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Sri Lanka: IMF से ऋण शर्तों पर दोबारा बात संभव नहीं, विदेश मंत्री साबरी बोले- देश में बढ़ सकता है आर्थिक संकट

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: बशु जैन Updated Thu, 29 Aug 2024 07:34 PM IST
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Renegotiating debt terms can lead to further economic instability Sri Lankan foreign minister says
श्रीलंका में गहरा सकता आर्थिक संकट। (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : एएनआई
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श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी ने गुरुवार को कहा कि ऋण समझौते की शर्तों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से दोबारा बात करना संभव नहीं है। अगर ऐसा किया गया तो देश में आर्थिक संकट बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि आईएमएफ से ऋण स्थिरता समझौते पर बात करने का प्रयास किया गया तो वह दिसंबर में मिलने वाली अगली किस्त को रोक देगा। इसके बाद विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक भी अपनी ऋण की किस्तें रोक सकते हैं। 

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साबरी ने कहा कि आईएमएफ के साथ किए गए ऋण स्थिरता समझौते (डीएसए) की शर्तें अब कानून का हिस्सा बन गई हैं और इन्हें आसानी से नहीं बदला जा सकता है। अगर इस मामले में दोबारा बातचीत की गई तो राष्ट्र में आर्थिक अस्थिरता पैदा हो सकती है। प्रगति और उन्नति के दो साल विषय पर हुए कार्यक्रम में श्रीलंका के विदेश मंत्री सबरी ने ऋण स्थिरता समझौते (डीएसए) के कड़े मापदंडों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ इसे लेकर फिर से बातचीत करना असफल प्रयास है।
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साबरी ने कहा कि डीएसए मापदंडों के तहत वर्तमान ऋण को 133 प्रतिशत से घटाकर 95 प्रतिशत, विदेशी ऋण निपटान के लिए आवंटित जीडीपी को 9.3 प्रतिशत से घटाकर 4.5 प्रतिशत, प्राथमिक शेष पर 2.1 प्रतिशत अधिशेष प्राप्त करने की बाध्यता कर दर गई है। देश में 15 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद कर और राजस्व से आता है। उन्होंने कहा कि अगर हम आईएमएफ के साथ फिर से बातचीत करने और शर्तों को बदलने की कोशिश करते हैं तो इसमें एक और साल लगेगा। ऐसा होता है तो आईएमएफ दिसंबर में 40 करोड़ डॉलर की किस्त नहीं देगा। इसके बाद विश्व बैंक भी 40 करोड़ डॉलर की अगली किस्त रोक देगा। ऐसा होने के बाद एशियाई बैंक भी 50 करोड़ डॉलर की किस्त नहीं देगा। 

उन्होंने कहा कि इससे देश को दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 में 1.2 अरब से 1.3 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। जिससे अस्थिरता हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस फंडिंग के बिना देश को गंभीर आर्थिक अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है। रुपये में गिरावट और महंगाई बढ़ सकती है। 

दरअसल विदेश मुद्रा भंडार खत्म होने के बाद श्रीलंका ने अप्रैल 2022 में खुद को डिफॉल्ट घोषित कर लिया था। इस दौरान श्रीलंका को ऋण देने पर रोक लग गई थी। जुलाई में श्रीलंका सरकार चीन, भारत, फ्रांस और जापान जैसे देशों के साथ लंबी बातचीत के बाद एक ऋण पुनर्गठन समझौते पर पहुंची। आईएमएफ ने हाल ही में श्रीलंका के साथ किए गए श्रीलंका के 2.9 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज में बाहरी ऋण पुनर्गठन को सशर्त बना दिया है। बेलआउट पैकेज की तीसरी किस्त जून के मध्य में जारी की गई थी। इस पर आईएमएफ ने कहा था कि श्रीलंका के आर्थिक सुधार कार्यक्रम के अच्छे परिणाम मिले हैं।

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