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‘आप विष्णु के अवतार': प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ में भूटान के पीएम ने लिखी भावुक चिट्ठी, क्यों बताया बड़ा भाई?

Wed, 07 Oct 2026 01:28 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Wed, 07 Oct 2026 01:28 PM IST
सार

भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने पीएम नरेंद्र मोदी को अपना बड़ा भाई बताते हुए उनके 25 साल के जनसेवा सफर की सराहना की। उन्होंने मोदी को ‘विष्णु का अवतार’ बताते हुए उनके नेतृत्व, विकास कार्यों और भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के विजन की प्रशंसा की।

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Bhutan's PM writes an emotional letter praising PM Modi why did he call him avatar of Vishnu
शेरिंग तोबगे, प्रधानमंत्री, भूटान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'भगवान विष्णु का अवतार' बताया है। उनके व्यक्तित्व से बेहद प्रभावित होकर, तोबगे ने उन्हें 25 साल की जनसेवा के लिए बधाई देते हुए एक भावुक पोस्ट लिखा। इस पोस्ट में उन्होंने यह भी बताया कि वे पीएम मोदी को अपना बड़ा भाई क्यों मानते हैं?

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पीएम मोदी को बड़ा भाई क्यों मानते हैं भूटान के प्रधानमंत्री? 
टोगबे कुछ साल पहले की यादें ताजा करते हैं। यह चिट्ठी उनकी मुलाकात की तारीख और खास पलों का जिक्र करती है। पीएम मोदी को 'आज के समय का एक अवतार' बताते हुए वे लिखते हैं, '27 जुलाई 2019 को मैं दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला। मेरी पार्टी दस महीने पहले भूटान का चुनाव हार गई थी। संसद में उसका कोई प्रतिनिधित्व नहीं था।
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मैं न तो प्रधानमंत्री था और न ही सांसद।  मैं एक आम नागरिक के तौर पर पीएम मोदी से मिला। मैंने अपने कार्यकाल के दौरान उनके सहयोग के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। मैंने उनसे कहा कि वे हमेशा मेरे बड़े भाई रहेंगे सिर्फ इसलिए नहीं कि वे उम्र में बड़े हैं, बल्कि इसलिए भी क्योंकि उन्होंने मुझे वही स्नेह दिया जो एक बड़ा भाई अपने छोटे भाई को देता है।'
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'पीएम मोदी को विष्णु का अवतार मानना सही'
उन्होंने आगे अपनी भावनाओं के बारे में लिखा। उन्होंने कहा, 'फिर मैंने उनसे एक और बात कही। मैं उन्हें विष्णु का अवतार मानता था। मैंने समझाया कि हमारे इलाके में समझदार शासकों को लंबे समय से ऐसा ही माना जाता रहा है। मेरे अपने ही शब्दों ने मुझे हैरान कर दिया। बाद में, मैंने सोचा कि मैंने ऐसा क्यों कहा। क्या मैं भावनाओं में बह गया था? क्या मैं गलत था? बाद में, जब मैंने अपनी कही बातों पर विचार किया, तो जवाब साफ हो गया। पीएम मोदी को विष्णु का अवतार मानना सही था।'

प्रधानमंत्री मोदी की काम को लेकर क्या कहा? 
प्रधानमंत्री मोदी की लीडरशिप स्किल्स की तारीफ करते हुए तोग्बे आगे लिखते हैं, 'मैंने उन्हें लगभग 13 साल तक गुजरात का कामकाज संभालते देखा, जब राज्य विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और काम को पूरा करने के मामले में देश के लिए एक रोल मॉडल बन गया। फिर मैंने उन्हें उसी विजन को पूरे देश के स्तर पर ले जाते देखा। मैन्युफैक्चरिंग, विदेशी निवेश, फाइनेंशियल इन्क्लूजन, साफ-सफाई, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर -और इन सबके पीछे सेवा और काम को पूरा करने पर लगातार जोर था।'

भारत पर क्यों गर्व करने लगे? 
उन्होंने आगे कहा, 'मैंने उस जनसेवक को भी देखा। अनुशासित, ऊर्जावान और असाधारण रूप से मेहनती। जिसने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया। वह था देश और लोगों की सेवा के प्रति उनका अटूट समर्पण। लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने भारतीयों में खुद पर और अपने देश पर मजबूत विश्वास जगाया। वे भारत पर अधिक गर्व करने लगे, इसकी क्षमता के बारे में अधिक महत्वाकांक्षी हो गए और दुनिया में इसकी जगह के बारे में अधिक आश्वस्त हो गए। मेरे लिए, ये एक बुद्धिमान शासक के गुण थे।'

भूटान के प्रधानमंत्री ने पत्र में बौद्ध परंपरा का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा, 'भूटान की बौद्ध परंपरा में हम 'रिगसुम गोनपो' का सम्मान करते हैं, जो बोधिसत्वों की एक त्रिमूर्ति है और सभी जीवों की मुक्ति के लिए समर्पित है। 

2047 विजन को लेकर कही यह बात
इसके बाद तोग्बे ने 'विकसित भारत' के विजन और 2047 के बारे में बात की। वे आगे लिखते हैं, 'आज, मुझे ये गुण पीएम मोदी के 'विकसित भारत' के विजन में सबसे साफ तौर पर दिखाई देते हैं। समझदारी की शुरुआत बेहतर भविष्य के साफ विजन से होती है। उन्होंने भारत को ठीक ऐसा ही विजन दिया है। आजादी के ठीक सौ साल बाद, यानी 2047 तक एक विकसित देश बनना। 'विकसित भारत' के जरिए उन्होंने इस विजन को एक नाम, एक समय-सीमा और एक राष्ट्रीय मिशन दिया है।'

इस चिट्ठी में "सबका साथ, सबका विकास" के विचार पर जोर दिया गया है।  टोग्बे ने बदलाव के लिए पीएम मोदी के साहस, कामकाज के तरीके और फैसले लेने की क्षमता को जरूरी बताया। उनके अनुसार, "विकसित भारत" का संबंध किसी एक नेता या चुनाव चक्र से नहीं है। यह मौजूदा और आने वाली पीढ़ियों से जुड़ा है।


अपनी बात खत्म करते हुए टोग्बे कहते हैं, 'निस्संदेह, यह उनकी सबसे अहम उपलब्धियों में से एक है। उन्होंने न सिर्फ भारत को एक मंजिल दिखाई है, बल्कि भारतीयों को उस विजन पर भरोसा करने और उसे हासिल करने की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित भी किया है।'

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