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Red Sea: समुद्री व्यापार को हूती विद्रोहियों से बचाने की कवायद; मालवाहक जहाजों को एस्कॉर्ट करेगी चीनी नौसेना
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 03 Feb 2024 03:42 PM IST
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सार
इस्राइल और हमास का युद्ध शुरू होने के बाद 20 से अधिक बार मालवाहक जहाजों को निशाना बनाया जा चुका है। लाल सागर के रास्ते होने वाले समुद्री व्यापार पर मंडराते हूती विद्रोहियों के साये से बचने के लिए चीन ने बड़ा फैसला लिया है। खबर है कि सुरक्षित समुद्री कारोबार सुनिश्चित करने के लिए चीनी नौसेना ने जहाजों को एस्कॉर्ट करने का फैसला लिया है।
लाल सागर में चीनी नौसेना मालवाहक जहाजों को एस्कॉर्ट करेगी
- फोटो : ani
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विस्तार
लाल सागर के रास्ते समुद्री व्यापार पर मंडराते खतरों के बीच चीन आलोचकों के निशाने पर है। हूती विद्रोहियों पर नकेल कसने में ढिलाई के आरोप झेल रही चीनी नौसेना ने अब मालवाहक जहाजों को एस्कॉर्ट करने का फैसला लिया है। एक शिपिंग कंपनी और चीनी सरकार की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीनी नौसेना ने लाल सागर के रास्ते मालवाहक जहाजों का परिवहन शुरू कर दिया है। बता दें कि सात अक्तूबर, 2023 को शुरू हुए इस्राइल और हमास के हिंसक संघर्ष के बाद 27 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस्राइली सैनिकों की कार्रवाई से बौखलाए हूती विद्रोही कथित तौर पर ईरान का समर्थन पाने के बाद समुद्री कारोबार करने वाले मालवाहक जहाजों पर हमले कर रहे हैं।
हूती हमलावरों के आतंक में कम हुआ परिवहन
वॉयस ऑफ अमेरिका (वीओए) की खबर के मुताबिक चीनी नौसेना ने मालवाहक जहाजों को एस्कॉर्ट करने का फैसला ऐसे समय में लिया है, जब दुनियाभर में लाल सागर के रास्ते समु्द्री कारोबार करने वाली शिपिंग कंपनियों ने हूती हमलावरों के हमलों के बीच परिवहन कम कर दिया है। बीते लगभग तीन महीने के भीतर हूती विद्रोहियों के 20 हमलों के बाद कई बड़े कारोबारी इस रास्ते से बचने लगे हैं। रास्ता बदलने के कारण कारोबारियों की लागत बढ़ने की खबर भी सामने आई। इस रास्ते की अहमियत का अंदाजा इसी से होता है कि यूरोप और एशिया के बीच लगभग 40 प्रतिशत व्यापार लाल सागर और स्वेज नहर के माध्यम से होता है। दुनिया का लगभग 12 प्रतिशत समुद्री तेल व्यापार भी इसी रास्ते से होता है।
लाल सागर में चीन देगा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन की सुरक्षा सबसे ऊपर
नवंबर के बाद से ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और संदिग्ध समुद्री डाकुओं ने व्यापारी जहाजों को कई बार निशाना बनाया है। लाल सागर के रास्ते गुजरने वाले कारोबारियों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए गए हैं। पश्चिमी एशियाई शहर गाजा में इस्राइली सेना के हमलों के बाद हूती विद्रोही इस्राइल से जुड़ाव रखने वाले देशों और कारोबारियों पर हमले कर रहे हैं। चीनी मीडिया के मुताबिक जनवरी, 2024 से चीनी नौसेना ने लाल सागर में अपने पांच मालवाहक जहाजों के लिए सुरक्षा एस्कॉर्ट प्रदान किया। वीओए की रिपोर्ट के अनुसार चीनी सुरक्षा के दायरे पर वॉशिंगटन में चीनी दूतावास के प्रवक्ता युआन म्यू ने कहा, कुल मिलाकर, चीन अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन की सुरक्षा के लिए सभी पक्षों के साथ काम करने के लिए तैयार है।
