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Iran-US Deal: ट्रंप बोले- ईरान को 300 मिलियन डॉलर भुगतान का दावा फर्जी, परमाणु हथियार पर भी दोहराया US का रुख
एएनआई, वॉशिंगटन डीसी
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 16 Jun 2026 07:45 AM IST
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सार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने पर सहमति जताई है। उन्होंने ईरान को पैसे देने की खबरें झूठी बताईं। इस बीच, इस्रायल ने भी ईरान को परमाणु शक्ति न बनने देने की बात कही है।
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बड़ा दावा किया। उन्होंने बताया कि ईरान सहमत हो गया है कि वह अब कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। ट्रंप ने ईरान के साथ एक नए समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। ट्रंप ने उन खबरों को पूरी तरह गलत बताया जिनमें कहा गया था कि अमेरिका इस शांति समझौते के बदले ईरान को 300 मिलियन डॉलर देगा।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा 'ईरान ने परमाणु हथियार न रखने पर सहमति जताई है! साथ ही, यह खबर कि अमेरिका ईरान को 300 मिलियन डॉलर दे रहा है, फर्जी खबर है, जिसे डेमोक्रेट्स ने फैलाया है'
ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने साफ किया कि उनकी सरकार ने यह पक्का कर लिया है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर पाए। यह नया समझौता भविष्य के रिश्तों के लिए एक रास्ता तैयार करता है। इसके तहत ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना इस बात पर निर्भर करेगा कि वह परमाणु जांच में कितना सहयोग करता है। साथ ही ईरान को क्षेत्रीय सुरक्षा के वादे भी पूरे करने होंगे।
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जेडी वेंस ने ट्रंप का समर्थन किया
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ट्रंप के इस कदम का समर्थन किया। वेंस ने कहा कि ट्रंप की शांति की कोशिशें सफल रही हैं। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु ताकत बनने से रोकना ही इस समझौते का सबसे बड़ा लक्ष्य है। वेंस ने बताया कि प्रतिबंधों में छूट तभी मिलेगी जब ईरान अपने यूरेनियम भंडार को खत्म करेगा और कड़ी जांच के लिए तैयार होगा।
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि यह समझौता ईरान के व्यवहार पर टिका है। अगर ईरान परमाणु ठिकानों की जांच करने देता है और कट्टरपंथ को बढ़ावा देना बंद करता है, तभी उसे दुनिया की अर्थव्यवस्था में शामिल किया जाएगा। यह समझौता इस हफ्ते के अंत में जिनेवा में आधिकारिक तौर पर साइन होगा। इस पूरी प्रक्रिया में स्विट्जरलैंड, पाकिस्तान और कतर भी सहयोग कर रहे हैं। ट्रंप ने इस दस्तावेज को बहुत प्रभावशाली बताया है। साइन होने के बाद इसे जनता के लिए जारी कर दिया जाएगा।
ये भी पढ़ें: नेतन्याहू की धमकी: 'ईरान को किसी भी हाल में परमाणु हथियार नहीं रखने देंगे, चाहे शांति समझौता हो या नहीं'
नेतन्याहू ने क्या कहा?
वहीं इस सबके बीच इस्रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि समझौता हो या न हो, वे ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे। नेतन्याहू ने स्वीकार किया कि ट्रंप और उनके बीच हमेशा हर बात पर सहमति नहीं होती। उन्होंने कहा, कई बार हम एक जैसा सोचते हैं, लेकिन कई बार हमारी राय अलग होती है। नेतन्याहू ने कहा है कि वे देश की सुरक्षा के लिए अमेरिका के सामने मजबूती से अपनी बात रखना जानते हैं। हालांकि, जब नेतन्याहू से पूछा गया कि क्या वे ईरान पर अकेले हमला करने या लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने का फैसला लेंगे, तो उन्होंने इस बात का खुलासा करने से इनकार कर दिया।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा 'ईरान ने परमाणु हथियार न रखने पर सहमति जताई है! साथ ही, यह खबर कि अमेरिका ईरान को 300 मिलियन डॉलर दे रहा है, फर्जी खबर है, जिसे डेमोक्रेट्स ने फैलाया है'
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ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने साफ किया कि उनकी सरकार ने यह पक्का कर लिया है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर पाए। यह नया समझौता भविष्य के रिश्तों के लिए एक रास्ता तैयार करता है। इसके तहत ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना इस बात पर निर्भर करेगा कि वह परमाणु जांच में कितना सहयोग करता है। साथ ही ईरान को क्षेत्रीय सुरक्षा के वादे भी पूरे करने होंगे।
जेडी वेंस ने ट्रंप का समर्थन किया
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ट्रंप के इस कदम का समर्थन किया। वेंस ने कहा कि ट्रंप की शांति की कोशिशें सफल रही हैं। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु ताकत बनने से रोकना ही इस समझौते का सबसे बड़ा लक्ष्य है। वेंस ने बताया कि प्रतिबंधों में छूट तभी मिलेगी जब ईरान अपने यूरेनियम भंडार को खत्म करेगा और कड़ी जांच के लिए तैयार होगा।
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि यह समझौता ईरान के व्यवहार पर टिका है। अगर ईरान परमाणु ठिकानों की जांच करने देता है और कट्टरपंथ को बढ़ावा देना बंद करता है, तभी उसे दुनिया की अर्थव्यवस्था में शामिल किया जाएगा। यह समझौता इस हफ्ते के अंत में जिनेवा में आधिकारिक तौर पर साइन होगा। इस पूरी प्रक्रिया में स्विट्जरलैंड, पाकिस्तान और कतर भी सहयोग कर रहे हैं। ट्रंप ने इस दस्तावेज को बहुत प्रभावशाली बताया है। साइन होने के बाद इसे जनता के लिए जारी कर दिया जाएगा।
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नेतन्याहू ने क्या कहा?
वहीं इस सबके बीच इस्रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि समझौता हो या न हो, वे ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे। नेतन्याहू ने स्वीकार किया कि ट्रंप और उनके बीच हमेशा हर बात पर सहमति नहीं होती। उन्होंने कहा, कई बार हम एक जैसा सोचते हैं, लेकिन कई बार हमारी राय अलग होती है। नेतन्याहू ने कहा है कि वे देश की सुरक्षा के लिए अमेरिका के सामने मजबूती से अपनी बात रखना जानते हैं। हालांकि, जब नेतन्याहू से पूछा गया कि क्या वे ईरान पर अकेले हमला करने या लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने का फैसला लेंगे, तो उन्होंने इस बात का खुलासा करने से इनकार कर दिया।