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क्या रुकने वाली है रूस-यूक्रेन जंग: ट्रंप से मिलेंगे जेलेंस्की; रूस के लिए क्या छोड़ने को तैयार-क्या मांगेंगे?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sun, 28 Dec 2025 04:46 PM IST
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सार
रूस-यूक्रेन संघर्ष में मौजूदा हालात क्या हैं? ट्रंप और जेलेंस्की की यह बैठक इतनी अहम क्यों है? रूस और यूक्रेन दोनों इस समझौते के लिए क्या-क्या मांग है? दोनों किन-किन बातों पर तैयार हैं? इसके अलावा किन मुद्दों को लेकर सहमति बनना मुश्किल हो सकता है? इसके अलावा इस बैठक में किन बातों पर नजर रहेगी? आइये जानते हैं...
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Russia Ukraine War Volodymyr Zelensky Donald Trump meeting in Florida Peace Agreement Vladimir Putin explained
यूक्रेन के सीमाई क्षेत्रों पर लगातार बढ़ा है रूस का कब्जा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष शुरू हुए चार साल होने वाले हैं। इस बीच दोनों पक्षों की ओर से शांति की सभी कोशिशें अब तक नाकाम रही हैं। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध को जल्द खत्म करने के दबाव और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से पीछे न हटने की चेतावनी के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की कुछ दबाव में दिखने लगे हैं। इसका असर यह हुआ है कि जेलेंस्की अब रविवार को ट्रंप के साथ एक बार फिर संघर्ष रुकवाने के लिए शांति समझौते के प्रस्ताव के साथ चर्चा करेंगे। 


ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर रूस-यूक्रेन संघर्ष में मौजूदा हालात क्या हैं? ट्रंप और जेलेंस्की की यह बैठक इतनी अहम क्यों है? रूस और यूक्रेन दोनों इस समझौते के लिए क्या-क्या मांग है? दोनों किन-किन बातों पर तैयार हैं? इसके अलावा किन मुद्दों को लेकर सहमति बनना मुश्किल हो सकता है? इसके अलावा इस बैठक में किन बातों पर नजर रहेगी? आइये जानते हैं...

अब जानें- रूस-यूक्रेन संघर्ष की ताजा स्थिति क्या है?
रूस-यूक्रेन में युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिकी मध्यस्थता के साथ शांति वार्ता जारी है। वहीं दूसरी ओर जमीन पर जबरदस्त युद्ध भी चल रहा है। रूस ने बीते दिनों यूक्रेन के प्रमुख शहरों और सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं।

कूटनीतिक उच्च-स्तरीय बैठकों का दौर जारी
  • यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की आज फ्लोरिडा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने वाले हैं। इस बैठक का मकसद अमेरिका की ओर से प्रस्तावित 20-सूत्रीय शांति योजना पर चर्चा और इसके अधिकतर मुद्दों पर सहमति बनाना होगा। 
  • जेलेंस्की ने घोषणा की है कि यह 20-सूत्रीय शांति योजना के 90 फीसदी बिंदुओं पर तैयार हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि नए साल से पहले बहुत कुछ तय किया जा सकता है।
  • जेलेंस्की ने रूस-यूक्रेन संघर्ष रुकवाने की कोशिशों में जुटे अमेरिकी प्रतिनिधियों (स्टीव व्हिटकॉफ और जैरेड कुश्नर) के साथ हुई बातचीत को सकारात्मक बताया है, जिससे शांति समझौते के प्रारूप, बैठकें और समय के संदर्भ में नए विचार मिले हैं।
  • क्रेमलिन ने कहा है कि वह रूसी दूत किरिल दिमित्रिएव को अमेरिका की तरफ से दिए गए ताजा प्रस्तावों का विश्लेषण कर रहा है। हालांकि, एक वरिष्ठ रूसी अधिकारी ने कहा कि यह योजना उस मसौदे से मौलिक रूप से अलग है जिस पर रूस ने अमेरिका से बातचीत शुरू की। 
  • राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यूक्रेनी पक्ष के पास  तब तक कुछ नहीं है जब तक मैं इसे मंजूरी नहीं देते।