हमलावरों से बचाने के लिए भारत ने भेजी मदद, दुनियाभर से मिली तारीफ
गौरतलब है कि पिछले तीन महीने की अवधि में लाल सागर और पश्चिमी अरब सागर में सशस्त्र हूती विद्रोहियों और संदिग्ध समुद्री डाकुओं का आतंक बढ़ा है। व्यापारी जहाजों पर हालिया हमलों के बीच संकटग्रस्त जहाजों की मदद के लिए भारतीय नौसेना ने त्वरित प्रतिक्रिया दी थी। दुनिया भर के विशेषज्ञों ने भारत की सराहना की है।
जिबूती में नौसैनिक अड्डा होने के बावजूद मौन रही चीनी नेवी
रिपोर्ट्स के मुताबिक अदन की खाड़ी में हमलावरों के बीच फंसे जहाज मार्लिन लुआंडा को बचाने के लिए चीनी नौसेना ने तत्परता नहीं दिखाई थी। चीन इसलिए भी आलोचकों के निशाने पर है क्योंकि अदन की खाड़ी के काफी करीब जिबूती में नौसैनिक अड्डा होने के बावजूद उसने हूती विद्रोहियों / हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की। मार्लिन लुआंडा नाम के जहाज पर सवार चालक दल की तरफ से मदद की अपील पर भारतीय नौसेना ने तत्काल पहल की थी। जहाज को बचाने के बाद चालक दल के सदस्यों ने भारत के प्रति कृतज्ञता प्रकट की थी।
लाल सागर में चीन और रूस सहित कुछ देशों के जहाज सुरक्षित
हूती विद्रोहियों की तरफ से जारी बयान के मुताबिक उन्होंने कहा है कि चीन और रूस सहित कुछ देशों के जहाज लाल सागर से सुरक्षित रूप से गुजर सकते हैं। हालांकि, पिछले हफ्ते रूसी तेल ले जा रहा ब्रिटिश तेल टैंकर हूती मिसाइल की चपेट में आ गया था। ऐसे में सिर पर मंडराते खतरों से आतंकित रूसी ईंधन ले जाने वाले टैंकर लाल सागर जाने से कतरा रहे हैं। कारोबार असुरक्षित होने के कारण दुनिया की अधिकांश शिपिंग कंपनियां अफ्रीका के चारों ओर जाने के लिए अपना रास्ता बदलने पर मजबूर हैं। हालांकि, लागत और शिपिंग समय दोगुना होने के बावजूद क्विंगदाओ (चीन) की कंपनी- सी लीजेंड शिपिंग सक्रिय रूप से लाल सागर के रास्ते अपने कारोबार को बढ़ावा दे रही है।
जवाबी हमलों के बावजूद बाज नहीं आ रहे हूती विद्रोही
हूती हमलावरों के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन ने कई बार कार्रवाई की है। जवाबी कार्रवाई को बहरीन, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, हॉलैंड, इटली, नॉर्वे, सेशेल्स और स्पेन के सामूहिक बल से भी समर्थन मिला है। वीओए के मुताबिक, हूती ठिकानों पर जवाबी मिसाइल हमलों के बावजूद अब तक विद्रोहियों ने मालवाहक जहाजों को निशाना बनाना बंद नहीं किया है।
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हूती हमलावरों के आतंक में कम हुआ परिवहन
वॉयस ऑफ अमेरिका (वीओए) की खबर के मुताबिक चीनी नौसेना ने मालवाहक जहाजों को एस्कॉर्ट करने का फैसला ऐसे समय में लिया है, जब दुनियाभर में लाल सागर के रास्ते समु्द्री कारोबार करने वाली शिपिंग कंपनियों ने हूती हमलावरों के हमलों के बीच परिवहन कम कर दिया है। बीते लगभग तीन महीने के भीतर हूती विद्रोहियों के 20 हमलों के बाद कई बड़े कारोबारी इस रास्ते से बचने लगे हैं। रास्ता बदलने के कारण कारोबारियों की लागत बढ़ने की खबर भी सामने आई। इस रास्ते की अहमियत का अंदाजा इसी से होता है कि यूरोप और एशिया के बीच लगभग 40 प्रतिशत व्यापार लाल सागर और स्वेज नहर के माध्यम से होता है। दुनिया का लगभग 12 प्रतिशत समुद्री तेल व्यापार भी इसी रास्ते से होता है।
