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बाल सुरक्षा के दावों पर सवाल: कई सेफ्टी फीचर जांच में फेल, 4 प्लेटफॉर्म्स के सिर्फ 40% सुरक्षा उपाय ही प्रभावी
Sat, 11 Jul 2026 07:24 AM IST
अमन तिवारी
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: अमन तिवारी
Updated Sat, 11 Jul 2026 07:24 AM IST
सार
एक अध्ययन में दावा किया गया है कि टिकटॉक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और यूट्यूब पर बच्चों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध आधे से अधिक फीचर या तो सही ढंग से काम नहीं करते या उन्हें ढूंढना मुश्किल है। शोधकर्ताओं ने कंपनियों के सुरक्षा दावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
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सोशल मीडिया
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सोशल मीडिया कंपनियों के दावों पर नए स्वतंत्र अध्ययन ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शोध में पाया गया है कि टिकटॉक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और यूट्यूब पर उपलब्ध बच्चों की सुरक्षा से जुड़े आधे से अधिक फीचर या तो घोषित उद्देश्य के अनुरूप काम नहीं करते या फिर इतने जटिल हैं कि सामान्य उपयोगकर्ता उन्हें आसानी से खोज और इस्तेमाल नहीं कर पाते। शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसी स्थिति में बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के कंपनियों के दावे कमजोर पड़ जाते हैं।
न्यूयॉर्क और नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी की साझा पहल साइबरसेफ्टी रिसर्च सेंटर की इस रिपोर्ट में चारों प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध 86 युवा सुरक्षा फीचर का परीक्षण किया गया। इनमें केवल 35 फीचर, यानी करीब 40 प्रतिशत, ही ऐसे मिले जो घोषित तरीके से काम करते हैं और बच्चों के लिए आसानी से उपलब्ध भी हैं। हालांकि संबंधित कंपनियों ने रिपोर्ट के निष्कर्षों से असहमति जताते हुए कहा कि उनके सुरक्षा फीचर प्रभावी हैं और अध्ययन सामान्य उपयोगकर्ता अनुभव को सही ढंग से नहीं दर्शाता।
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खतरनाक सामग्री तक पहुंच रोकने में भी मिली कमी
रिपोर्ट के अनुसार चारों प्लेटफॉर्म दावा करते हैं कि वे बच्चों को आत्महत्या, स्वयं को नुकसान पहुंचाने और खान-पान संबंधी विकार जैसी संवेदनशील सामग्री से बचाते हैं, लेकिन परीक्षण में यह व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं मिली। टिकटॉक पर नाबालिग अकाउंट से संवेदनशील विषय खोजने पर ऐसे वैकल्पिक खोज सुझाव सामने आए जिनसे प्रतिबंधित सामग्री तक पहुंच बनाई जा सकती थी। इंस्टाग्राम,स्नैपचैट पर भी यही कमी थी।
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न्यूयॉर्क और नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी की साझा पहल साइबरसेफ्टी रिसर्च सेंटर की इस रिपोर्ट में चारों प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध 86 युवा सुरक्षा फीचर का परीक्षण किया गया। इनमें केवल 35 फीचर, यानी करीब 40 प्रतिशत, ही ऐसे मिले जो घोषित तरीके से काम करते हैं और बच्चों के लिए आसानी से उपलब्ध भी हैं। हालांकि संबंधित कंपनियों ने रिपोर्ट के निष्कर्षों से असहमति जताते हुए कहा कि उनके सुरक्षा फीचर प्रभावी हैं और अध्ययन सामान्य उपयोगकर्ता अनुभव को सही ढंग से नहीं दर्शाता।
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खतरनाक सामग्री तक पहुंच रोकने में भी मिली कमी
रिपोर्ट के अनुसार चारों प्लेटफॉर्म दावा करते हैं कि वे बच्चों को आत्महत्या, स्वयं को नुकसान पहुंचाने और खान-पान संबंधी विकार जैसी संवेदनशील सामग्री से बचाते हैं, लेकिन परीक्षण में यह व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं मिली। टिकटॉक पर नाबालिग अकाउंट से संवेदनशील विषय खोजने पर ऐसे वैकल्पिक खोज सुझाव सामने आए जिनसे प्रतिबंधित सामग्री तक पहुंच बनाई जा सकती थी। इंस्टाग्राम,स्नैपचैट पर भी यही कमी थी।