जमीनी सैन्य संघर्ष की ताजा स्थिति
शांति वार्ता में प्रगति के बावजूद, रूस-यूक्रेन के बीच जमीन पर लड़ाई जारी है।
  • शनिवार (27 दिसंबर) तड़के कीव में रूसी हवाई हमलों की एक नई लहर देखी गई, जिससे कम से कम पांच लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि यह हमला ड्रोन और मिसाइल खतरों के साथ पूरे देश में जारी रहा।
  • उत्तर-पूर्वी शहर खारकीव पर हुए हवाई हमले में दो लोगों की मौत हो गई। रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे खासकर ओडेसा के दक्षिणी क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइलों के हमलों को बढ़ा दिया है। यह क्षेत्र यूक्रेन के समुद्री बंदरगाहों पर स्थित हैं।
  • दूसरी तरफ यूक्रेनी सेना ने दक्षिणी रोस्तोव क्षेत्र में रूस की प्रमुख तेल रिफाइनरियों में से एक (नोवोशाख्तिंस्क) पर क्रूज मिसाइलों से हमले की जानकारी दी। यह रिफाइनरी पूर्वी यूक्रेन में रूसी सैन्य अभियानों के लिए ईंधन आपूर्ति के लिए अहम है।

कब्जा किए गए क्षेत्रों की ताजा स्थिति
  • रूसी सेना ने डोनेत्स्क में स्विआतो-पोक्रोव्स्क बस्ती पर नियंत्रण कर लिया है।
  • यूक्रेनी सैनिकों को इस सप्ताह की शुरुआत में सीवर्स्क के पूर्वी शहर से हटना पड़ा।
  • सीवेर्स्क पर कब्जा अब रूस को डोनेत्स्क में यूक्रेन के पास बचे अंतिम किले वाले शहरों स्लोवियांस्क और क्रामाटोरस्क के करीब ले आया है।
  • मॉस्को ने डोनबास में आने वाले डोनेत्स्क के लगभग 75% और लुहांस्क के लगभग 99% हिस्से को नियंत्रण में ले लिया है। 

ये भी पढ़ें: Russia-Ukraine War: 'यूक्रेन ने नहीं माना शांति समझौता तो..', ट्रंप-जेलेंस्की की बैठक से पहले पुतिन की चेतावनी

क्यों अहम है जेलेंस्की की ट्रंप से मुलाकात?
जेलेंस्की और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाली मुलाकात कई मायनों में अहम है। दरअसल, रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका जोर-शोर से मध्यस्थता की कोशिशों में जुटा है। खासकर फरवरी में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से वे लगातार दोनों पक्षों को शांति योजना पर काम करने के लिए कहते रहे हैं। 

गौरतलब है कि अमेरिका में पिछले साल हुए राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले तक ट्रंप कहते रहे थे कि वे रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध रुकवा कर ही रहेंगे। ट्रंप इसके लिए फरवरी, अप्रैल, अगस्त में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेंलेंस्की और अगस्त में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात भी कर चुके हैं। हालांकि, जहां जेलेंस्की अब तक रूस के कब्जे वाली जमीन पर यूक्रेन की स्वायत्तता छोड़ने पर सहमत नहीं हुए हैं, तो वहीं पुतिन ने भी शांति समझौते के लिए जेलेंस्की से सीधी बात न करने, यूक्रेन की जमीन को न छोड़ने समेत कई शर्तें सामने रख दी हैं। ऐसे में ट्रंप फरवरी में राष्ट्रपति बनने के बाद से बीते 10 महीनों में युद्ध रुकवाने में पूरी तरह असफल रहे हैं। 

शांति समझौतों के लिए क्या चाहते हैं रूस-यूक्रेन?

रूस शांति समझौते के लिए मुख्य रूप से क्षेत्रीय नियंत्रण, सुरक्षा गारंटी और यूक्रेन की सैन्य/रणनीतिक सीमाओं पर जोर देता है।

क्या हैं रूस की मांग?

