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पीओके से पहलगाम तक: संयुक्त राष्ट्र में भारत ने ओआईसी को घेरा, बोला- पीड़ित और गुनहगार में फर्क करना सीखिए

Wed, 07 Oct 2026 10:32 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Wed, 07 Oct 2026 10:32 AM IST
सार

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में ओआईसी के जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान में आतंकी ढांचे के खिलाफ भारतीय कार्रवाई से जुड़े बयान पर कड़ा पलटवार किया है। भारत ने कहा कि ओआईसी पीड़ित और गुनहगार के बीच अंतर नहीं कर पा रहा है। पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद, पहलगाम हमले और PoK के हालात का जिक्र करते हुए भारत ने कहा कि भारत को अपने नागरिकों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। 

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PoK to Pahalgam India corners OIC at UN says learn to distinguish between victim and perpetrator
बिप्लब कुमार देब - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत ने जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान में आतंकी ढांचे के खिलाफ दिल्ली की कार्रवाई पर इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की टिप्पणियों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि संगठन 'पीड़ित और गुनहगार के बीच फर्क करने में असमर्थ' नजर आता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में भारत की ओर से लोकसभा सांसद बिप्लब कुमार देब ने कहा कि पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ अपने लोगों की रक्षा करना भारत का अधिकार है और आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों को इसके परिणाम भुगतने होंगे।

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OIC के बयान पर भारत ने जताई कड़ी आपत्ति
पश्चिम त्रिपुरा से सांसद बिप्लब कुमार देब ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में ‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को खत्म करने के उपायों’ पर भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य दिया। 15 सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल संयुक्त राष्ट्र के परिचयात्मक दौरे के लिए यहां पहुंचा है। इस दौरान सभी सांसद संयुक्त राष्ट्र में अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।
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‘तथ्य और कल्पना में फर्क नहीं कर पा रहे’
देब ने OIC के अध्यक्ष की ओर से दिए गए बयान का जवाब देते हुए कहा कि भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकी ढांचे के खिलाफ बेहद लक्षित और संतुलित कार्रवाई की थी। उन्होंने कहा कि इन्हीं इलाकों से भारत के खिलाफ आतंकी हमलों की योजना बनाई और उन्हें अंजाम देने के निर्देश दिए जाते रहे हैं। देब ने कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बयान देने वाले लोग तथ्य और कल्पना को अलग नहीं कर पा रहे हैं और पीड़ित तथा गुनहगार के बीच फर्क करने में असमर्थ हैं।' 
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'सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का हक'
देब ने साफ कहा कि पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद से अपने नागरिकों की रक्षा करना भारत का अधिकार है। उन्होंने चेतावनी दी कि आतंकवाद में शामिल होने या उसे बढ़ावा देने वालों को इसके परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश का OIC की ओर से किया गया “अनुचित उल्लेख” भी खारिज कर दिया।

‘पाकिस्तान के अवैध कब्जे पर ध्यान दे OIC’
भारत ने OIC को सलाह देते हुए कहा कि उसे जम्मू-कश्मीर का जिक्र करने के बजाय पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले इलाकों पर ध्यान देना चाहिए। देब ने खास तौर पर रावलाकोट का जिक्र करते हुए कहा कि वहां लोगों की हत्याएं, हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने की घटनाएं साफ दिखाई देती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की जानबूझकर की गई अनदेखी सिर्फ कट्टरता और असहिष्णुता को दर्शाती है।

PoK में महीनों से चल रहे हैं विरोध प्रदर्शन
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले कई महीनों से 12 विवादित शरणार्थी सीटों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई की गई है। हाल ही में हुए तथाकथित विधानसभा चुनावों में भी धांधली के आरोप सामने आए हैं।

सऊदी अरब ने UN में OIC की ओर से रखा बयान
संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में OIC की ओर से सऊदी अरब ने बयान दिया। यह समिति मुख्य रूप से कानूनी मामलों से जुड़ी है। OIC ने अपने बयान में “दक्षिण-पूर्व एशिया में सैन्य तनाव” और पाकिस्तान में “कई स्थानों पर किए गए अनुचित हमलों” का जिक्र किया था। हालांकि, इस बयान में भारत का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया था।

