विट्जरलैंड में होने की बात लगभग तय मानी जा रही थी। हालांकि, गुरुवार को अलग-अलग देशों के नेताओं ने बैठक के लिए जाने से इनकार कर दिया। इसकी मुख्यतः चार वजहें रहीं, जिनमें से एक वजह इस्राइल भी है।1. समझौते पर पहले ही हो चुके हैं हस्ताक्षर
अमेरिका और ईरान के राष्ट्रपतियों (डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेजेशकियन) ने इस शांति समझौते पर पहले ही अलग-अलग हस्ताक्षर कर दिए हैं। नतीजतन ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक नए औपचारिक हस्ताक्षर समारोह को पूरी तरह से गैरजरूरी करार दिया।
2. लेबनान में इजरायल के हमले और ईरान का रुख
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए जो समझौता हुआ है, उसकी एक शर्त यह भी है कि इस्राइल आगे लेबनान पर हमले नहीं करेगा। हालांकि, इस्राइल ने इस शर्त को तोड़ते हुए गुरुवार देर रात से लेकर शुक्रवार तक लेबनान पर ताबड़तोड़ हमले किए। इसमें 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इन सैन्य हमलों को लेकर ईरान ने स्विट्जरलैंड में अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने पर पुनर्विचार करना शुरू कर दिया। ईरान का कहना है कि उसके प्रतिनिधिमंडल के जिनेवा जाने से पहले ही इसकी शर्तें टूटी हैं और वह अब यह देखना चाहता है कि अमेरिका इस समझौते को कैसे लागू करता है।
दूसरी तरफ बेरूत में हिजबुल्ला के ठिकानों पर इस्राइली हमलों की आलोचना करते हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने भी नागरिक हताहतों का मुद्दा उठाया। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाइयां चल रहे कूटनीतिक प्रयासों को कमजोर कर सकती हैं। इस्राइल को आत्मरक्षा के अधिकार के साथ-साथ शांति प्रक्रिया का भी सम्मान करना चाहिए।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए जो समझौता हुआ है, उसकी एक शर्त यह भी है कि इस्राइल आगे लेबनान पर हमले नहीं करेगा। हालांकि, इस्राइल ने इस शर्त को तोड़ते हुए गुरुवार देर रात से लेकर शुक्रवार तक लेबनान पर ताबड़तोड़ हमले किए। इसमें 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इन सैन्य हमलों को लेकर ईरान ने स्विट्जरलैंड में अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने पर पुनर्विचार करना शुरू कर दिया। ईरान का कहना है कि उसके प्रतिनिधिमंडल के जिनेवा जाने से पहले ही इसकी शर्तें टूटी हैं और वह अब यह देखना चाहता है कि अमेरिका इस समझौते को कैसे लागू करता है।
दूसरी तरफ बेरूत में हिजबुल्ला के ठिकानों पर इस्राइली हमलों की आलोचना करते हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने भी नागरिक हताहतों का मुद्दा उठाया। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाइयां चल रहे कूटनीतिक प्रयासों को कमजोर कर सकती हैं। इस्राइल को आत्मरक्षा के अधिकार के साथ-साथ शांति प्रक्रिया का भी सम्मान करना चाहिए।
3. लॉजिस्टिक की चुनौतियां
व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि जेडी वेंस की निर्धारित यात्रा इसलिए टाल दी गई, क्योंकि इन वार्ताओं की तैयारियों में रसद संबंधी कई व्यावहारिक जटिलताएं आ रही थीं। अमेरिकी प्रशासन के प्रवक्ता के अनुसार, इन वार्ताओं का प्रबंधन कभी भी आसान या अनुमान लगाने योग्य नहीं रहा है।
दूसरी तरफ सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते का अमेरिका में ही काफी विरोध हो रहा है। डेमोक्रेटिक पार्टी से लेकर रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों तक ने इस समझौते को ईरान के लिए बड़ी छूट करार दिया है। यहां तक कि ट्रंप के करीबी नेताओं ने भी इस डील को अमेरिकी हितों के खिलाफ बताया है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जगह उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को सीधे तौर पर इसके लिए जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि वेंस ईरान से आगे की बातचीत और अगले किसी भी समझौते पर पहुंचने से पहले जल्दबाजी से बच रहे हैं और एहतियात बरत रहे हैं। इसी के चलते उन्होंने आगे की बैठक को टालने का फैसला किया।
ये भी पढ़ें: West Asia LIVE: खतरे में अमेरिका-ईरान शांति समझौता; लेबनान पर इस्राइल ने बरसाए बम, तेहरान ने बातचीत रोकी
व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि जेडी वेंस की निर्धारित यात्रा इसलिए टाल दी गई, क्योंकि इन वार्ताओं की तैयारियों में रसद संबंधी कई व्यावहारिक जटिलताएं आ रही थीं। अमेरिकी प्रशासन के प्रवक्ता के अनुसार, इन वार्ताओं का प्रबंधन कभी भी आसान या अनुमान लगाने योग्य नहीं रहा है।
दूसरी तरफ सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते का अमेरिका में ही काफी विरोध हो रहा है। डेमोक्रेटिक पार्टी से लेकर रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों तक ने इस समझौते को ईरान के लिए बड़ी छूट करार दिया है। यहां तक कि ट्रंप के करीबी नेताओं ने भी इस डील को अमेरिकी हितों के खिलाफ बताया है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जगह उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को सीधे तौर पर इसके लिए जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि वेंस ईरान से आगे की बातचीत और अगले किसी भी समझौते पर पहुंचने से पहले जल्दबाजी से बच रहे हैं और एहतियात बरत रहे हैं। इसी के चलते उन्होंने आगे की बैठक को टालने का फैसला किया।
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कैसे इस्राइल बना वार्ता टलने की सबसे बड़ी वजह?