1. यूक्रेन के क्षेत्र पर पूर्ण कब्जा
  • पुतिन शासन की मांग है कि वह कोई भी समझौता सिर्फ यूक्रेन में चुनाव के बाद ही कर सकता है। यह रूस की प्राथमिक मांग है।
  • रूस चाहता है कि समग्र तौर पर यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र यानी डोनेत्स्क और लुहांस्क पर उसका नियंत्रण मान्यता दी जाए।
  • यूक्रेनी सेना की डोनबास से पूर्ण वापसी उसकी केंद्रीय शर्त है। रूस संकेत देता रहा है कि ऐसा न हुआ तो वह बल प्रयोग जारी रखेगा।
  • रूस चाहता है कि उसके यूक्रेन के आंशिक रूप से कब्जे वाले अन्य क्षेत्रों में भी नियंत्रण को मान्यता दी जाए।
  • इनमें खेरसॉन, जैपोरिज्झिया और क्रीमिया जैसे इलाके शामिल हैं, जिन पर रूस अपने कब्जे को स्थायी करना चाहता है। 

2. यूक्रेन की सैन्य-कूटनीतिक क्षमता में कटौती
  • यूक्रेन की प्रस्तावित 8,00,000 सैनिकों वाली सेना में कमी।
  • भारी हथियारों, मिसाइलों और लंबी दूरी की क्षमताओं पर सीमाएं।
  • यूक्रेन की नाटो सदस्यता पर रोक और तटस्थता की मांग।
  • नाटो-स्तरीय (आर्टिकल-5 जैसी) सुरक्षा गारंटी का विरोध।
  • यूरोपीय देशों की किसी भी शांति-रक्षक बल की तैनाती अस्वीकार।
  • सीमावर्ती क्षेत्रों में पश्चिमी सैन्य ढांचे का विरोध।

ये भी पढ़ें: Ukraine: 'हम शांति चाहते हैं, लेकिन पुतिन युद्ध', रूस के कीव पर ताजा हमले को लेकर भड़के जेलेंस्की

3. जैपोरिज्झिया परमाणु संयंत्र पर नियंत्रण/प्रभाव
  • संयंत्र के आसपास की सुरक्षा रूस के नियंत्रण में देने की मांग।
  • अमेरिकी या किसी तीसरे पक्ष के संचालन पर आपत्ति।

4. आर्थिक छूट देने की मांग
  • रूस ने शांति समझौते के बदले आर्थिक प्रतिबंधों में राहत की भी मांग की है।

क्या है यूक्रेन की मांग?
यूक्रेन शांति समझौते के लिए मुख्य रूप से संप्रभुता की रक्षा, मजबूत सुरक्षा गारंटी और रूसी सेना के कब्जे वाले इलाकों से उसकी वापसी चाहता है। 

1. क्षेत्रीय संप्रभुता की बहाली
  • कब्जाए गए यूक्रेनी क्षेत्रों से रूसी सेना की वापसी।
  • डोनबास, जैपोरिज्झिया, खेरसॉन और क्रीमिया की स्थायी वापसी।
  • किसी भी क्षेत्रीय रियायत पर अंतिम फैसला यूक्रेनी जनमत संग्रह से।

2. मजबूत सुरक्षा गारंटी
  • अमेरिका, नाटो और यूरोपीय देशों से नाटो के अनुच्छेद 5 जैसी सुरक्षा गारंटी।
  • यूक्रेन की नाटो और यूरोपीय संघ में शामिल होने की संभावना खुली रहे।
  • शांति काल में भी 8 लाख सैनिकों तक की सेना बनाए रखने की छूट।
  • आत्मरक्षा के लिए आर्थिक मदद, आधुनिक हथियार और सैन्य ढांचा।
  • सीमावर्ती और संघर्ष वाले क्षेत्रों में डिमिलिट्राइज्ड जोन (असैन्य क्षेत्र)।

3. जैपोरिज्झिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र
  • संयंत्र और उसके आसपास से रूसी सेना की वापसी।
  • संयंत्र का नियंत्रण यूक्रेन या किसी तीसरे पक्ष के पास।

4. न्याय और जवाबदेही
  • युद्ध अपराधों की अंतरराष्ट्रीय जांच।
  • रूस से क्षतिपूर्ति की मांग।
  • पुनर्निर्माण और आर्थिक सहायता।

कौन-किस शर्त को मानने के लिए तैयार?

