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Russia: नाटो पर रूसी दबाव तेज, ब्रिटेन के समुद्री रास्तों तक पहुंची पुतिन की नौसेना, मिसाइलों की जद में यूरोप
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: लव गौर
Updated Sun, 23 Nov 2025 04:05 AM IST
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सार
Russia Ukraine War: नाटो पर रूसी दबाव तेज हो गया है। इधर, ब्रिटेन के समुद्री रास्तों तक पुतिन की नौसेना पहुंच गई है। वहीं लेसी मिसाइलों की जद में पूरा यूरोप है। महायुद्ध की चेतावनियों के बीच वैश्विक तनाव बढ़ता जा रहा है।
रूस-यूक्रेन जंग
- फोटो : PTI
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विस्तार
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार रूस ने यूक्रेन युद्ध को सीमित मोर्चे से आगे ले जाते हुए समुद्र और मिसाइल–रणनीति के जरिये यूरोप पर दबाव बढ़ा दिया है। उत्तरी अटलांटिक और नॉर्थ सी में रूसी नौसेना की गतिविधियां रिकॉर्ड गति से बढ़ी हैं और ब्रिटिश रक्षा एजेंसियां ऐसे जहाजों और पनडुब्बियों को लगातार शैडो कर रही हैं।
कलीनिनग्राद, बेलारूस और समुद्री प्लेटफॉर्म से तैनात मिसाइलें यूरोप के लगभग हर बड़े शहर को अपनी जद में लेती हैं। फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन खुलकर महायुद्ध की आशंका जता रहे हैं जबकि क्रेमलिन का संदेश साफ है कि पश्चिम ने सीमाएं पार कीं तो जवाब और कठोर होगा। रिपोर्ट के अनुसार साल 2025 में नाटो की तरफ रूसी नौसेना की गतिविधि 40% तक बढ़ गई हैं।
पूरा यूरोप पुतिन की मिसाइल रेंज में
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट कहती है कि पूरा यूरोप पुतिन की मिसाइल रेंज में है। आज यूरोप का कोई भी बड़ा शहर रूस की मिसाइल पहुंच से बाहर नहीं है। कलीनिनग्राद और बेलारूस में तैनात इस्कंदर मिसाइलें पोलैंड, बाल्टिक देशों और पूर्वी जर्मनी तक बिना किसी बाधा पहुंच सकती हैं। वहीं समुद्र से दागी जाने वाली कालीब्र मिसाइलों की रेंज इतनी व्यापक है कि ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, स्कैंडिनेविया और दक्षिणी यूरोप तक इनसे सुरक्षित नहीं हैं।
ये भी पढ़ें: Russia-Ukraine War: पुतिन ने किया US की शांति योजना का समर्थन, कहा- बन सकती है यूक्रेन युद्ध खत्म करने का आधार
यूरोप में युद्ध की चेतावनियों का दौर
फ्रांस और जर्मनी अपनी राजनीतिक भाषा में पहले से कहीं अधिक स्पष्ट और कठोर दिखाई दे रहे हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों कई बार यह चेतावनी दे चुके हैं कि यूरोप एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुका है जिसे बड़े युद्ध से पहले वाली स्थिति कहा जा सकता है। जर्मनी इस तनाव को शीत युद्ध के बाद की सबसे गंभीर सुरक्षा चुनौती मानते हुए अपने रक्षा खर्च को तेजी से बढ़ा रहा है।
ये भी पढ़ें: Russia Ukraine War: जेलेंस्की को ट्रंप का अल्टीमेटम, बोले- 27 तक शांति योजना स्वीकार करें वरना खो देंगे समर्थन
पुतिन की मंशा और आने वाले खतरे
विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन का उद्देश्य सीधा युद्ध छेड़ना नहीं, बल्कि यूरोप को सैन्य, राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक दबाव में रखना है। पुतिन की रणनीति तीन स्तरों पर चलती है। नाटो को यूक्रेन और पूर्वी यूरोप से दूर रखना, यूरोपीय देशों के भीतर राजनीतिक विभाजन और असहमति को बढ़ाना व रूस के भीतर घिरे हुए देश का भाव पैदा कर घरेलू समर्थन बनाए रखना।
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कलीनिनग्राद, बेलारूस और समुद्री प्लेटफॉर्म से तैनात मिसाइलें यूरोप के लगभग हर बड़े शहर को अपनी जद में लेती हैं। फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन खुलकर महायुद्ध की आशंका जता रहे हैं जबकि क्रेमलिन का संदेश साफ है कि पश्चिम ने सीमाएं पार कीं तो जवाब और कठोर होगा। रिपोर्ट के अनुसार साल 2025 में नाटो की तरफ रूसी नौसेना की गतिविधि 40% तक बढ़ गई हैं।
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पूरा यूरोप पुतिन की मिसाइल रेंज में
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट कहती है कि पूरा यूरोप पुतिन की मिसाइल रेंज में है। आज यूरोप का कोई भी बड़ा शहर रूस की मिसाइल पहुंच से बाहर नहीं है। कलीनिनग्राद और बेलारूस में तैनात इस्कंदर मिसाइलें पोलैंड, बाल्टिक देशों और पूर्वी जर्मनी तक बिना किसी बाधा पहुंच सकती हैं। वहीं समुद्र से दागी जाने वाली कालीब्र मिसाइलों की रेंज इतनी व्यापक है कि ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, स्कैंडिनेविया और दक्षिणी यूरोप तक इनसे सुरक्षित नहीं हैं।
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यूरोप में युद्ध की चेतावनियों का दौर
फ्रांस और जर्मनी अपनी राजनीतिक भाषा में पहले से कहीं अधिक स्पष्ट और कठोर दिखाई दे रहे हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों कई बार यह चेतावनी दे चुके हैं कि यूरोप एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुका है जिसे बड़े युद्ध से पहले वाली स्थिति कहा जा सकता है। जर्मनी इस तनाव को शीत युद्ध के बाद की सबसे गंभीर सुरक्षा चुनौती मानते हुए अपने रक्षा खर्च को तेजी से बढ़ा रहा है।
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पुतिन की मंशा और आने वाले खतरे
विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन का उद्देश्य सीधा युद्ध छेड़ना नहीं, बल्कि यूरोप को सैन्य, राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक दबाव में रखना है। पुतिन की रणनीति तीन स्तरों पर चलती है। नाटो को यूक्रेन और पूर्वी यूरोप से दूर रखना, यूरोपीय देशों के भीतर राजनीतिक विभाजन और असहमति को बढ़ाना व रूस के भीतर घिरे हुए देश का भाव पैदा कर घरेलू समर्थन बनाए रखना।

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