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फ्रांस में नर्सरी स्कूल कांड पर बवाल: पेरिस में दुर्लभ सार्वजनिक ट्रायल शुरू, परिजन बोले- अब देश को जागना होगा
Wed, 27 May 2026 04:20 AM IST
Pavan
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
Published by: Pavan
Updated Wed, 27 May 2026 04:20 AM IST
सार
हाल के महीनों में पेरिस और फ्रांस के कई हिस्सों से ऐसे मामलों के सामने आने के बाद चिंता और बढ़ गई है। पेरिस की मुख्य अभियोजक लॉरे बेकुआ ने पिछले हफ्ते बताया था कि राजधानी में 84 नर्सरी स्कूल, करीब 20 प्राथमिक स्कूल और 10 डे-केयर केंद्रों से जुड़े मामलों की जांच चल रही है।
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पेरिस में नाबालिगों के मामले में सार्वजनिक ट्रायल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
फ्रांस की राजधानी पेरिस में बच्चों के साथ कथित यौन शोषण के एक बेहद संवेदनशील मामले की सार्वजनिक सुनवाई मंगलवार से शुरू हो गई। इस मामले में एक स्कूल सहायक पर छोटे बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न करने के आरोप हैं। आमतौर पर फ्रांस में नाबालिगों से जुड़े मामलों की सुनवाई बंद कमरे में होती है, लेकिन इस बार पीड़ित बच्चों के माता-पिता ने खुद सार्वजनिक ट्रायल की मांग की है ताकि पूरे देश में बाल सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ सके।
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अप्रैल 2025 में सामने आया था मामला
यह मामला अप्रैल 2025 में सामने आया था, जब कुछ छोटे बच्चों ने अपने माता-पिता को बताया कि उनके साथ एक नर्सरी स्कूल में गलत हरकतें की गईं। इसके बाद जांच शुरू हुई और 36 वर्षीय स्कूल सहायक पर आरोप लगाए गए। आरोपी की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। उस पर आरोप है कि उसने अगस्त 2024 से अप्रैल 2025 के बीच स्कूल के बाथरूम, लंच ब्रेक और आफ्टर-स्कूल केयर के दौरान बच्चों के साथ यौन शोषण किया। उस समय बच्चों की उम्र सिर्फ 3 से 5 साल के बीच थी। आरोपी ने सभी आरोपों से इनकार किया है।
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अदालत में नहीं पेश किए जाएंगे पीड़ित बच्चे
मामले में बच्चों को अदालत में पेश नहीं किया जाएगा। जांच के दौरान बच्चों ने जो बयान दिए थे, उन्हें जज अदालत में पढ़कर सुनाएंगे। आरोपी पर दो महिला सहकर्मियों के साथ यौन उत्पीड़न और एक के साथ यौन हमला करने के आरोप भी हैं। दोषी साबित होने पर उसे 10 साल तक की जेल हो सकती है। इस मामले को लेकर फ्रांस में बच्चों की सुरक्षा पर नई बहस शुरू हो गई है। पीड़ित परिवारों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि लंबे समय तक बच्चों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। आरोप है कि एक मां ने कई महीने पहले स्कूल प्रशासन को चेतावनी दी थी, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया।
माता-पिता बोले- देश को जागने की जरूरत है
माता-पिता के संगठन मीटू इकोले की सह-संस्थापक बरका जरुआली ने अदालत के बाहर प्रदर्शन के दौरान कहा कि अब पूरे देश को जागने की जरूरत है। प्रदर्शनकारियों ने 'कोई भी बच्चा स्कूल जाने से डरे नहीं' लिखे बैनर भी उठाए। पीड़ित परिवारों की वकील रेबेका रॉयर ने कहा कि वे चाहते हैं कि यह मामला बच्चों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो। उन्होंने सरकार और स्थानीय प्रशासन से स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की।
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'बच्चों के खिलाफ अपराध को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता'
पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगॉयर ने कहा कि 2026 की शुरुआत से अब तक 78 स्कूल और आफ्टर-स्कूल कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है, जिनमें 31 पर यौन हिंसा के आरोप हैं। मेयर ग्रेगॉयर ने बच्चों के खिलाफ अपराध को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया है। उन्होंने स्कूल निगरानी व्यवस्था में सुधार के लिए 2 करोड़ यूरो की योजना का ऐलान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों के शोषण के शक में आने वाले किसी भी कर्मचारी को तुरंत निलंबित किया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि मेयर ग्रेगॉयर ने चुनाव से पहले खुद खुलासा किया था कि बचपन में उनके साथ भी स्कूल के दौरान यौन शोषण हुआ था। इसी वजह से यह मुद्दा पेरिस की मेयर चुनाव मुहिम में भी बड़ा राजनीतिक विषय बन गया था।
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अप्रैल 2025 में सामने आया था मामला
यह मामला अप्रैल 2025 में सामने आया था, जब कुछ छोटे बच्चों ने अपने माता-पिता को बताया कि उनके साथ एक नर्सरी स्कूल में गलत हरकतें की गईं। इसके बाद जांच शुरू हुई और 36 वर्षीय स्कूल सहायक पर आरोप लगाए गए। आरोपी की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। उस पर आरोप है कि उसने अगस्त 2024 से अप्रैल 2025 के बीच स्कूल के बाथरूम, लंच ब्रेक और आफ्टर-स्कूल केयर के दौरान बच्चों के साथ यौन शोषण किया। उस समय बच्चों की उम्र सिर्फ 3 से 5 साल के बीच थी। आरोपी ने सभी आरोपों से इनकार किया है।
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अदालत में नहीं पेश किए जाएंगे पीड़ित बच्चे
मामले में बच्चों को अदालत में पेश नहीं किया जाएगा। जांच के दौरान बच्चों ने जो बयान दिए थे, उन्हें जज अदालत में पढ़कर सुनाएंगे। आरोपी पर दो महिला सहकर्मियों के साथ यौन उत्पीड़न और एक के साथ यौन हमला करने के आरोप भी हैं। दोषी साबित होने पर उसे 10 साल तक की जेल हो सकती है। इस मामले को लेकर फ्रांस में बच्चों की सुरक्षा पर नई बहस शुरू हो गई है। पीड़ित परिवारों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि लंबे समय तक बच्चों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। आरोप है कि एक मां ने कई महीने पहले स्कूल प्रशासन को चेतावनी दी थी, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया।
माता-पिता बोले- देश को जागने की जरूरत है
माता-पिता के संगठन मीटू इकोले की सह-संस्थापक बरका जरुआली ने अदालत के बाहर प्रदर्शन के दौरान कहा कि अब पूरे देश को जागने की जरूरत है। प्रदर्शनकारियों ने 'कोई भी बच्चा स्कूल जाने से डरे नहीं' लिखे बैनर भी उठाए। पीड़ित परिवारों की वकील रेबेका रॉयर ने कहा कि वे चाहते हैं कि यह मामला बच्चों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो। उन्होंने सरकार और स्थानीय प्रशासन से स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की।
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'बच्चों के खिलाफ अपराध को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता'
पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगॉयर ने कहा कि 2026 की शुरुआत से अब तक 78 स्कूल और आफ्टर-स्कूल कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है, जिनमें 31 पर यौन हिंसा के आरोप हैं। मेयर ग्रेगॉयर ने बच्चों के खिलाफ अपराध को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया है। उन्होंने स्कूल निगरानी व्यवस्था में सुधार के लिए 2 करोड़ यूरो की योजना का ऐलान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों के शोषण के शक में आने वाले किसी भी कर्मचारी को तुरंत निलंबित किया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि मेयर ग्रेगॉयर ने चुनाव से पहले खुद खुलासा किया था कि बचपन में उनके साथ भी स्कूल के दौरान यौन शोषण हुआ था। इसी वजह से यह मुद्दा पेरिस की मेयर चुनाव मुहिम में भी बड़ा राजनीतिक विषय बन गया था।