यूक्रेन
जेलेंस्की ने अमेरिकी मध्यस्थता वाली 20 सूत्रीय शांति योजना के तहत कुछ महत्वपूर्ण शर्तों को मानने की इच्छा जताई है, हालांकि ये रियायतें यूक्रेन की संप्रभुता और सुरक्षा की गारंटी पर निर्भर करती हैं।
  1. यूक्रेन ने रूस के कब्जे वाले डोनबास को लेकर कुछ कड़ी शर्तों के साथ समझौता करने की शर्त रखी है। जेलेंस्की की शर्त है कि रूस से संघर्ष में जुटी यूक्रेन की सेना को डोनबास से वापस बुलाया जाता है तो उस इलाके में एक असैन्य क्षेत्र स्थापित हो और रूस यूक्रेन की तरह अपनी सेना को बराबर अनुपात (5, 10 या 40 किमी) पीछे हटाए।
  2. जेलेंस्की ने डोनेत्स्क के लिए मुक्त आर्थिक क्षेत्र स्थापित करने का विकल्प पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि या तो युद्ध जारी रहेगा, या संभावित आर्थिक क्षेत्रों के संबंध में कुछ सहमति बनानी होगी। इन जगहों पर निगरानी का जिम्मा भी यूक्रेन को सौंपे जाने की मांग की गई है।
  3. यूक्रेन चाहता है कि जैपोरिज्झिया संयंत्र के चारों ओर एक आर्थिक क्षेत्र स्थापित हो और रूसी सैनिकों को चार अन्य क्षेत्रों (निप्रोपेट्रोस, माइकोलाइव, सूमी और खारकीव) से भी हटना होगा। यूक्रेन ने अमेरिका के उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है जिसके तहत संयंत्र का संचालन यूक्रेन, अमेरिका और रूस संयुक्त रूप से करेंगे।
  4. यूक्रेन ने अपनी जमीन को छोड़ने के लिए जनमत संग्रह कराने की भी शर्त रखी। उसका कहना है कि किसी भी क्षेत्रीय रियायत पर अंतिम फैसला यूक्रेनी लोगों की ओर से किए गए जनमत संग्रह के माध्यम से लिया जाएगा। यूक्रेन ने इस जनमत संग्रह के लिए 60 दिन के युद्धविराम की मांग की है।

इसके अलावा यूक्रेन ने नाटो, ईयू, अपने सैन्य बल की क्षमता को बनाए रखने और ढाचांगत निर्माण के लिए आर्थिक मदद जारी रखने की भी शर्त रखी है। इतना ही नहीं जेलेंस्की यह संकेत भी दे चुके हैं कि वह यूक्रेन में चुनाव कराने के लिए तैयार हैं, अगर पश्चिमी देश चुनाव के दौरान यूक्रेन की सुरक्षा करें और रूस इस दौरान शांति समझौता करे।

रूस
जहां जेलेंस्की ने ट्रंप के दबाव में शांति समझौते के लिए यूक्रेन के कुछ हिस्सों को छोड़ने के संकेत दिए हैं तो वहीं रूस की तरफ अधिकतर शर्तों पर स्पष्ट बातें नहीं रखी गई हैं। 
  1. रूस ने पूर्वी यूक्रेन में स्थित पूरे डोनबास क्षेत्र (डोनेत्स्क और लुहांस्क समेत) पर कब्जे की मांग की है। पुतिन ने चेतावनी दी है कि अगर यूक्रेन पीछे नहीं हटता है तो रूसी सेनाएं इस क्षेत्र को बलपूर्वक कब्जा लेंगी।
  2. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, रूस ने यूक्रेन में चुनाव और क्षेत्रीय स्वायत्तता छोड़ने के लिए कराए जाने वाले जनमत संग्रह पर सहमति दी है। इसके लिए वह कुछ समय के लिए संघर्ष विराम भी कर सकता है। हालांकि, रूस की तरफ से यह संघर्ष विराम प्रस्तावित 60 दिन से कम करने की मांग की जा सकती है।
  3. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि मॉस्को फिलहाल अमेरिका के नए प्रस्तावों की जांच कर रहा है। रूसी उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने हालिया घटनाक्रमों पर सकारात्मक रुख दिखाया और कहा कि वे समाधान के करीब हैं। 
  4. हालांकि, कुछ शर्तों को मानने से रूस का सीधा इनकार है। इनमें जैपोरिज्झिया और डोनेत्स्क में पश्चिमी देशों के संरक्षण में किसी तरह के आर्थिक क्षेत्र की मांग का विरोध शामिल है। इसके अलावा यूक्रेन की प्रस्तावित सैन्य शक्ति को बरकरार रखने पर भी आपत्ति जताई है।

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