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India-Slovakia Ties: आतंकवाद के खिलाफ साथ आए भारत-स्लोवाकिया, शिक्षा-रोजगार समेत 11 क्षेत्रों में हुए बड़े करार
एएनआई, ब्रातिस्लावा
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 16 Jun 2026 08:50 AM IST
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सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक स्लोवाकिया यात्रा के दौरान भारत और स्लोवाकिया ने अपने संबंधों को व्यापक साझेदारी में बदल दिया। दोनों देशों ने आतंकवाद विरोधी सहयोग, शिक्षा, श्रम प्रवास और शोध समेत कई क्षेत्रों में समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर स्लोवाकिया ने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन भी किया।
पीएम मोदी के स्लोवाकिया दौरे पर बड़े एलान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्लोवाकिया की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान भारत और स्लोवाकिया ने अपने रिश्तों को एक नई ऊंचाई दी है। दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'व्यापक साझेदारी' (Comprehensive Partnership) में बदल दिया है। विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज ने एक मीडिया वार्ता में इस यात्रा की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच सहयोग को एक नई गति देगी।
आतंकवाद के खिलाफ साथ आए दोनों देश
इस यात्रा का सबसे बड़ा फैसला आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ना है। भारत और स्लोवाकिया ने आतंकवाद विरोधी सहयोग के लिए एक 'संयुक्त कार्य समूह' बनाने पर सहमति जताई है। साथ ही दोनों देशों ने सीमा पर आतंकवाद सहित इसके सभी रूपों की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने पहलागम में हुए आतंकी हमले की भी निंदा की।
इसके अलावा, दोनों देशों के बीच 'कांसुलर संवाद तंत्र' भी शुरू किया जाएगा। स्लोवाकिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता का भी समर्थन किया है। स्लोवाकिया का मानना है कि सुरक्षा परिषद का विस्तार होना चाहिए और इसमें भारत जैसे देशों को जगह मिलनी चाहिए। साथ ही स्लोवाकिया के पीएम फिको ने भारतीय कारोबारियों को स्लोवाकिया में निवेश करने का खुला न्योता दिया।
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भारतीय प्रधानमंत्री की पहली स्लोवाकिया यात्रा
साल 1993 में स्लोवाकिया की आजादी के बाद यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ विस्तार से बातचीत की। उन्होंने राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से भी मुलाकात की। इन नेताओं ने आपसी हितों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए। इसमें यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया के हालात और भारत-यूरोपीय संघ (EU) के रिश्तों जैसे अहम विषय शामिल थे।
स्लोवाकिया ने सुरक्षा परिषद भारत की स्थायी सदस्यता का भी समर्थन किया
दोनों नेताओं ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर भी चर्चा की। सिबी जॉर्ज ने कहा कि इस समझौते से स्लोवाकिया जैसे यूरोपीय देशों के साथ भारत के जुड़ाव को मजबूती मिली है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को आज की हकीकत के हिसाब से बदलना चाहिए क्योंकि यह फिलहाल पुराने समय में अटका हुआ है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और शांति अभियानों में इसका बड़ा योगदान है, इसलिए इसे सुरक्षा परिषद में स्थायी जगह मिलनी चाहिए।
ये भी पढ़ें: ट्रंप का दावा: ईरान कभी नहीं बनाएगा परमाणु हथियार, नए समझौते पर बनी सहमति; पैसे देने की खबरों को बताया झूठ
इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों (MoU) पर भी हस्ताक्षर हुए। इनमें श्रम प्रवास, उच्च शिक्षा, शोध और ऑडियो-विजुअल सहयोग शामिल हैं। इन समझौतों का मकसद दोनों देशों के बीच छात्रों और पेशेवरों के आने-जाने, शैक्षणिक आदान-प्रदान और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
प्रधानमंत्री मोदी को मिल सर्वोच्च राजकीय सम्मान
एक विशेष सम्मान के तौर पर, राष्ट्रपति पेलेग्रिनी ने प्रधानमंत्री मोदी को स्लोवाकिया के सर्वोच्च राजकीय सम्मान 'ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस फर्स्ट क्लास' से नवाजा। यह सम्मान भारत और स्लोवाकिया के रिश्तों को मजबूत करने में उनके खास योगदान के लिए दिया गया है।
आतंकवाद के खिलाफ साथ आए दोनों देश
इस यात्रा का सबसे बड़ा फैसला आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ना है। भारत और स्लोवाकिया ने आतंकवाद विरोधी सहयोग के लिए एक 'संयुक्त कार्य समूह' बनाने पर सहमति जताई है। साथ ही दोनों देशों ने सीमा पर आतंकवाद सहित इसके सभी रूपों की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने पहलागम में हुए आतंकी हमले की भी निंदा की।
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इसके अलावा, दोनों देशों के बीच 'कांसुलर संवाद तंत्र' भी शुरू किया जाएगा। स्लोवाकिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता का भी समर्थन किया है। स्लोवाकिया का मानना है कि सुरक्षा परिषद का विस्तार होना चाहिए और इसमें भारत जैसे देशों को जगह मिलनी चाहिए। साथ ही स्लोवाकिया के पीएम फिको ने भारतीय कारोबारियों को स्लोवाकिया में निवेश करने का खुला न्योता दिया।
भारतीय प्रधानमंत्री की पहली स्लोवाकिया यात्रा
साल 1993 में स्लोवाकिया की आजादी के बाद यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ विस्तार से बातचीत की। उन्होंने राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से भी मुलाकात की। इन नेताओं ने आपसी हितों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए। इसमें यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया के हालात और भारत-यूरोपीय संघ (EU) के रिश्तों जैसे अहम विषय शामिल थे।
स्लोवाकिया ने सुरक्षा परिषद भारत की स्थायी सदस्यता का भी समर्थन किया
दोनों नेताओं ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर भी चर्चा की। सिबी जॉर्ज ने कहा कि इस समझौते से स्लोवाकिया जैसे यूरोपीय देशों के साथ भारत के जुड़ाव को मजबूती मिली है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को आज की हकीकत के हिसाब से बदलना चाहिए क्योंकि यह फिलहाल पुराने समय में अटका हुआ है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और शांति अभियानों में इसका बड़ा योगदान है, इसलिए इसे सुरक्षा परिषद में स्थायी जगह मिलनी चाहिए।
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इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों (MoU) पर भी हस्ताक्षर हुए। इनमें श्रम प्रवास, उच्च शिक्षा, शोध और ऑडियो-विजुअल सहयोग शामिल हैं। इन समझौतों का मकसद दोनों देशों के बीच छात्रों और पेशेवरों के आने-जाने, शैक्षणिक आदान-प्रदान और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
प्रधानमंत्री मोदी को मिल सर्वोच्च राजकीय सम्मान
एक विशेष सम्मान के तौर पर, राष्ट्रपति पेलेग्रिनी ने प्रधानमंत्री मोदी को स्लोवाकिया के सर्वोच्च राजकीय सम्मान 'ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस फर्स्ट क्लास' से नवाजा। यह सम्मान भारत और स्लोवाकिया के रिश्तों को मजबूत करने में उनके खास योगदान के लिए दिया गया है।