अल-जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे पहले ईरान ने स्विट्जरलैंड में अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने के समय पर पुनर्विचार किया। इसका मुख्य कारण लेबनान में इस्राइल का चल रहा सैन्य अभियान है। इस्राइल ने वार्ता से ठीक पहले दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्ला के ठिकानों पर नए हमलों की घोषणा की थी। वह भी तब, जब अमेरिका ने ईरान से अपने समझौते में इस्राइल को एक पक्षकार भी बना लिया था। वह भी बिना उसे बातचीत में शामिल किए।हालांकि, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और कट्टरपंथी मंत्रियों ने स्पष्ट किया है कि वे इस अमेरिकी समझौते से बंधे नहीं हैं। इसके उलट इस्राइल ने एक नया नक्शा जारी किया, जिसमें वह दक्षिणी लेबनान के एक बड़े सुरक्षा क्षेत्र में अपना सैन्य नियंत्रण बनाए रखना चाहता है। अगले ही दिन इस्राइल ने फिर लेबनान पर हमला बोल दिया। ऐसे में सैन्य कार्रवाइयों को रोकने से इस्राइल के इनकार की वजह से व्हाइट हाउस में भी इस्राइल के प्रति भारी गुस्सा है, क्योंकि इन हमलों से नए अमेरिका-ईरान युद्धविराम के टूटने का भारी खतरा पैदा हो गया है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बेरूत (लेबनान) में हिजबुल्ला के ठिकानों पर इस्राइली हमलों की आलोचना करते हुए सख्त चेतावनी दी थी कि इस तरह की कार्रवाई चल रहे कूटनीतिक शांति प्रयासों को कमजोर कर सकती हैं। ईरान ने भी यह स्पष्ट किया था कि वार्ता के लिए उसकी प्रमुख मांगों में से एक यह है कि इस्राइल लेबनान पर अपने हमले तुरंत रोके।
इस्राइल को लेकर क्या बोले हैं जेडी वेंस
लेबनान में इस्राइल के हमलों को लेकर अमेरिका में नाराजगी बढ़ी है। खुद उपराष्ट्रपति वेंस ने अपने स्विट्जरलैंड दौरे को रद्द करने से पहले इस्राइल को संदेश देते हुए कहा, आप सिर्फ जान लेकर सुरक्षा हासिल नहीं कर सकते। उन्होंने इस्राइल को सीधी चेतावनी दी कि केवल सैन्य बल ही सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता। उन्होंने कहा कि 90 लाख की आबादी वाला देश अपनी हर एक राष्ट्रीय सुरक्षा समस्या का समाधान केवल लोगों की हत्या करके नहीं निकाल सकता।
वेंस ने इस्राइली नेताओं को याद दिलाया कि अमेरिकी सैन्य और कूटनीतिक समर्थन पर बहुत अधिक निर्भर है। उसे इस समर्थन को हल्के में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा में मदद करने वाले लगभग दो-तिहाई हथियार अमेरिका निर्मित हैं और अमेरिकी करदाताओं के पैसे से आते हैं। वेंस ने इस्राइली नेताओं से कहा कि उन्हें जागने और देश की वास्तविकता को समझने की जरूरत है और अमेरिका के राष्ट्रपति उनके लिए समस्या नहीं हैं।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने इस्राइल के धुर-दक्षिणपंथी मंत्रियों (इतामार बेन-ग्विर और बेजेलेल स्मोट्रिच) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना करने पर वेंस ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि डोनाल्ड ट्रंप पूरी दुनिया में एकमात्र ऐसे राष्ट्राध्यक्ष हैं, जो इस समय इस्राइल के प्रति सहानुभूति रखते हैं, इसलिए इस्राइली सरकार को पूरी दुनिया में बचे अपने एकमात्र शक्तिशाली सहयोगी पर हमला करने से बचना चाहिए।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने इस्राइल के धुर-दक्षिणपंथी मंत्रियों (इतामार बेन-ग्विर और बेजेलेल स्मोट्रिच) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना करने पर वेंस ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि डोनाल्ड ट्रंप पूरी दुनिया में एकमात्र ऐसे राष्ट्राध्यक्ष हैं, जो इस समय इस्राइल के प्रति सहानुभूति रखते हैं, इसलिए इस्राइली सरकार को पूरी दुनिया में बचे अपने एकमात्र शक्तिशाली सहयोगी पर हमला करने से बचना चाहिए।