ऑपरेशन सिंदूर का भी आया जिक्र
भारत ने पिछले साल अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में मई में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकी ढांचे को निशाना बनाया गया था। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले में 26 नागरिकों, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे, की मौत हुई थी।

भारत ने पहलगाम हमले को बताया सोची-समझी साजिश
भारत ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमला उसकी संप्रभुता पर सोचा-समझा हमला था। देब ने कहा कि इस हमले की योजना और उसे अंजाम देने में ऐसे नेटवर्क शामिल थे, जिन्हें भारत के पश्चिमी पड़ोसी से लगातार राज्य का संरक्षण, सुरक्षित ठिकाने और आर्थिक एवं लॉजिस्टिक मदद मिलती रही है। हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट ने ली थी, जिसे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का प्रॉक्सी माना जाता है।

'आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा'
देब ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि आतंकवाद के हर रूप और हर तरीके के खिलाफ लड़ाई जरूरी है। उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद समेत आतंकवाद आज मानवता के सामने सबसे गंभीर खतरों में से एक है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक विकास, लोकतांत्रिक व्यवस्था और मानवाधिकारों पर भी पड़ता है।

‘आतंकवाद सीधे इंसान के जीने के अधिकार पर हमला’
देब ने कहा कि आतंकवाद हर इंसान के सबसे बुनियादी अधिकार यानी जीवन के अधिकार पर हमला करता है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद संयुक्त राष्ट्र के मूल्यों के पूरी तरह खिलाफ है और किसी भी स्थिति में आम नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाने को सही नहीं ठहराया जा सकता। भारत का स्पष्ट रुख है कि आतंकवाद अच्छा या बुरा नहीं होता, बल्कि हर तरह का आतंकवाद एक समान है।

मोदी के बयान का हवाला देकर भारत ने रखी अपनी नीति
देब ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें कहा गया है कि भारत के लिए एक भी आतंकी हमला बहुत ज्यादा है और एक भी जान का जाना बहुत ज्यादा है। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवादी हमलों को सिर्फ किसी एक देश या समुदाय पर हमला नहीं मानता, बल्कि इन्हें पूरी मानवता पर हमला मानता है।

तकनीक का इस्तेमाल कर रहे आतंकी संगठन
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में आतंकवादी संगठनों के बदलते तौर-तरीकों पर भी चिंता जताई। देब ने कहा कि आतंकी संगठन भर्ती, कट्टरपंथ फैलाने, प्रचार, हमलों की योजना बनाने और आतंकवाद के लिए पैसा जुटाने में तेजी से नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक की गुमनामी, उसकी वैश्विक पहुंच और तेज गति का फायदा उठाकर आतंकी संगठन कानून लागू करने वाली एजेंसियों से बचने और खासकर कमजोर युवाओं को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

CCIT पर भारत ने फिर उठाई आवाज
भारत ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से निपटने के वैश्विक प्रयासों में एक बड़ी कमी की ओर भी ध्यान दिलाया। देब ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक समझौता यानी Comprehensive Convention on International Terrorism (CCIT) अब तक नहीं बन पाया है, जबकि भारत ने इसका मसौदा 1996 में ही पेश कर दिया था। उन्होंने कहा कि CCIT को जल्द अंतिम रूप दिए जाने से आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था और मजबूत होगी।


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BRICS में भी पहलगाम हमले की निंदा
देब ने संयुक्त राष्ट्र समिति को बताया कि पिछले महीने हुए BRICS नेताओं के शिखर सम्मेलन में अपनाई गई नई दिल्ली घोषणा में पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई थी। घोषणा में आतंकवाद के किसी भी रूप को आपराधिक और पूरी तरह अनुचित बताया गया है। भारत ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया स्पष्ट और बिना किसी दोहरे मापदंड के होनी चाहिए।

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