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लाल सागर में चीन देगा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन की सुरक्षा सबसे ऊपर
नवंबर के बाद से ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और संदिग्ध समुद्री डाकुओं ने व्यापारी जहाजों को कई बार निशाना बनाया है। लाल सागर के रास्ते गुजरने वाले कारोबारियों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए गए हैं। पश्चिमी एशियाई शहर गाजा में इस्राइली सेना के हमलों के बाद हूती विद्रोही इस्राइल से जुड़ाव रखने वाले देशों और कारोबारियों पर हमले कर रहे हैं। चीनी मीडिया के मुताबिक जनवरी, 2024 से चीनी नौसेना ने लाल सागर में अपने पांच मालवाहक जहाजों के लिए सुरक्षा एस्कॉर्ट प्रदान किया। वीओए की रिपोर्ट के अनुसार चीनी सुरक्षा के दायरे पर वॉशिंगटन में चीनी दूतावास के प्रवक्ता युआन म्यू ने कहा, कुल मिलाकर, चीन अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन की सुरक्षा के लिए सभी पक्षों के साथ काम करने के लिए तैयार है।
हमलावरों से बचाने के लिए भारत ने भेजी मदद, दुनियाभर से मिली तारीफ
गौरतलब है कि पिछले तीन महीने की अवधि में लाल सागर और पश्चिमी अरब सागर में सशस्त्र हूती विद्रोहियों और संदिग्ध समुद्री डाकुओं का आतंक बढ़ा है। व्यापारी जहाजों पर हालिया हमलों के बीच संकटग्रस्त जहाजों की मदद के लिए भारतीय नौसेना ने त्वरित प्रतिक्रिया दी थी। दुनिया भर के विशेषज्ञों ने भारत की सराहना की है।
जिबूती में नौसैनिक अड्डा होने के बावजूद मौन रही चीनी नेवी
रिपोर्ट्स के मुताबिक अदन की खाड़ी में हमलावरों के बीच फंसे जहाज मार्लिन लुआंडा को बचाने के लिए चीनी नौसेना ने तत्परता नहीं दिखाई थी। चीन इसलिए भी आलोचकों के निशाने पर है क्योंकि अदन की खाड़ी के काफी करीब जिबूती में नौसैनिक अड्डा होने के बावजूद उसने हूती विद्रोहियों / हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की। मार्लिन लुआंडा नाम के जहाज पर सवार चालक दल की तरफ से मदद की अपील पर भारतीय नौसेना ने तत्काल पहल की थी। जहाज को बचाने के बाद चालक दल के सदस्यों ने भारत के प्रति कृतज्ञता प्रकट की थी।
लाल सागर में चीन और रूस सहित कुछ देशों के जहाज सुरक्षित
हूती विद्रोहियों की तरफ से जारी बयान के मुताबिक उन्होंने कहा है कि चीन और रूस सहित कुछ देशों के जहाज लाल सागर से सुरक्षित रूप से गुजर सकते हैं। हालांकि, पिछले हफ्ते रूसी तेल ले जा रहा ब्रिटिश तेल टैंकर हूती मिसाइल की चपेट में आ गया था। ऐसे में सिर पर मंडराते खतरों से आतंकित रूसी ईंधन ले जाने वाले टैंकर लाल सागर जाने से कतरा रहे हैं। कारोबार असुरक्षित होने के कारण दुनिया की अधिकांश शिपिंग कंपनियां अफ्रीका के चारों ओर जाने के लिए अपना रास्ता बदलने पर मजबूर हैं। हालांकि, लागत और शिपिंग समय दोगुना होने के बावजूद क्विंगदाओ (चीन) की कंपनी- सी लीजेंड शिपिंग सक्रिय रूप से लाल सागर के रास्ते अपने कारोबार को बढ़ावा दे रही है।
जवाबी हमलों के बावजूद बाज नहीं आ रहे हूती विद्रोही
हूती हमलावरों के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन ने कई बार कार्रवाई की है। जवाबी कार्रवाई को बहरीन, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, हॉलैंड, इटली, नॉर्वे, सेशेल्स और स्पेन के सामूहिक बल से भी समर्थन मिला है। वीओए के मुताबिक, हूती ठिकानों पर जवाबी मिसाइल हमलों के बावजूद अब तक विद्रोहियों ने मालवाहक जहाजों को निशाना बनाना बंद नहीं किया है।