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बहुरने लगे श्रीलंका के दिन: एक साल बाद आज से निर्बाध बिजली आपूर्ति बहाल, चुकानी होगी अधिक कीमत

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला,कोलंबो Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 16 Feb 2023 04:04 PM IST
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सार

बिजली की आपूर्ति के संबंध में ताजा निर्देशों के बारे में राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के मीडिया डिवीजन ने एक बयान भी जारी किया है। इस बयान में राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के हवाले से कहा गया है कि अधिकारियों को टैरिफ संशोधन लागू होने के बाद ग्राहकों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। 
 

Sri Lanka returns to uninterrupted power supply after a year at higher cost
श्रीलंका संकट - फोटो : Agency
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विस्तार

आर्थिक संकटों का सामना कर रहे श्रीलंका की हालत थोड़ी सुधर रही है। इसके ताजा संकेत निर्बाध बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए सरकार के उठाए कदम से मिले हैं। लोड शेडिंग के करीबन एक साल बाद आज यानी गुरुवार  से देश में लोगों को लगातार बिजली मिलेगी। हालांकि इसके लिए आईएमएफ द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुरूप बढ़े टैरिफ  से उन्हें चार्ज देना होगा। श्रीलंका सरकार का ने यह कदम तब उठाया है जब ऋणग्रस्त देश का लक्ष्य आईएमएफ से 2.9 बिलियन अमरीकी डॉलर की  किश्त प्राप्त करना है। 

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बिजली की आपूर्ति के संबंध में ताजा निर्देशों के बारे में राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के मीडिया डिवीजन ने एक बयान भी जारी किया है। इस बयान में राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के हवाले से कहा गया है कि अधिकारियों को टैरिफ संशोधन लागू होने के बाद ग्राहकों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। 
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इस आदेश के बाद राज्य बिजली इकाई ने कहा है कि बीते साल जनवरी से एक से 14 घंटे तक की बिजली कटौती का निर्देश गुरुवार को समाप्त कर दिया गया। बिजली ईकाई ने यह भी कहा है कि निर्बाध बिजली के लिए 66 फीसदी टैरिफ बढ़ोतरी प्रभावी होगी। यह दर बीते छह  महीनों में दूसरी है। इससे पहले बीते साल अगस्त में 70 फीसदी की दर से टैरिफ मेों वृद्धि की गई थी।

ऊर्जा मंत्री कंचना विजेसेकरा ने दिया ये बयान
ताजा निर्देश के क्रम में ऊर्जा मंत्री कंचना विजेसेकरा ने भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा निर्धारित लागत-चिंतनशील टैरिफ योजना का विकल्प चुना है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम आईएमएफ द्वारा दी जा रही ऋण सुविधा को सुरक्षित करने में बड़ी भूमिका अदा करेगा। उर्जा मंत्री ने कहा कि राजकोष के पास बिजली सब्सिडी देने के लिए पैसा नहीं है। ऐसे में इस कदम से राजस्व में वृद्धि के साथ हम बिना बिजली कटौती सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक ईंधन खरीदने में सक्षम होंगे।

 ट्रेड यूनियन और विपक्षी दल कर रहे विरोध
वहीं, सरकार के इस कदम का ट्रेड यूनियनों और विपक्षी दलों ने विरोध किया है। आलोचना करते हुए  टैरिफ वृद्धि को कम करने के लिए वे एक संयुक्त विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की भी योजना बना रहे हैं। आर्थिक संकट से ठीक से निपटने में सरकार की लापरवाही के कारण पिछले साल अप्रैल की शुरुआत से ही श्रीलंका में सरकार के खिलाफ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

गौरतलब है कि श्रीलंका बीते चार सालों में 2.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बेलआउट पैकेज के लिए आईएमएफ की औपचारिक मंजूरी का इंतजार कर रहा है। इस बेलआउट पैकेज के जरिए उसकी कोशिश अब तक के सबसे खराब आर्थिक संकट से उबरने की है। श्रीलंका पर 51 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज बकाया है, जिसमें से 28 अरब डॉलर का भुगतान 2027 तक किया जाना है। देश की स्थिति ऐसी है कि भारत ने भोजन और चिकित्सा आपूर्ति के अलावा हजारों टन डीजल और पेट्रोल भेजकर कर्ज में डूबे श्रीलंका की मदद की है। आर्थिक संकट के चलते श्रीलंका को भोजन, दवा, रसोई गैस और अन्य ईंधन, टॉयलेट पेपर और यहां तक की माचिस जैसी जरूरी वस्तुओं की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को ईंधन और भोजन के लिए दुकानों के बाहर घंटों इंतजार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। 

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